सऊदी अरब ने लेबनान के प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी को हिरासत में ले लिया

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सऊदी अरब ने लेबनान देश के प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी को हिरासत में ले लिया है। वो पिछले 12 दिन से अरब की हिरासत में हैं। उन्हे बंधक बनाया गया है और मनमाफिक बयान दिलवाए जा रहे हैं। यह सब इसलिए किया जा रहा है क्योंकि लेबनान के प्रधानमंत्री ने वियना समझौते का विरोध किया था। यह आरोप लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल आउन ने लगाएं हैं। इसी के साथ अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में मामला सुर्ख हो गया। बताया जा रहा है कि 4 नवम्बर को रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल से हमला किया गया था। अरब सरकार का कहना है कि यह लेबनान की हरकत है।
लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल आउन ने बुधवार को आरोप लगाया कि देश के प्रधानमंत्री साद हरीरी को सऊदी अरब में हिरासत में रखा गया है, जहां से उन्होंने इस महीने की शुरुआत में इस्तीफे का एलान किया था। आउन ने लेबनान के राष्ट्रपति के आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री हरीरी के 12 दिनों तक नहीं लौटने को किसी तरह तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए हम मानते हैं कि वियना समझौते के विरुद्ध जाते हुए उन्हें पकड़ लिया गया है और हिरासत में रखा गया है

पहले प्रधानमंत्री का बयान आया था
लेबनान के प्रधानमंत्री ने अपने पलायन पर कहा था कि उन्होंने आत्मरक्षा की वजह से इस्तीफा दिया है। जैसे ही उन्हें लगेगा कि वे सुरक्षित हैं अपने देश लौट जाएंगे। एक टीवी को दिए गए इंटरव्यू में हरीरी ने कहा था कि वे किसी के बंधक नहीं हैं।
सऊदी अरब का बयान
सऊदी अरब का कहना है कि हरीरी ने अपने सहयोगी लेबनानी संगठन हिजबुल्ला से जान को खतरा के चलते इस्तीफा दिया है। अमरीका और फ्रांस ने लेबनान की संप्रभुता और स्थिरता के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है।
ये है विवाद की जड़
चार नवंबर को रियाद एयरपोर्ट को निशाना बनाकर यमन से मिसाइल दागी गई। सऊदी अरब का आरोप है कि यह मिसाइल ईरान और लेबनान ने तैयार की थी। सऊदी अरब यमन में हाउती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। हाउती विद्रोहियों को लेबनानी संगठन हिजबुल्ला का समर्थन है। हिजबुल्ला हथियार संपन्न लड़ाकू संगठन है।

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