दिव्यांग उत्थान समिति की जिला स्तरीय बैठक में नि:शक्त जोड़ो का झलका दर्द

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रामकिशोर पंवार बैतूल

बैतूल। दिव्यांग उत्थान समिति बैतूल की एक बैठक प्रदेश अध्यक्ष हेमंत कुश्वाह की अध्यक्षता एवं पत्रकार रामकिशोर पंवार के मुख्य आतिथ्य में जिला मुख्यालय स्थित जयवंती हक्सर महाविद्यालय के सभाकक्ष में हुई। बैठक में जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं मां सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामकिशोर पंवार ने केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार से निवेदन किया कि वह अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप सुझाये गए दिव्यांग शब्द की जगह नि:शक्तजन को उपयुक्त एवं सम्मान जनक बताया है। दिव्यांग एक प्रकार से उन लोगो के लिए अपमान है जो जन्म से अपने कमजोर अंगो के चलते दुसरो पर आश्रित हो जाते है। इस बैठक में नि:शक्त शब्द को सर्व सम्मति स्वीकार किया गया। श्री पंवार ने सरकार से निवेदन किया कि वह इस शब्द को जो आम प्रचलन में है उसे सरकारी योजनाओं में शामिल करे। जिले भर से आए नि:शक्तजनो ने मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी नि:शक्त विवाह योजना में वर पक्ष या वधु पक्ष में एक नि:शक्त एवं एक सशक्त हो ताकि एक दुसरे का सहारा बन सके। दोनो नि:शक्त होने के कारण कोई किसी का सहारा नहीं बन सकेगा। बैठक में नि:शक्त के फर्जी प्रमाण पत्रो पर हुई शिक्षा विभाग की चिन्हीत भर्तियों को निरस्त कर ऐसे फर्जी शिक्षको के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज करने का प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारीत किया गया। उल्लेखनीय है कि जिले में कर्ण बाधित (बहरे होने) के फर्जी प्रमाण पत्र पर पांच दर्जन से अधिक शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे है। ऐसे लोगो को यदि मध्यप्रदेश सरकार में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण मिलेगा तो वास्तवीक रूप से नि:शक्तजनो के हको पर डाका डालने का काम होगा।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत कुश्वाह ने जिले में संगठन के गठन के लिए सभी को एक जूट होने का अनुरोध किया। बैठक में मौजूद कुछ नि:शक्त जोड़ो ने इस बात पर नाराजगी जाहीर की कि जिला मुख्यालय पर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री से सामुहिक नि:शक्तजनो का विवाह का कीर्तिमान स्थापित करवाने के बाद जिले के जनप्रतिनिधि से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी उन नि:शक्त जोड़ो को भूल गई। बैठक में उपस्थित नि:शक्तजनो ने एक स्वर में जिले से लेकर प्रदेश की सरकार को अपने सवालो के कटघरे में खड़ा करते हुए यह आरोप लगया कि जिले में बीते वर्ष पहले हुए सरकारी लक्ष्यपूर्ति के सामुहिक नि:शक्त विवाह कार्यक्रम में वाह वाही लूटने के बाद कोई भी उन नि:शक्त जोड़ो की पुछ परख करने नहीं पहुंचा। आज भी उन नि:शक्तजनो को शासन से विवाह के समय स्वीकार की गई घोषणाओं एवं सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका है। बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि जिले में सरकारी स्कूलो से लेकर विभागो तथा ऐसे सार्वजनिक स्थलो पर नि:शक्त जनो के लिए अलग से सुविधाजनक शौचालयों का निमार्ण किया जाए। बैठक में उपस्थिति नि:शक्तजनो ने जिला प्रशासन से यह मांग की है कि जिले में स्थानीय स्तर पर होनी वाली भर्तियों एवं सरकारी योजनाओं में नि:शक्तजनो का कोटा सिर्फ जिले के मूल निवासी लोगो से ही भरा जाए। दुसरे जिले के नि:शक्तजनो को यदि सरकारी भर्तियों एवं सुविधाओं का लाभ दिया जाता है तो स्थानीय नि:शक्तजनो को क्या मिलेगा? बैठक में जिला प्रशासन से नि:शक्तजनो को मिलने वाली बैसाखी से लेकर अन्य उपकरणो को पंचायत स्तर पर प्रदान करवाने की व्यवस्था की जाए ताकि नि:शक्तजनो को जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़े। बैठक में इस बात पर चिंता जाहीर की गई कि सरकार योजना तो बनाती है नि:शक्तजनो के नाम पर लेकिन सुविधाओं का लाभ सशक्त लोग उठा रहे है। बैठक में बैतूल जिला इकाई के अध्यक्ष रामनाथ यादव ,उपाध्यक्ष सुश्री रेणू ठाकुर , सचिव धनराज खाण्डवे, सहित कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित थे

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