नेत्रहीन ने लगाई गुहार, शौचालय बनवा दो सरकार

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“शासन की नजर में शौचालय के लिए पात्र नहीं हैं दृष्टिहीन युवक पात्रता संबंधी समस्त दस्तावेज हैं उपलब्ध”

दमोह – जनपद पंचायत जबेरा के ग्राम पंचायत मौसीपुरा मैं रहने वाले एक दृष्टिहीन युवक को यह कहकर वापस कर दिया कि आपका शौचालय नहीं बन सकता तुम अपात्र हो|
जानकारी के अनुसार ग्राम मोसीपुरा में रहने वाले 37 वर्षीय कूरे पटवा जो की पूर्ण रूप से अंधे हैं उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता; और सबसे बड़ी समस्या यह है कि घर में शौचालय ना होने के कारण शौच करने हेतु दर दर भटकना पड़ता है| दृष्टिहीन कुरे पटवा का कहना है कि पहले पिताजी मुझे शौंच के लिए बाहर खेतों में ले जाते थे, लेकिन जब से पिताजी का देहांत हुआ है तब से मैं बिल्कुल अकेला पड़ गया हूं, अगर घर में शौचालय होता तो कोई दिक्कत नहीं होती लेकिन घर में शौचालय ना होने के कारण मुझे दर दर की ठोकरें खानी पड़ती है, और यह भी कहा कि अगर मेरे पास दृष्टि होती तो मैं दर दर की ठोकरे खाने के लिए मजबूर नहीं होता, लेकिन दुख तो इस बात का है कि सरकार भी मेरा साथ नहीं दे रही है
अतः सरकार से निवेदन है कि मेरा शौचालय बनवाने की कृपा करें

हालांकि कुरे पटवा के पास समस्त प्रकार के दस्तावेज हैं जो उन्हें शौचालय के लिए पात्र बनाते हैं, जैसे कि बी पी एल राशन कार्ड, आधार कार्ड , दृष्टिहीन का निशक्तता प्रमाण पत्र, मतदाता परिचय पत्र,

विदित हो कि सरकार पूरे देश में शौचालय स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपए का खर्च कर रही है, जिसके घर में शौचालय नहीं है उसे तो पहली प्राथमिकता होनी चाहिए लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है कि जिसके घर में एक भी शौचालय नहीं है उसको पात्रता नहीं है, और जिसके घर में पहले से शौचालय बनी है उनके घर दोबारा पात्रता है

इस संबंध में समाजसेवी राव लाखन सिंह लोधी का कहना है कि भारत सरकार की घोषणा स्वच्छ भारत मिशन के अनुसार हर घर में शौचालय अनिवार्य है,
अगर वास्तव में अनिवार्य है तो फिर इसमें पात्र और अपात्र वाली बात कहां से आ गई,

इनका कहना है

लक्ष्मण सिंह लोधी (सचिव मोसीपुरा)

लिस्ट में उसका नाम पात्रता की श्रेणी में ना होने के कारण उसका शौचालय नहीं बनाया जा सकता

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