इसी वर्ष से ज्योतिष, वास्तु और पुरोहित विधा का डिप्लोमा पाठ्यक्रम

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ज्योतिष, वास्तु और पुरोहित विधा भारत की प्राचीन संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण और विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा ठोस कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग इसी वर्ष से ज्योतिष, वास्तु और पुरोहित विधा पर एक वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू करेगा। स्कूल शिक्षा मंत्री आज भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। भोपाल के बागसेवनिया स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में आयोजित कार्यशाला में देशभर के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य भाग ले रहे हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिकता से भारत की प्राचीन संस्कृति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन, सामाजिक घटनाक्रम और जलवायु परिवर्तन को ज्योतिष विद्या प्रभावित करती है। इन परिवर्तनों को समझने के लिए अच्छे ज्योतिषाचार्य की आवश्यकता होती है। कुँवर शाह ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र की वैज्ञानिकता और वर्तमान समय में प्रासंगिकता विषय पर प्रत्येक जिला मुख्यालय पर कार्यशाला होगी। इन कार्यशालाओं में समाज के सभी वर्ग के लोगों को शामिल किया जाएगा। प्रदेश में संस्कृत के विकास की चर्चा करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि भोपाल में संस्कृत विषय पढ़ने वाली छात्राओं के लिए 100 सीटर छात्रावास शुरू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए प्रयास किये जाएंगे।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन के पूर्व उप-कुलपति प्रो. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष ज्ञान आत्म-कल्याण और लोक-कल्याण का विषय है। इस वजह से इसे समाज में हमेशा उच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ इस विषय पर नये-नये शोध किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने पंचांग और कालगणना के महत्व के बारे में भी जानकारी दी। कार्यक्रम को प्रो. एम. चन्द्रशेखर ने भी संबोधित किया। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के प्राचार्य प्रो. हंसधर झा ने कार्यशाला के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला का समापन 29 नवम्बर को शाम 4 बजे होगा। समापन कार्यक्रम में भी स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी मौजूद रहेंगे।

दो दिवसीय कार्यशाला में मुख्य रूप से व्यक्ति एवं समाज पर ग्रहों के प्रभाव, आजीविका निर्धारण में ज्योतिष की भूमिका, रोगों के निदान एवं समाधान में ज्योतिष शास्त्र की भूमिका और प्राकृतिक आपदाओं के फलादेश में ज्योतिष की भूमिका पर चर्चा की जा रही है।

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