कथक नृत्यांगना शिवालिका कटारिया ने सिखाई भारतीय नृत्य की बारीकियां 

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भारतीय शास्त्रीय परंपरा में नृत्य विधा का अहम स्थान है कत्थक भरतनाट्यम कुचिपुड़ी और मणिपुरी सहित 8.00 बजे नृत्य शैलियों में भारत ने विश्व में ख्याति पाई है नृत्य शैली में अंग भाषा वह भावाभिव्यक्ति से पहचाना जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगना शिवालिका कटारिया ने विद्यार्थियों से यह बात केंद्रीय विद्यालय बड़वानी एवं एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय बड़वानी में कहीं। उन्होंने बालिकाओं को शास्त्रीय नृत्य कला से अवगत कराया और कथक नृत्य की प्रस्तुति भगवान गणेश की वंदना से प्रारंभ की इसके बाद उन्होंने विभिन्न मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं को नृत्य का अहम हिस्सा बताते हुए शिव शक्ति राम कृष्ण और राधा की मुद्राएं बनाकर कदमताल करना भी सिखाया साथ ही तीन ताल में 16 मात्रा पर कदमताल सिखाई।
स्पीक मैके चेप्टर बड़वानी के द्वारा यह आयोजन शासकीय विद्यालयों में सप्ताह भर चलेगा इस दौरान केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य श्रद्धा झा ने अतिथि कलाकार का स्वागत किया तथा उन्होंने कहा कि शास्त्रीय नृत्य कला भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है इसमें रियाज करना जरूरी है तब ही आप एक कुशल कलाकार बन सकते हैं एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल में डॉ राम सहाय यादव के द्वारा कलाकार का स्वागत किया गया एवं सुनील पुरोहित के द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया । केंद्रीय विद्यालय बड़वानी में कलाकार का आभार प्रदर्शन व्याख्याता कुंदन राठौड़ के द्वारा किया गया स्पीक मैके संस्था के संयोजक अनिल जोशी ने बताया कि कल ग्रामीण क्षेत्र की शालाओं हाई स्कूल सजवानी एवं हाई स्कू

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