मां को है विश्वास कि ऋषभ भी एक दिन जायेगा स्कूल और पढ़-लिखकर कमायेगा नाम, करेगा उसके सूने जीवन में उजियारा।

Share Scn News India

ऋषभ पिता सुखदेव महोबे जन्म से ही फ्लेसिड एवं मोटर डिले से ग्रसित था। माता श्रीमति ज्योति महोबे का जटिल प्रसव सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमला में दिनांक 21 फरवरी 2014 को हुआ। शिशु के जन्म के समय जब वो रोया नहीं तो ज्योति और उसके परिजन घबरा गए। ज्योति के पति सुखदेव महोबे ड्रायवर है तथा ज्योति महोबे ग्रहणी हैं। सुखदेव की आमदनी भी ज्यादा नहीं है। श्रीमति ज्योति की ससुराल ससाबड़ आमला की है। कहीं बाहर उपचार कराना माता-पिता के लिये संभव ही नहीं था। ऋषभ की स्थिति को देखते हुये सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमला से चिकित्सकों ने ऋषभ को जिला अस्पताल बैतूल रेफर कर दिया जहां चिकित्सकों ने बताया कि ऋषभ फ्लेसिड (अंगो का लुंजपुंजपन) एवं शरीर के विकास की धीमी गति (मोटर डिले) बीमारी से ग्रसित है। ऋषभ को 15 दिन एस.एन.सी.यू. (गहन शिशु चिकित्सा इकाई) में भर्ती किया गया। ऋषभ ने रोना तो शुरू किया किन्तु उसे बहुत ज्यादा झटके आने लगे। ऋषभ की स्थिति माता-पिता से देखी नहीं जाती थी। तत्कालीन जिला टीकाकरण अधिकारी एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ स्व. डाॅ. अरूण कुमार श्रीवास्तव एवं डाॅ. जगदीश घोरे द्वारा ऋषभ पर विशेष ध्यान देकर उपचार दिया गया। जिससे ऋषभ थोड़ा ठीक होने लगा। चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि इस प्रकार की बीमारी में बच्चा धीरे-धीरे सीखेगा उसकी प्रगति देर से होगी। परिजन एस.एन.सी.यू. में एक माह बाद भी लगातार दिखाते रहे एवं चिकित्सक उपचार देते रहे बाद में परिजनों ने जिला अस्पताल जाना छोड़ दिया। इस बीच ऋषभ सवा दो साल का हो गया और उसकी हालत में कोई सुधार नहीं आया। न ही वह गर्दन सम्भाल पाता था, न ही वह वह कुछ बोलता था, न ही खड़ा हो पाता था। आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर न होने के कारण ऋषभ के माता-पिता ऋषभ को कहीं बाहर दिखाने नहीं ले जा पाये। इसी बीच मई 2016 में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमला में आर.बी.एस.के. (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के शिविर का आयोजन हुआ जिसमें ऋषभ के माता-पिता ऋषभ को लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने डी.ई.आई.सी. सेंटर (जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र) बैतूल ले जाने की सलाह दी एवं संपूर्ण जानकारी से अवगत कराया। इसी बीच ज्योति अपने पति सुखदेव के साथ बैतूल में ही इन्द्रा नगर नागपुर नाका सदर में रहने लगी। ज्योति ऋषभ को लेकर उपचार हेतु जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में आने लगी जहां डाॅ. आनंद गुप्ता ने ऋषभ को स्पीचथेरेपी, फिजियोथेरेपिस्ट सबा सक्स ने न्यूरोडेवलपमेन्ट एवं कमलेश कासलेकर ने मेन्टल अवेयरनेस (शिक्षा के बौद्धिक एवं शारीरिक तरीकों) के द्वारा लगातार उपचार दिया। शुरू-शुरू में ज्योति 02 घंटे आती थी उसे प्रारंभ में विश्वास ही नहीं था कि उसके बेटे की स्थिति में कोई सुधार होगा, इसी बीच मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. प्रदीप मोजेस अपने नियमित निरीक्षण के दौरान ज्योति से डी.ई.आई.सी. में मिले एवं उन्होंने उसे धीरज रखकर नित्य आने के लिये परामर्श दिया। जब ज्योति को ऋषभ में थोड़ा सुधार परिलक्षित हुआ तो वह 04 घंटे तक रोज आने लगी। उसके लिये जैसे अपने बेटे को लाना एक ड्यूटी बन गया। अभी भी गत दिनांक 18.12.2017 तक वह लगातार अपने बेटे को ला रही है। ज्योति के चेहरे पर असीम मुस्कान और संतोष के भाव हैं। वह कहती है कि जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में कार्यरत समस्त स्टाफ का व्यवहार बहुत सहयोगात्मक है। ऋषभ के लिये मिली निःशुल्क सहायता और सेवा से ज्योति बहुत प्रसन्न है। अब ऋषभ गर्दन सम्भाल लेता है, बैठ जाता है, खड़ा भी हो जाता है और मम्मी-पापा, अम भी बोल लेता है। अब मां को विश्वास है कि ऋषभ भी सामान्य बच्चे की तरह एक दिन स्कूल जायेगा और पढ़-लिखकर नाम कमायेगा, उनके सूने जीवन में उजियारा करेगा। पिता सुखदेव भी अपने बेटे की प्रगति से बहुत खुश हैं और जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र की निःशुल्क उपचार पद्धति की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!