अतिथि शिक्षक एक जुट होकर भरेंगे हुंकार ।

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राजेन्द्र तिवारी

दमोह जिले के अतिथि शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने हटा में एक शपथ लेते हुए रैली निकाली. जिले के अतिथि शिक्षक गौर शंकर मंदिर परिसर में एकत्रित हुए जहां पर सभी ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भाजपा को वोट नहीं देने की शपथ ली. वहीं एक रैली निकालकर लोगों को वर्तमान सरकार के खिलाफ वोट देने की अपील की.

मध्य प्रदेश सरकार का 2007 मे शिक्षा विभाग मे लिया गया निर्णय काफी सराहनीय रहा था , 2007 के निर्णय ने काँग्रेस द्वारा लिये गये शिक्षा विभाग मे सुधार हेतु निर्णय किये गये सभी पर भारी था । क्योंकि शिवराज सरकार ने अतिथि शिक्षक की नियुक्ति कर बच्चो मे गुडवत्ता मे सुधार हुआ , तो वही पर रोजगार के अवसर मे वॄद्धि हुई ।
लेकिन यही अतिथि शिक्षक बेरोजगार युवकों को गले की फास बन चुकी है , न तो प्रशासन संविदा शिक्षक की भर्ती कर पाई , और न ही बेरोजगार युवकों को रोजगार दे पाई । आज स्तिथि येसी बन चुकी है की कुछ युवाओं क ती अतिथि शिक्षक भर्ती ने कॅरियर ही समाप्त कर दिया , ded bed मे लाखो खर्च कर चुके युवाओं पर अतिथि शिक्षक की भर्ती भारी पढ़ गई है , न तो घर का गुजारा चल रहा है और न ही कर्ज चुका पा रहे है , जिससे अतिथि शिक्षक की स्तिथि दयनीय बन चुकी है ।
न तो प्रशासन का इस और ध्यान है , और लगातार शोषण कर रहा है ।
यदि येसे हालात रहे तो शिक्षा विभाग पूरी तरह अतिथि शिक्षक पर निर्भय रहने वाला एक दिन सबसे पिछडा विभाग बन जायेगा ।
दस वर्षों से शांत अतिथि शिक्षक अब सरकार से आमनेसामने दो दो हाथ करने को तैयार है , अतिथि शिक्षक अभी तक बच्चो का भविष्य ध्यान मे रख कर कोई सख्त क़दम नहि उठा रहे थे । लेकिन अब अतिथि शिक्षकों के मन भी विचलित हो चुके है ,अब शांत रहने के मूड मे दिखाई नहि दे रहे है ।
यदि किसी को भ्रम है की अतिथि शिक्षक एक जुट नहि है , तो उनकी भूल होगी । सभी अतिथि शिक्षक एक मंच से एक आवाज़ बनेंगे । और बहुत जल्द सरकार से सामना करेगे , अब किसी प्रकार का कोई आश्वसन मे नहि हटेंगे अब तो इस पार या उस पार की लड़ाई लडी जायेगी । यदि अतिथि शिक्षक किसी को जीता नहि सकते तो हराने की हिम्मत रखते है ।
जब किसी पार्टी के दस बीस हजार कार्यकर्ता चुनाव जीता कर सरकार बना सकते है , तो अतिथि शिक्षक लाखो की संख्या मे कुछ भी कर सकते है ।
जब एक शिक्षक चाणक्य घनांद जैसे तानाशाह का अंत कर सकता है तो ये तो लोकतंत्र है । अब सरकार को संभलने की ज़रूरत है ।
सभी अतिथि शिक्षकों से निवेदन है सारे मत भेद भुलाकर एक साथ आये । और दूसरो के लिये नहि तो कम से कम अपने लिये लड़े , अपने हक के लिये लड़े ।

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