दमोह जिले का ग्राम मकान महिलाओं की जागरूकता की मिसाल बना

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राजेन्द्र तिवारी रिपोर्ट
दमोह ग्राम बकायन महिलाओं की जागरूकता की मिसाल बन गया है यहां लगभग 250 महिलाओं आजीविका मिशन से जुड़कर सपन व्यवसाय बन गया है इन महिलाओं ने 19 समूह बनाए हैं मैं मिशन से आर्थिक मदद ले कर अपने घरों में ही विभिन्न प्रकार के पापड़ बड़ी पिक्चर बनाते हैं अपनी बनाई चीजों दमोह से भोपाल ताकत हाट बाजार मैं खुद बेचते हैं और सम्मान के साथ अच्छी आमदनी प्राप्त करते हैं थे महिलाओं परिवार के आर्थिक रूप से सक्षम बन रहे हैं श्याम रानी सुशीला चोरसिया गेंदा बाई प्रदी प्रजापति ऐसी महिला है जिन्होंने आजीविका मिशन के जरिए अपने ग्राम में एक मिसाल कायम की है इनके देखा कर कई महिलाएं स्व सहायता समूह से जोड़ी है ऐसी ग्राम की पार्वती बाई विश्वकर्मा है जो पहले बड़ी बनाने की साथी मजदूरी करती थी इस काम से इनके परिवार का भरण पोषण नहीं हो पाता था आजीविका मिशन के अधिकारी और ग्राम की उनकी सखी आरती पोराणिक ने सलाह मिली तो पार्वती ने समूह का गठन कर ₹20 हजार रुपए का लोन ले लिया लोन की राशि से उड़द बड़ी मिक्कर की बडी पापड़ बिजोरे आलू और चावल के पापड़ बनाने का काम शुरू कर दिया अब पार्वती का यह व्यवसाय खूब चल निकला है पार्वती का कहना है कि इस व्यवसाय से बहुत ₹80 हजारों रुपए तक का लाभ कमा चुकी है किसी गांव की उच्च शिक्षा प्राप्त छात्रा ममता यादव हेमा विश्वकर्मा और प्रभा विश्वकर्मा अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने घर में बड़ी पापड़ बनाने अपने माता-पिता में सहयोग कर रही

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