चार दिवसीय यजुर्वेद पारायण यज्ञ का समापन

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दीपेश दुबे

भौतिकवादी युग में योग साधना से मानव रोगों से छुटकारा पा सकता हैं- आचार्य कर्मवीर

सारनी। भारतीय संस्कृति की गरिमा की पहचान वेदों के कारण ही है। वार्ड क्रमांक 5 में सुनील बघेल के निवास पर चार दिवसीय यजुर्वेद पारायण यज्ञ का शनिवार समापन हुआ।

अजमेर से आये आचार कर्मवीर ने कहा भौतिकवादी युग मे मनुष्य योग साधना से असाध्य रोगों से छुटकारा पा सकता है। यजुर्वेद परायण यज्ञ का शुभारंभ 7 मार्च को हुआ चार दिन तक चले वैदिक यज्ञ में मानव कल्याण के लिए अचार कर्मवीर और आचार्य निरंजन जी ने कहा कि वेदों का उपदेश किसी एक जाति सम्प्रदाय व किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं है। वेद परमात्मा की वाणी है, वेद के प्राचार्य प्रसार का मूल उद्देश्य मनुष्य जीवन मे बुराइयों को छोड़कर अच्छाइयों को ग्रहण कर स्वयं और दूसरों का कल्याण करना है।चार दिवसीय परायण यज्ञ में अजमेर से आए आचारों ने अपने उद्बोधन में कहा की
वेदों का पुनरउत्थान कर प्रचार प्रसार के उद्देश्य से महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। उनके आदर्शो को आगे बढ़ाते हुए आर्य मानव कल्याण के लिए वेदों के माध्यम से अलख जगा रहा है।यजुर्वेद पारायण यज्ञ में नगर के सैकड़ों साधको ने भाग लेकर भागदौड़ भरी जिंदगी, समय परिवर्तन के साथ भौतिकवादी युग में मानव विभिन्न रोगों से ग्रसित होते जा रहे हैं। आज बढ़ते परिवेश में तनाव ही अनेक रोगों का कारण बन रहा है। योग साधना से ही मानव रोगों से छुटकारा पा सकते हैं और जीवन को स्वस्थ्य बना सकता है। यह वचन आचार्य कर्मवीर व निरंजन जी ने व्यक्त किए । पारायण यज्ञ का प्राचीन काल से ही मानव जीवन में विशेष महत्व रहा है। शास्त्रों में मानव के लिए रोग मुक्ति से लेकर आत्म शुद्धि व दीर्घायु जीवन के लिए योग साधना को सबसे सशक्त माध्यम है।उन्होंने कहा कि योग साधना जहां जीवन को तनाव मुक्त बनाने में मदद करता है। वहीं मानव जीवन को स्वस्थ रह कर जीवन को व्यवस्थित भी करता है। जीवन को स्वस्थ बनाने में योग साधना को अपनाने से मनुष्य तनाव भरी दिन चर्या से छुटकारा पा सकता है।परमात्मा को मानने से सभी प्रकार के बुरे कर्म स्वत: ही दूर होने लगते है।परमात्मा के निकट जाने के बाद हम निर्भय, सहनशील, विवेकी, दयालु बन जाते हैं। परंतु आज हम जिस स्तिथि में परमात्मा से मिलना चाहते है वह संभव नहीं है।

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