जनसम्पर्क भवन निर्माण में भी बड़े पैमाने पर हो रहा मुरम का उपयोग,खनिज राजस्व विभाग मौन

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प्रदीप चौकीकर/ वामनराव पोटे

बैतूल – अवैध खनन के मामले में काग्रेस और भाजपा से जुड़े नेतानुमा ठेकेदार एक ही थैले के चट्टे बट्टे साबित हो रहे है ।बैतूल शहर में बन रहे सरकारी भवन और निजी भवनों में सरकारी पहाड़ खोदकर भराव भर रहे है ।इधर सिविल लाइन में बन रहे जनसम्पर्क कार्यालय के भवन में भी बिना रॉयल्टी के मुरम का उपयोग किया जा रहा है ।इधर सोनाघाटी में भी मुरम की दुकान खुली है जिसे मुरम चाहिए फोकलेन डम्फर जेसीबी ट्रेक्टर ट्राली उपलब्ध है ।

अब सवाल यह है कि क्या मुरम पर रॉयल्टी नही है क्या, सरकारी जमीन और निजी जमीन पर शहर के आसपास पहाड़ खोदने का कोई सरकारी नियम कायदे नही बने ,क्या कोई भी सरकारी स्टाम्प पर एग्रीमेंट कर कही भी मौत के गड्ढे खोद सकता है ,इधर जानकार बताते है कि गरीब आदिवासी किसानों को जमीन समतल करने सरकारी बलराम तालाब खोदने का लालच देकर किसानों से स्टाम्प पर लिखा लिया जाता है और बेहताशा खुदाई कर मुरम कोपरा निकालकर किसानों के खेत और सरकारी पहाड़ो को खोदकर कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है।बताया जाता है कि मुरम खुदाई की अनुमति भी पूरे नियम कायदे से दी जाती है सिया और डिया से बाकायदा पूरी कागजी कार्यवाही के बाद खनिज विभाग अनुमति जारी करता है और रॉयल्टी पास जारी करता हैं पर बैतूल शहर के आसपास हर कही भी मुरम की बेहताशा खुदाई की जा रही है और सरकारी और निजी भवनों में भराव भरने के काम मे दर्जनों डम्फर ट्रेक्टर ट्राली लगे है पर इस और देखने वाले खनिज और राजस्व विभाग सब कुछ जानते हुए अनजान बने है ।एक गांव कोटवार और पटवारी ने नाम नही छापने की शर्त पर बताया कि काग्रेस और भाजपा से जुड़े नेताओ के दबाव के चलते कोई कार्यवाही नही कर पाते नही तो वे रातो रात शिकायत कर चलता कर देते है ।इधर खनिज विभाग के अशोक नागले ने बताया कि किसान से स्टाम्प पर एग्रीमेंट कर मुरम खोदना अवैध खनन ही कहलाता है उन्होंने कहा कि पूरी कानूनी कार्यवाही कर सिया डिया से अनुमति ली जानी चाहिए और रॉयल्टी पास भी जारी करवाना चाहिए।

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