भाजपा सरकारो की उपेक्षा एवं तिस्कार ने ताप्तीचंल में जन आन्दोलन की आग लगाई

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बैतूल से विशेष सचित्र रिर्पोट :- रामकिशोर दयाराम पंवार रोंढावाला
बैतूल(मध्यप्रदेश)। हिन्दू मान्यता अनुसार ताप्ती को सूर्य एवं उनकी जीवन संगनी छाया की पुत्री तथा न्याय के देवता कर्मफलदाता शनि की बहन के नाम से पुकारा जाता है। यूं तो ताप्ती धरती पर 21 प्रकल्पो में अवतरीत हुई है जिसके चलते उसके अनेक नाम भी प्रचलित है।

हिन्दुस्तान के बाहर थाईलैंड की एक नदी को तापी नदी का नाम भी अगस्त 1915 में इसकी लोकप्रियता एवं आस्था विश्वास के चलते दिया गया। महाभारत, स्कंद पुराण एवं भविष्य पुराण में ताप्ती नदी की महिमा कई स्थानों पर बतायी गई है। अखण्ड भारत के केन्द्र बिन्दू कहे जाने वाले सतपुड़ा पर्वत माला की श्रंखलाओं से घिरे बैतूल जिले के मुलतापी से निकलने वाली पुण्य सलिला माँ सूर्यपुत्री ताप्ती इन दिनो राजनैतिक स्वार्थ सिद्धी का केन्द्र बनी हुई है।

कहने को तो ताप्ती न्याय के देवता शनि की बहन है लेकिन उसके साथ ही उसके आंचल में बसे लोगो के साथ अन्याय बरसो से हो रहा है। कभी गंगा ने ताप्ती का महात्म करने की शर्त पर स्वर्ग से धरती पर आना स्वीकार किया तो कभी किसी ने ताप्ती को अपने तपबल के प्रभाव में विपरीत दिशा में बहाने की कुचेष्ठा की। इन दिनो सतपुड़ा की पहाडिय़ों में बसे ताप्तीचंल में पुण्य सलिला माँ सूर्यपुत्री ताप्ती को लेकर केन्द्र एवं प्रदेश तथा पड़ौसी राज्यों महाराष्ट्र एवं गुजरात की भाजपा सरकारे एक सोची समझी साजिश के तहत ताप्ती मेगा रिचार्ज के बहाने बैतूल जिले के संग छल कर रही है।

भाजपा सरकारो की साजिशो के परत दर परत पन्ने खुलने से जैसे – जैसे सच्चाई सामने आने लगी है वैसे – वैसे जिले के अंदर जन आन्दोलन सुलगने लगा है। आजादी के बाद से देखा जा रहा है कि बैतूल जिले की जीवन रेखा ताप्ती के बारे में यह आम धारणा है कि ताप्ती जिले के लिए संकट का कारण बनने लगी है। ताप्ती के तेज के चलते जिले के मैदानी से लेकर पठाड़ी एवं पहाड़ी तथा जिले की घाटियां भी दिन प्रति दिन कटते जा रही है।

जिले की माटी एवं घाटी को निगलते जा रही ताप्ती का तेज यदि बैतूल जिले में नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नही जब ताप्ती भी सरस्वती और फालगुनी की तरह इतिहास के पन्नो में नजर आएगी। जिले में ताप्ती के मुलतापी से लेकर जिले की सीमा में लगभग सरकारी रिकार्ड अनुसार ताप्ती कुल 740 किमी बहती है, लेकिन हकीगत में इसकी लम्बाई जल प्रवाह के अनुसार 750 किमी है। ताप्ती को संस्कृत मराठी एवं गुजराती में तापी के नाम से पहचाना जाता है।

पश्चिमी भारत की प्रसिद्ध नदी है। यह मध्य प्रदेश राज्य के बैतूल जिले के मुलताई से निकलकर सतपुड़ा पर्वत प्रक्षेपों के मध्य से पश्चिम की ओर बहती हुई महाराष्ट्र के खानदेश के पठार एवं सूरत के मैदान को पार करती और अरब सागर में गिरती है। नदी का उद्गगम् स्थल मुल्ताई है। यह भारत की उन मुख्य नदियों में है जो पूर्व से पश्चिम की तरफ बहती हैं। वैसे ताप्ती की दो सहायक नदियों में नर्मदा नदी और माही नदी का नाम शामिल है। यह नदी पूर्व से पश्चिम की ओर लगभग 740 किलोमीटर की दूरी तक बहती है और खम्बात की खाड़ी में जाकर मिलती है। सूरत बन्दरगाह इसी नदी के मुहाने पर स्थित है। इसकी प्रधान उपनदी का नाम पूर्णा है।

इस नदी को चन्द्रपुत्री भी कहा जाता है। समुद्र के समीप इसकी 32 मील की लंबाई में ज्वार आता है,किंतु छोटे जहाज इसमें चल सकते हैं। पुर्तगालियों एवं अंग्रेजों के इतिहास में इसके मुहाने पर स्थित स्वाली बंदरगाह का बड़ा महत्व है। गाद जमने के कारण अब यह बंदरगाह उजाड़ हो गया है। ताप्ती नदी की घाटी का विस्तार कुल 65.145 किमी में है, जो भारत के कुल क्षेत्रफल का 2 प्रतिशत है। यह घाटी क्षेत्र महाराष्ट्र में 51.504 किमी, मध्य प्रदेश में 9.804 किमी एवं गुजरात में 3.837 किमी है। ताप्ती घाटी महाराष्ट्र उत्तरी एवं पूर्वी जिलों जैसे अमरावती, अकोला, बुल्ढाना, वाशिम, जलगांव, धुले, नंदुरबार एवम नासिक में फैली है। साथ ही मध्य प्रदेश के बैतूल और बुरहानपुर तथा गुजरात के सूरत एवं तापी जिलों में इसका विस्तार है। इसके जलग्रहण क्षेत्र का 79 प्रतिशत अकेले गुजरात है। शेष 21 प्रतिशत मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र राज्य में पड़ता है। सबसे शर्मसार कर देने वाली बात तो यह है कि लगभग 250 किमी बैतूल जिले में बहने के बाद भी बैतूल जिले में ताप्ती का जल प्रतिशत 3 भी नहीं है।

ताप्ती नदी की प्रधान सहायक नदियो में मिन्धोला, गिरना, पन्ज़ारा, वाघूर, बोरी एवं आनेर। इनके अलाव अन्य छोटी सहायक नदियो में अरुणावती नदी शिरपुर, गोमती नदी नन्दुरबार,वाकी नदी धुले जिला महाराष्ट्र, बुरई नदी धुले,पन्ज़ारा नदी, जलगांव एवं धुले जिले, कान नदी, धुलेबोरी नदी जलगांव,नेर नदी जलगांव ,गरना नदी धूले, तितूर नदी जलगांव,मौसम नदी मालेगांव,वाघूर नदी जलगांव, भैसदेही से निकलने वाली पूर्णा नदी अमरावती जिले से होती हुई चांगदेव पर संगम करती है। नलगंगा नदी बुलढाना ,विश्वगंगा नदी बुलढाना,निपणी नदी बुलढाना, मान नदी बुलढाना,अकोलामास नदी, बुलढाना,उतावली नदी बुलढाना, अकोलाविश्वमित्री नदी अकोला,नर्गुण नदी वाशिम, अकोलागांधारी नदी अकोला, आस नदी अकोला, वान नदी बुलढाना,मोरना नदी अकोला, वाशिमशाहनूर नदी अकोला, अमरावती भावखुरी नदी अमरावतीक, तेपूर्णा नदी अकोला,उमा नदी अकोला, वाशिमपेन्ढी नदी अकोला, अमरावती चंद्रभागा नदी अमरावती,भूलेश्वरी नदी अमरावती, आर्णा नदी अमरावती, गादग नदी अमरावती, सिपना नदी अमरावती, खापरा नदी अमरावती, खांडू नदी अमरावती, तिगरी नदी अमरावती, सुरखी नदी अमरावती,बुर्शी नदी अमरावती, गंजाल नदी, बैतूल, अम्भोरा नदी मासोद, तवा नदी बैतूल। इन नदियों में बैतूल जिले से जिल संग्रहण करके ले जाने वाली नदियों में गंजाल, अम्भोरा, तवा, पूर्णा, खाण्डू , सहित ताप्ती एक तीन दर्जन से अधिक छोटी – बड़ी सहायक नदियां है जो बैतूल जिले में एवं कुछ महाराष्ट्र के जिलो में ताप्ती में समाहित होती है। ताप्ती में दस ऐसे स्थान चिन्हीत है जहां पर दो या तीन नदियों का संगह होता है। वैसे त्रिवेणी संगम के रूप में श्रवण तीर्थ का नाम सर्वाधिक पावन माना गया है। बैतूल जिले में ताप्ती – तवा – अम्भोरा के त्रिवेणी संगम को श्रवण तीर्थ कहा जाता है। जिले के जल विशेषज्ञो को मानना है कि बैतूल जिले की तीन दर्जन से अधिक नदियां अपने – अपने आंचल में करोड़ो लीटर शुद्ध जल को लेकर आती है। जिले से निकलने वाली बैतूल जिले की जीवन रेखा ताप्ती पर सबसे अधिक डेम / बांध / जलाशय महाराष्ट्र में ही बने है। बैतूल जिले में चंदोरा बांध का निमार्ण 1986 में चन्दोरा गांव के पास किया गया जो मुलताई के समीपस्थ है। चंदोरा बांध से 17.26 2043 सिंचाई पूरी होना बताया जा रहा है। प्रदेश के खण्डवा से भाजपा के सासंद एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार चौहान ने लोकसभा की जलसंसाधन मंत्रालय की समिति में सदस्य बनने के बाद से उन्होने बीते 48 सालो (1970)से ठण्डे बस्ते में पड़ी ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना का एक ऐसा हौव्वा खड़ा किया जिसमें यह बताने का प्रयास किया गया कि ताप्ती नदी से महाराष्ट, गुजरात, और मध्यप्रदेश के खण्डवा, बुरहानपुर जिले के नदी – नालो एवं कुओं का रिचार्ज होगा।

बैतूल जिले की सीमा में ताप्ती पर कोई बड़ा डेम नही बनने से जिले का पूरा बरसाती पानी बह कर चला जाता है। वर्ष 2011 में बतौर मुख्यमंत्री भैसदेही तहसील की ग्राम पंचायत रामघाटी में आए शिवराज सिंह ने ताप्ती पर श्रखंलाबद्ध 28 बैराज बनाने की घोषणा की थी, हालांकि वे आए थे आरएसएस से जुड़े एक एनजीओ के द्वारा शुरू किए गए करोड़ो की लागत के पूर्णा पुर्नजीवन प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए लेकिन करोड़ो रूपैया पानी की तरह बहाने के बाद भी ताप्ती की सहायक नदी बेचारी पूर्णा पुर्नजीवित नहीं हो सकी। जानकारो का ऐसा मानना है कि ताप्ती मेगा रिचार्ज से बैतूल जिले का भलां कुछ नहीं होने वाला क्योकि पानी का भरपूर उपयोग नदी की बहती धारा के नीचे के जिले एवं प्रदेशो को मिलेगा। ताप्ती मेगा प्रोजेक्ट के पक्षकारो की दलील है कि सूर्यपुत्री ताप्ती सलिला अपने बाढ़ का पानी समुद्र में ले जाने के बजाय आस-पास प्राकृतिक नहरों में भर देगी। इस जल संरक्षण से बुरहानपुर जिले में भू.जल भंडारण क्षमता में वृद्धि होगी। इसे दृष्टिगत रखते हुए ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना गहन तकनीक और अध्ययन से बनाई गई है। भारत सरकार जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय को इस योजना का प्रस्ताव प्रेषित किया जा रहा है। इसमें मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में रिचार्ज योजना को अंजाम दिया जायेगा। बुरहानपुर जिले में मेगा रिचार्ज योजना पर लगभग साढ़े आठ करोड़ रूपये व्यय अनुमानित है। इस योजना के तहत जल भंडारण के लिये ताप्ती नदी के बांयी और दांयी तट पर लगभग 200 किलो मीटर के अंतराल में भू.जल स्तर बढ़ाने नहरों को तकनीकि रूप दिया जायेगा। जिससे यहा की कृषि, उद्यानिकी व पेयजल तथा उद्योगो के लिए पर्याप्त जल आपूर्ति संभव हो सकेगी। बुरहानपुर जिला केला उत्पादक क्षेत्र है। इसके उत्पादन के लिये एक हेक्टेयर में करोड़ो लीटर पानी की आवश्यकता होती है।

भूजल स्तर सतत नीचे जा रहा है। भंडारण क्षमता बढ़ाने में उस अनुपात में कार्य नही किये गये है। इस तरह से जल की कमी कृषि,उद्यानिकी के लिये हो रही है। ताप्ती बेसिन 590.63 मिलीमीटर जल उपलब्ध हैं। बुरहानपुर जिला लगभग 14 छोटी एवं बड़ी नदियों के आसपास विकसित हुआ है। जिनमें मुख्यत: ताप्ती, मोहना, अमरावती, छोटी उतावली, सिवल, बड़ी उतावली, खोकरी, खड़की, देवल एवं साजनी मुख्य नदियां जो कि ताप्ती बेसिन में आती है। ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना केवल खण्डवा – बुरहानपुर जिले के लिए जीवनदायनी सिद्ध होगी। इसको क्रियान्वित कराने हेतु बुरहानपुर से विधायक एवं राज्य सरकार में केबिनेट मंत्री रही श्रीमति अर्चना रमेश चिटनीस कहती है कि उन्होने 12 वर्षों में मध्यप्रदेश विधानसभा से लेकर राष्ट्रपति भवन तक गुहार लगाई। किन्तु भारत सरकार में तत्कालीन शासकों को इस योजना की महत्ता और जनकल्याण का अहसास ही नहीं हो सका जिसके पीछे का प्रमुख कारण यह रहा कि इस योजना से मेलघाट के वन्यजीवो के जिए आरक्षित जमीन का डूब में आ जाना। सरकार अभी भी इस बात को स्पष्ट नहीं कर रही है कि परियोजना में घुटीगढ़ में डेम बनेगा या नहीं क्योकि यदि डेम नही बनता है तो पानी कैसे रोका जा सकेगा! वर्तमान समय में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 27 जून 2014 को हुई पत्राचार की शुरूआत के बाद म.प्र.शासन के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह जी चौहान द्वारा भी केन्द्रीय मंत्रियों को ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना हेतु आग्रह किया गया। इसी दौरान 13 अक्टूबर 2014 को केन्द्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती के बुरहानपुर अल्प प्रवास के दौरान उन्हें ताप्ती कछार में जलभरण की इस योजना पर किसानों के अनुभव सुनवाए। ज्ञात रहे ताप्ती कछार में प्रकृति की ऐसी विकृति है जो प्रवाहित होने वाले जल की बड़ी मात्रा को भूगर्भ में समाहित करा देती है। लोकसभा की जल संसाधन समिति में सांसद श्री नंदकुमारसिंह जी चौहान, महाराष्ट्र रावेर की सांसद रक्षा ताई खड़से एवं जलगांव सांसद ए.टी.नाना पाटील के शामिल हो जाने से कुल मिला कर यह योजना राजनैतिक स्वार्थ सिद्धी का अंग बन गई। 4 अगस्त 2009 में मुंबई में मंत्रालय अंतर्गत दो राज्यों के जल संसाधन मंत्री की बैठक में जयंत मलैया, म.प्र.शासन के साथ तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रहते हुए में बैठक में उपस्थिति थे। बहुप्रतीक्षित ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना से महाराष्ट्र की 4 व मप्र की 1 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। इससे 25 लाख किसानों को लाभ मिलेगा लेकिन इस परियोजना से ताप्ती के मूल उदगम वाले जिले को कुछ नहीं भी मिलेगा। ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना के लिए बैतूल जिले से बरसाती नदियों एवं नालो का जल जाएगा। जिले में ताप्ती का प्रवाह एवं बहाव क्षेत्र 250 किमी के लगभग है तथा ताप्ती में जिले की तीन दर्जन से अधिक छोटी – बड़ी नदियां एवं नालो का जल समाहित होता है। जिले के 250 किमी के क्षेत्र की भीमपुर जनपद एवं भैसदेही जनपद क्षेत्र की अधिकांश जमीने डूब प्रभावित क्षेत्रो में आएगी तब जब इस योजना के लिए घुटीगढ़ में ताप्ती पर कोई बड़ा बांध बांधा गया। वर्तमान समय में बैतूल जिले को ताप्ती जल से होने वाले लाभ के बदले नुकसान ज्यादा होगा। जिसकी भरपाई के लिए इस परियोजना में बैतूल जिले को समाहित करने तथा डूब का क्षेत्र जितना बैतूल जिले का आ रहा है उसके चार गुणा क्षेत्र को परियोजना का लाभ मिल पाए। जहां एक ओर कुछ तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने इस योजना को संसार की सबसे सस्ती सिंचाई योजना करार दे रहे है। वही दुसरी ओर इस योजना को लेकर अनेको सवाल भी उठने लगे है। प्रदेश में इस वर्ष नवम्बर तक विधानसभा के चुनाव होने है ऐेसे में बैतूल जिले को विश्वास में लिए बिना मप्र सरकार का ताप्ती मेगा रिचार्ज को लेकर किया गया कोई भी फैसला बैतूल जिले की पांचो विधानसभा सीटो के परिणामों को प्रभावित कर सकता है। मेगा रिचार्ज परियोजना करीब 6.8 हजार करोड़ की है। इससे सिंचाई नहीं होगी,बल्कि हर साल जमीन का वॉटर लेवल भी बढ़ेगा। सस्ती दरों पर किसान की खेती सिंचित हो इसलिए इस योजना पर तेजी से काम किया जाएगा। करीब 6.8 हजार करोड़ की ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना के तहत ताप्ती नदी पर बुरहानपुरए अनेर और जलगांव के समीप तीन बांध बनाए जाएंगे। इससे बुरहानपुर सहित महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिले की 5 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। साथ ही वाटर लेवल बढ़ेगा। ताप्ती मेगा रिचार्ज का मामला अभी शांत भी नही हो सका इस बीच ताप्ती नदी पर बनने वाले अमृत सिटी योजना के तहत 195 मीटर लम्बा बैराज के निमार्ण को लेकर सवाल उठने लग गए है। लगभग 6 करोड़ की लागत से ग्राम ठेसका के पास ताप्ती नदी पर बन रहा है। बैतूल जिला मुख्यालय के शहरवासियों के लिए पेयजल का इंतजाम करने के लिए मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर ताप्ती नदी के बीच में बनने वाले बैराज के निमार्ण कार्य में बरती जा रही लापरवाही तथा घटिया दर्जे की निमार्ण सामग्री तथा गुणवत्ता के अभाव में नदी पर बनने वाले बैराज का भविष्य खतरे में पड़ गया है। ताप्ती नदी पर बनने वाले बैराज के निमार्ण को लेकर माँ सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति की ओर से सीएम हेल्प लाइन में शिकायत दर्ज करते हुए आरोप लगाया है कि 6 करोड़ की लागत से बनने वाले बैराज के लिए नपा एवं विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी के अभाव में ठेकेदार के कर्मचारी एवं सुपर वाइजरो से निमार्ण कार्य करवाया जा रहा है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष ने नगर पालिका बैतूल में आरटीआई लगा कर निमार्ण एजेंसी से लेकर उसकी पूरी निमार्ण कार्य योजना की जानकारी मांगी है। समिति ने आरोप लगाया कि निमार्ण एजेंसी इस तथ्य को नजर अंदाज कर रही है कि मामूली सी बाढ़ में बैतूल परतवाड़ा रोड़ पर ताप्ती पर बना पूल कंपन करने लगता है। ऐसी स्थिति में जब बैराज को ताप्ती के जल के साथ – साथ उसके वेग को भी रोकना पड़ेगा तब वह ताप्ती के वेग एवं ताप्ती नदी में बाढ़ एवं बहते जल के साथ बनने वाले भंवरो के प्रहार को कैसे रोक पाएगें। ताप्ती नदी के पानी के वेग के चलते चंदोरा बांध फूटने के बाद भारी तबाही एवं जनहानी हो चुकी है। पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली बैतूल जिले की एक मात्र मैदाननी नदी ताप्ती ने अपने तेज वेग जल प्रवाह के चलते जिले में 250 किमी के प्रभाव क्षेत्र में सैकड़ो फीट गहरे डोह बना डाले है। इस नदी ने पहाड़ो का और मैदानो का जिलस ढंग से चीर हरण किया उसे देख कर यह नहीं लगता कि वर्तमान समय में जिस ढंगसे ताप्ती पर 195 मीटर लम्बे बैराज का निमार्ण किया जा रहा है वह बच पाएगा। ताप्ती नदी के किनारे पर बनाए गए इंटक वेल के निमार्ण कार्य में बरती गई जल्दबाजी के कारण इसके भविष्य पर सवाल उठने लगे है। बैतूल नगर के जल संकट को देख कर ताप्ती नदी के पानी से सप्लाई करने के लिए नपा से अमृत सिटी योजना के तहत 6 करोड़ का बैराज बनना है। पिछले साल जुलाई 2016 में इस प्रोजेक्ट के वर्क आर्डर हो गए थे। रायपुर की चंद्रा निर्माण कंपनी ने 7 महीने बाद जनवरी 2017 में काम शुरू किया। अभी बेस बनना शुरू ही हुआ था की बारिश आ गई और जुलाई 2017 में काम रुक गया था। अब पानी उतरने के बाद दोबारा तकनीकी विशेषज्ञ एवं जिम्मेदार अधिकारियों एवं नपा के इंजीनियरो की गैर मौजूदगी में निमार्ण काम शुरू किया जा रहा है जिसके चलते आशंका के बादल मण्डराने लगे है। बारिश शुरू होने के बाद जुलाई में निर्माणाधीन बैराज का बेस पानी में डूब गया था। 12 एमएम की लोहे की सलाखें भी पानी में डूबकर बहाव के कारण मुड़ गई थीं। इस कारण उस समय काम रुक गया था। अब पानी कम होते ही काम शुरू किया गया है। 195 मीटर लंबाई के बैराज की दिवारो के लिए कालम खड़े किए जाने है उनकी जमीनी गहराई कम होने की वजह से कितना भी मजबूत बेस पानी के वेग के सामने टिक नहीं पाएगा। 9 मीटर की ऊंचाई वाले बैराज के लिए जमीन में कम से कम पांच से सातत मीटर के गहरे कालम खड़े किजाने थे जिसमें लोहे की राड़ो की लम्बाई एवं चौड़ाई भी मापदण्ड के अनुरूप नहीं है। श्री पंवार ने अपनी शिकायत में इस बात को लेकर कई ज्वलंत सवाल उठाए है। नपा को 6 करोड़ के बैराज के लिए जल संसाधन विभाग तकनीक विशेषज्ञो की मदद तब तक लेनी थी जब तक निमार्ण कार्य पूरा न हो जाए। वर्तमान समय में जिस जगह निमार्ण कार्य किया जा रहा है वहां पर पत्थरो की सीला पर मात्र दो से तीन फीट गहरे कालम खड़े करके 9 मीटर की ऊंचाई वाले 195 मीटर लम्बे बैराज का निमार्ण किया जा रहा है जिसमें तल की क्षमता इतनी अधिक होगी की ताप्ती नदी के बहते जल की थपेड़े एवं लहरे बैराज का नामो निशान मिटा देगी। बरहाल बैतूल जिले में ज्यों – ज्यों गर्मी बढऩे लगी है सुखती ताप्ती नदी लोगो की चिंता को बढ़ाने का काम कर रही है। ताप्ती के जल संरक्षण के अभाव में बैतूल जिले की भयावह तस्वीर को लेकर चिंता अब जन आन्दोलन का रूप लेने लगी है। अब देखना बाकी है कि बीते 48 सालो से ठण्डे बस्ते में पड़ी ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना और अमृत सिटी जल योजना क्या रंग दिखाती है।

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