बगैर अनुमति 4 माह से चल रहा पत्थरों का अवैध उत्खनन

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विक्रम राठौर पत्रकार चान्दु

– भीमपुर-भैंसदेही सडक का निर्माण कर रही केसीसी कंपनी का एक और कारनामा

बैतूल। भीमपुर से भैंसदेही तक सडक निर्माण कर रही केसीसी कंपनी बिना किसी अनुमति के ही पिछले 4 महीनों से पत्थरों का अवैध उत्खनन कर गिट्टी बना रही थी। इस कंपनी को अभी तक न तो क्रेशर के लिए पर्यावरणीय अनुमति मिली है और न ही खदान की ही अनुमति मिली थी। इसके बावजूद कंपनी हजारों टन पत्थरों का अवैध उत्खनन कर गिट्टी बना चुकी है। इसके बावजूद अफसर कंपनी पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

केसीसी कंपनी द्वारा भीमपुर से भैंसदेही तक 46.84 किलोमीटर लम्बी सीमेंट कांक्रीट सडक का निर्माण 1 अरब, 15 करोड, 66 लाख रुपए की लागत से किया जा रहा है। कंपनी ने सभी नियम कायदों को जैसे ताक पर रख डाला है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने से खासा परहेज बरता जा रहा है। इसे लेकर इनकी कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। कंपनी को पत्थरों की खदान और क्रेशर के लिए आज तक पर्यावरणीय अनुमति नहीं मिली है। इस लिहाज से न तो कंपनी द्वारा पत्थरों का खनन किया जा सकता है और न ही क्रेशर को चालू किया जा सकता है। इन सबके विपरीत कंपनी ने रम्भा के पास क्रेशर चालू कर हजारों टन पत्थरों का अवैध उत्खनन कर गिट्टी बना डाली है। यह गिट्टी कंपनी द्वारा रातामाटी से चिचोलीढाना के बीच करीब 20 किलोमीटर के क्षेत्र में बिछाई जा चुकी है। बिना पर्यावरणीय अनुमति के ही पिछले 4 महीने से धडल्ले से और खुलेआम क्रेशर चलने के बावजूद आज तक न तो प्रशासन ने कोई कार्रवाई की और न ही खनिज विभाग ने इसकी जरुरत समझी।

महज भंडारण की अनुमति

कंपनी ने खनिज विभाग से केवल भंडारण की अनुमति ली थी। यह बात अलग है कि अनुमति से कई गुना अधिक भंडारण यहां पर किया जा रहा था। अनुमति देने से पहले अफसरों ने यह पूछना भी मुनासिब नहीं समझा कि यह गिट्टी लाई कहां से जाएगी। ज्यादा हल्ला मचने पर खनिज विभाग ने अनुमति से अधिक भंडारण का मामला दर्ज कर दिया, लेकिन अवैध रूप से चल रही क्रेशर पर कोई कार्रवाई नहीं की। यह स्थिति भी तब है जब खुद विभाग ने ही पत्थर खदान की अनुमति बुधवार को ही उक्त कंपनी को दी है। रेत का भी कंपनी के प्लांट पर अनुमति से अधिक भंडारण है।

इनका कहना है—-

कंपनी को पर्यावरणीय अनुमति आज मिल जाएगी। पत्थर खदान की अनुमति कल ही जारी कर दी है। गिट्टी के भंडारण के लिए कंपनी ने अनुमति ली है। इससे अधिक भंडारण पाए जाने पर प्रकरण दर्ज कर कलेक्टर न्यायालय में पेश किया गया है।

अशोक नागले, खनिज निरीक्षक, बैतूल

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