11 कुंडीय महारुद्र यज्ञ का आयोजन,परिक्रमा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

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सौरभ शुक्ला
फुटेरा कला- केवल फलाहार कर बीसो वर्षों से की है तपस्या साध्वी कुंती देवी बटियागढ़ विकासखंड के बकायन गांव में साध्वी कुंती देवी के आश्रम में 11 कुंडीय महारुद्र यज्ञ का आयोजन चल रहा है जिसमें सुबह 9:00 बजे से वैदिक मंत्र उपचार द्वारा पूजा अर्चना शिवलिंग निर्माण के बाद आरती की जाती है 11:00 से करीब 1:00 बजे तक 11 कुंडलियों में जजमानों कि 61 जोड़ीया आहूतियां दे रहे हैं वही शाम 4:00 से 7:00 बजे तक प्रवचन एवं रात्रि में रामलीला के मंचन का ग्रामीणों एवं क्षेत्रवासियों द्वारा धर्म लाभ लिया जा रहा है शाम के समय यज्ञ की परिक्रमा में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रहती है वहीं मेले में दुकान संचालकों के यहां खरीदी की जा रही है!

यज्ञ का बताया महत्व यज्ञ- आचार्य मृदुल बिहारी ने बताया कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने प्रयाग में यज्ञ किया प्रा यानी प्रथम या यानी यज्ञ सतयुग में राजा मरूत ने यज्ञ किया ताकि सृष्टि में संतुलन बना रहता में राजा दशरथ ने यज्ञ कर ब्रम्हांड के नायक भगवान राम को पुत्र के रुप में प्राप्त किया द्वापर में पांडवों ने यज्ञ अनुष्ठान कर धर्म की स्थापना की यज्ञ मे प्राणियों के साथ-साथ वायुमंडल शुद्ध होता है तेल या घी की आकृतियों से वातावरण शुद्ध हो जाता है मानव व देवताओं को तृप्ति मिलती है!

हुई प्राणप्रतिष्ठा – मृदुल बिहारी जी ने कहा कि साध्वी कुंती देवी कि यह तपोभूमि है जहां विधि विधान से शुक्रवार को श्री कृष्ण एवं राधा जी के आश्रम में प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया जिसमें दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहा यह आश्रम विश्वास व श्रद्धा का केंद्र है जहां क्षेत्रीय भक्तों द्वारा अखंड राम धुन का आयोजन किया जाता है फुटेरा कला से सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट

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