छत्तरपुर के उमरी गांव के ग्रामीण पीने के पानी के लिए हो रहे परेशान

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बैतूल/सारणी। कैलाश पाटिल –

छत्तरपुर के उमरी गांव के ग्रामीण पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। गांव के अनिल इरपाचे, श्रीराम वरकडे ने बताया कि इतने सालों में कभी पानी की इतनी बड़ी समस्या नही हुई जितनी इस वर्ष हो रही है। गांव में कुल 5 नल है जिसमे से कुछ नल खराब है और बाकी हवा फेक रहै है। पीएचई विभाग के अधिकारियो को भी हैंडपम्प के पाइप की व्यवस्था करने के लिए कई बार पंचायत के माध्यम से सूचित किया जा गया है। अब गर्मी का मौसम ही निकलने वाला है पर विभाग के कर्मचारियो का कोई आता पता नही है। गांव के सरपंच का भी इन दिनों ग्रामीणों की समस्या को दूर करने का कोई रुझान नही होने के कारण ग्रामीणों में काफी रोष व्याप्त है। पानी के लिए यहाँ के ग्रामीण 200 फ़ीट गहराई तवा नदी से रूका हुआ गंदा पानी पीने को मजबूर हो रहे है। कई ग्रामीण चढ़ाई ज्यादा होने के कारण गिर जाते है परंतु आज तक इनकी सुध लेने न कोई जनप्रतिनिधि आये न ही कोई अधिकारी आया है।

वही पंचायत के पूर्व उपसरपंच दिलीप वरकडे ने बताया कि पूर्व में भी कई बार इस समस्या से वेस्टर्न कोल् फील्ड के आधिकारियो व जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया है पर आज पानी की समस्या ने इतना विकराल रूप धारण किया है कि ग्रामीण नदी का काला पानी का उपयोग करने को मजबूर है। वही इसी गांव में 5 वर्ष पूर्व वाटर इरीगेशन की घोषणा की गई थी। नाराज ग्रामीणों ने आने वाले वर्ष में चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। बताया जाता है कि कुछ दिन पूर्व ही सांसद छत्तरपुर गांव के दौरे में आई थी, जहाँ ग्रामीणों ने काफी खरी खोटी सुनाई और सांसद ने वेस्टर्न कोल् फील्ड के अधिकारियो पर नारजगी जाहिर की थी। इसके बावजूद न कोई जनप्रतिनिधिं न कंपनी के अधिकारियो ने पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए कोई संतोषजनक कार्यवाही नहीं किया है, केवल पने भाषणों में ही पानी की व्यवस्था करते है। धरातल पर ऐसी कोई योजना होती तो आज ग्रामीणो को इतनी परेशानी नही होती।

वहीं गांव के युवासमाजसेवी सुनिल सरयाम ने कहा कि 600 की आबादी वाले गांव में तवा नदी से मोटर पम्प, फ़िल्टर लगाकर पेयजल की व्यवस्था कि जा सकती है। पर इस और कभी किसी का ध्यान नही गया है। ग्रामीणों को भी अपने स्तर पर बारिश का पानी रोकने के लिए उपाय करना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने चाहिए लेकिन ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का अभाव के कारण यह नहीं हो रहा है। ग्रामीण सुनिल इरपाचे, संदीप धुर्वे, सुखनंदन लविस्कार, विनोद धुर्वे, जुगलो वरकडे, लख्मी वरकडे, पांडो आहाके, सुग्गी धुर्वे आदि ने रोष व्यक्त किया है।

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