मोगरे में है महक के साथ औषधी गुण

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अमर सेन

– कुम्हारी! फूलों में मोगरा का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है…. भारत के लगभग अधिकांश घरों में देखा जा सकता है…. पूजा हो या वेणी श्रृंगार बेला या मोगरा हर जगह उपस्थित रहता है…. सफेद रंग का यह फूल वसंत से वर्षा ऋतु तक खिलता है और इसकी भीनी भीनी महक गर्मी के मौसम में ठण्डक का अनुभव कराती है!मोगरा को मराठी में मोगरा, बांग्ला में बेली, गुजराती में मोगरो, कन्नड़ में डुंडुमलिगे, कोंकणी में मोगरे, मलयालम में कोडा मुल्ला, मणिपुरी में कोबक लेई, उड़िया में जुहीमाहली, संस्कृत में मल्लिका, प्राकृत में मल्लिआ, पंजाबी में मोतिया, तमिल में कुंदुमल्लि आदि कहते हैं।
औषधीय_गुण—–
इसके फूलों का उपयोग जास्मिन टी बनाने के लिये किया जाता है……इसे पेट के अल्सर के लिये उपयोगी माना गया है…. मोगरे के पत्तों को पीसकर जहाँ भी दाद, खुजली और फोड़े- फुंसियाँ हो वहाँ लगाने से लाभ होता है….कोई घाव ठीक ना हो रहा हो तो बेल वाले मोगरे के पत्तों को पीस कर लगाने से ठीक हो जाता है…..इसकी जड़ का काढ़ा पीने से अनियमित मासिक ठीक होता है….. इसके दो पत्तों में काला नमक लगा कर सेवन करने से पेट की गैस दूर होती है…. इसके फूलों के उपयोग से से पेट के कीड़ों, पीलिया, त्वचा रोग, कंजक्टिवाईटिस, आदि में लाभ होता है…।
मोगरे का पानी और इत्र-
मोगरे का पानी और इत्र बहुत उपयोगी है….. मोगरे के पानी का प्रयोग गुलाबजल की तरह होता है….. इसे हाइड्रो आसवन की प्रक्रिया द्वारा फूल से बनाते हैं….. इसका रंग सफेद होता है और इसका उपयोगा अरोमाथेरेपी के लिये किया जाता है…. सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में भी यह पानी बहुत उपयोगी पाया गया है….. मोगरे का इत्र भाप आसवन विधि के माध्यम से प्राप्त किया जाता है ….यह इत्र ताजगी देने वाला एवं इसकी सुगंध तीव्र होती है …. इसका रंग पीला होता है तथा इसका उपयोग अगरबत्ती, रूम फ्रेशनर और दूसरे अनेक सुगंधित उत्पादों के निर्माण में किया जाता है…. अरोमाथेरेपी से दिमाग और शरीर को आराम पहुँचाता है …… इससे तनाव, चिंता तथा तंत्रिका थकान से राहत मिलती है…..सौंदर्य प्रसाधन जैसे क्रीम, मलहम, साबुन, टेलकम पाउडर आदि के निर्माण में इस इत्र का प्रयोग होता है। इसका उपयोग तनाव दूर करने के लिये भी किया जाता है! ऐसा समझा जाता है कि इसका सकारात्मक प्रभाव शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाये रखता हैं!

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