सड़क पर जन्मी लाडली , घंटो तड़पती रही प्रसूता, न एम्बुलेंस न डॉक्टर

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मध्यप्रदेश में मामा शिवराज के स्वास्थ्य व्यस्थाओ की एक बार फिर कलाई तब खुल गयी , जब प्रदेश के पन्ना जिले के शाहनगर में सड़क किनारे एक प्रसूता को प्रसव करना पड़ा ..।

ये महिला बस स्टैंड शाहनगर के पास सड़क किनारे प्रसव पीड़ा से घंटो तड़फती रही …। जबकि शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सड़क से महज 50 मीटर दूर था। लेकिन शाहनगर अस्पताल का स्वास्थ अमला सड़क पर तड़फती महिला की मदद को नही पहुचा। जबकि राहगीरों ओर स्थानीय निवासियों ने अस्पताल पहुचकर बिभाग को अवगत करवाया।

लेकिन अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नही था। न ही पीड़ित अकेली महिला के दर्द को देखकर किसी भी स्टाफ के कानों में जू रेगी।लेकिन कहते है कि एक अबला नारी का दर्द बखूबी अबला नारी ही समझ सकती है।लिहाजा सड़क से गुजर रही एक भाजपा नेत्री की नजर महिला के ऊपर पड गयी। जिन्होंने अन्य महिलाओं के सहयोग से प्रसवपीडा से कराह रही महिला को घेरा बना कर कवर किया बल्कि उसे प्रसव मदद भी की गई। दलित महिला ने जब एक प्यारी से बच्ची को जब सड़क किनारे कंकड़ ओर पथ्थर के बीच जन्म दे दिया तब कही मामा शिवराज का 108 बाहन भी एक घंटे बाद पहुचा। जिसके सहारे जच्चा-बच्चा को अस्पताल भेजा गया। इस दलित महिला को प्रसव तब हुआ जब वह काम करके अपने घर चोपड़ा जा रही थी। अगर समय पर जननी एक्सप्रेस या 108 बाहन पहुच गया होता तो चोपड़ा गावँ की रामबती आदिवासी नाम की इस दलित महिला को सड़क पर प्रसव नही करना पड़ता।

बुंदेलखंड के पन्ना जिले की इस घटना ने एक बार फिर सर्मसार किया है। आज़ादी के सात दसक बाद भी हमारी ब्यास्थाये केसी चल रही है इसकी पोल खोल गयी है। लेकिन पीड़ित दलित महिला की मदद कर भाजपा की महिला मोर्चा सदस्य एवम पूर्व महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष राज कुमारी मिश्रा ने सड़क से लेकर अस्पताल ले जाने तक महिला के दर्द को समझते हुए मदद की ,वहीं बस स्टैंड में लोगों का मजमा लगा रहा।लेकिन कोई महिला डॉक्टर को भी नही बुला सके। ऐसे में पीड़ित महिला को 108 के डॉक्टर द्वारा ही उपचार दिया गया।

जच्चा-बच्चा को अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है जहाँ दोनों स्वस्थ बताये जा रहे है। परंतु अस्पताल स्टाफ द्वारा समय पर मदद क्यों नही पहुचाई गयी,इस सवाल का ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के पास कोई जबाब नही था। लेकिन कहते है कि जाको राखे साइयां मार सके न कोई…।नवजात मासूम परी पथ्थरों में गिरने के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है।

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