कटहरी चम्पा से जुड़े फायदे अनेक

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अमर सेन SCN न्यूज़

कुम्हारी

कटहरी चम्पा को हरी चंपा भी कहते हैं!इसका पौधा चंपा की अन्य जातियों से भिन्न होता है लेकिन इसका फूल चंपा की कुछ प्रजातियों से मिलता जुलता है!इसका पेड़ झाड़ी जैसा, तीन से लेकर पाँच मीटर तक ऊँचा होता है!पत्तियाँ सरल तथा चमकीली हरी होती हैं!फूल अर्धवृत्ताकार डंठल पर लगते हैं!शुरू में फूल हरे होते हैं, परंतु बाद में इनका रंग हलका पीला हो जाता है!.इन फूलों से पर्याप्त सुगंध निकलती है, जो पके अन्नानाश (पाइनएपल) के गंध जैसी होती है।
हिन्दू पौराणिक कथाओं में एक कहावत है कि…..

’’चम्पा तुझमें तीन गुण-रंग रूप और वास,
अवगुण तुझमें एक ही भँवर न आयें पास’’।
रूप तेज तो राधिके, अरु भँवर कृष्ण को दास,
इस मर्यादा के लिये भँवर न आयें पास।।
चम्पा में पराग नहीं होता है। इसलिए इसके पुष्प पर मधुमक्खियाँ कभी भी नहीं बैठती हैं, लेकिन इसके बीज पक्षियों को बहुत आकर्षित करते हैं। चम्पा का वृक्ष वास्तु की दृष्टि से सौभाग्य का प्रतीक माना गया है।
कटहरी चम्पा के अंदर भूमि में नत्रजन इक्ट्ठा करने की क्षमता होती है!वृक्ष की जड़ों में कृषि के लिये उपयोगी फफूँद पाई जाती है!वृक्ष मृदा सुधार के लिऐ उपयोगी है!वृक्ष के आस-पास के पी.एच. मान में बढोत्तरी, मृदा कार्बन तथा उपलब्ध फास्फोरस बढ़ाने में सहायक होता है! पत्तियों को रेशम के कीटों के भोजन के लिये उपयोग किया जाता है!पत्तियों का रस धान में रोग पैदा करने वाली फफूँद (पाईरिकोलेरिया ओराइजी) के प्रति विषाक्त तथा अन्य जीवाणुओं के प्रति -जैविक होता है!
औषधि में उपयोग
छाल और पत्तियों का उपयोग बच्चा पैदा होने के बाद होने वाले ज्वर को दूर करने वाली औषधि के रूप में किया जाता है!फूलों का उपयोग कुष्ठ रोग में और पत्तियों का उपयोग पैर दर्द के लिये किया जाता है! पुरूषों की ताकत और ऊर्जा के लिए इसके फूलों से औषधि बनाई जाती है! पीले चम्पा के फूल कुष्ठ रोग में उपयोग होते हैं!इसकी बूदें रक्त में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट कर देती हैं।

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