नमाज अता के साथ एक दूसरे से गले मिलकर मनाई मीठी ईद। दिन भर चला सेवईयां खिलाने का दौर

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बैतूल/सारनी। कैलाश पाटिल

शुक्रवार को चांद के दीदार के बाद 16 जून शनिवार को रमजान का पाक महीना के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मीठी ईद मनाई।

पिन्टू अंसारी ने बताया कि अल्लाह की इबादत या ईश्वर की उपासना वैसे तो किसी भी समय की जा सकती है। उसके लिये किसी विशेष दिन की जरुरत नहीं होती लेकिन सभी धर्मों में अपने आराध्य की पूजा उपासना, व्रत उपवास के लिये कुछ विशेष त्यौहार मनाये जाते हैं। ताकि रोजमर्रा के कामों को करते हुए, घर-गृहस्थी में लीन रहते हुए लोगों को याद रहे कि यह जिंदगी उस खुदा की नेमत है, जिसे रोजी-रोटी के चक्कर में भुल गया है। कुछ समय उसकी इबादत के लिये निकाल ले ताकि खुदा का रहम ओ करम तुझ पर बना रहे और आखिरी समय तुझे खुदा के फरिश्ते लेने आयें और खुदा तुम्हें जन्नत बख्शें। लेकिन खुदा के करीब होने का रास्ता इतना भी आसान नहीं है खुदा भी बंदो की परीक्षा लेता है।

जो उसकी कसौटी पर खरा उतरता है उसे ही खुदा की नेमत नसीब होती है। इसलिये ईस्लाम में खुदा की इबादत के लिये रमज़ान के पाक महीने को महत्व दिया जाता है। रमज़ान एक ऐसा खास महीना होता है जिसमें ईस्लाम में आस्था रखने वाले लोग नियमित रूप से नमाज़ अता करने के साथ-साथ रोज़े यानि कठोर उपवास बारह घंटे तक पानी की एक बूंद तक नहीं लेते हैं। हालांकि अन्य धर्मों में भी उपवास रखे जाते हैं लेकिन ईस्लाम में रमज़ान के महीने में यह उपवास लगातार तीस दिनों तक चलते हैं। महीने के अंत में चांद के दिदार के साथ ही उपवास को खोला जाता है।

आज सुबह 9 बजे के लगभग पाथाखेड़ा के जामा मस्जिद में सभी मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर नमाज अता की। उसके बाद एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। इस त्यौहार में मुख्य रूप से दूध के साथ सेवईयां लोगों घर बुलाकर खिलाई जाती है इसलिए इसे मीठी ईद भी कहते हैं।

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