सीएमडी से नहीं मिलने देने पर गुस्साए ग्रामीणों ने किया छतरपुर खदान का घेराव

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बैतूल/सारनी। कैलाश पाटिल

ग्राम पंचायत छत्तरपुर के ग्रामीणों को वेस्टर्न कोल् फील्ड लिमिटेड कंपनी के सीएमडी से नही मिलने देने पर पूरे खदान के परिसर का घेराव किया। गाँव के पंचायत सदस्य मुकेश धुर्वे ने बताया कि वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सीएमडी राजेश रंजन मिश्रा पाथाखेड़ा दौरे पर आए थे। जहाँ छत्तरपुर 01 भूमिगत खदान में मैंन राइडर का उद्धघाटन के लिए शाम को आये थे। वही गांव के जनप्रतिनिधि ग्रामीण पहली बार आये सीएमडी को गांव की समस्याये बताने पहुंचे पर वहाँ के अधिकारी ने यह कहकर वापस जाने के लिए कह दिया कि साहब अभी नही मिल पाएंगे। जिसके कारण ग्रामीणों ने नाराजगी जाहिर करते हुए पूरे माइंस का घेराव कर आवागमन बन्द कर दिया। वही स्थिति बिगड़ते देख कंपनी के अधिकारियो ने पुलिस प्रशासन को भी बुला लिया। ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद सीएमडी खुद चलकर ग्रामीणों के पास आये और समस्याये सुनी।

युवासमाजसेवी सुनिल सरयाम समस्या बताते हुए बताया की 1991-92 में छत्तरपुर पंचायत में दो भूमिगत खदाने खोली गई। जिसमे छत्तरपुर 01 खदान में 6 खाताधारकों की जमीन गयी है जिसमे से केवल सहमति से एक को नौकरी मिली और शेष पांच खाताधारकों को 15 सालो से पेशी जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नही हुई। वही छत्तरपुर पंचायत को आधिकारिक रूप से मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कोई गोद नही लिया गया। आज माइंस खुलने को 27 साल हो गए पर न तो कंपनी के अधिकारी कभी इस गांव के विकास के बारे में कभी नही सोचे न ही कभी इस प्रकार से कोई जीविका चलाने के लिए कोई सहायता नही दी गई है। चार हज़ार की आबादी वाले पंचायत में 98% आदिवासी समुदाय निवासरत है उनके जीविका का मुख्य स्रोत खेती है। पिछले कुछ दशको से पानी का स्तर इतना नीचे जा चुका है कि पेयजल के लिए ग्रामीण तरस रहे है तो खेती तो दूर की बात है। वही रोजगार के अभाव में यहां के युवा दूसरे प्रदेशों में जाते है जबकि माइंस के बहुत सारे निजी कार्य होते है पर कभी कंपनी के अधिकारी ने इस ओर कभी ध्यान नही दिया और न ही कभी ग्रामीणों को अवसर दिया गया। कुछ ग्रामीणों ठेकेदारी में कार्य करते है तो उनको भी सही पारिश्रमिक नही मिल पाता है। जिसके कारण मजदूर ग्रामीण अपने पंचायत में होने के बाद भी ठगा सा महसूस कर रहे है।

वही माइंस के डेवलोपमेन्ट व डिपलेरिंग के कारण कृषि योग्य भूमि में दरारे पड़ रही है और सभी ग्रामीणों के मकानों में दरारे पड़ने के बावजुद कंपनी के अधिकारी इस बात को मानने को तैयार नही है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर भी ढोंग किया जाता है‌। यहां के कर्मचारी गांव में आने पर तीस लोगो के नाम लिखकर दर्शा देते है कि यहां स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वही इन माइंस के प्राप्त रायल्टी से प्रभावित क्षेत्र में विकास करने के बजाय दूसरे जगह किया जाता है। जब गांव के आदिवासी ग्रामीण अपने अधिकार की मांग कर रहे है तो न कंपनी के अधिकारी ध्यान दे रहे है न ही शासन प्रशासन ध्यान दे रहे है। आगामी समय मे बड़े स्तर पर ग्रामीणों के माध्यम से आंदोलन किया जाएगा और जितने मांगे और समस्याओ का निराकरण नही होता है तो ग्रामीण मिलकर माइंस बन्द करेगे‌।

इस पर सीएमडी ने आश्वासन देते हुए कहा कि आज तक यहां की समस्याओ से अनजान थे पर अब निश्चित तौर पर निराकरण किया जाएगा। पूर्व उपसरपंच दिलीप वरकडे ने कहा कि 27 साल से कंपनी ने विकास के नाम पर केवल शोषण किया है पर अब ग्रामीण जागरूक हो गए है और निश्चित तौर पर रणनीति बनाकर अपने हक़ और अधिकार लेकर रहेंगे। ज्ञापन सौपने में प्रमुख रूप से सरपंच सुंदरलाल कमरे, बिजलसिंह सरयाम, कैलाश सरयाम , जियालाल धुर्वे, पूर्व सरपंच कैलाश वरकडे, उपसरपंच देवकराम ककोडिया, सुखलाल धुर्वे, रामशा वरकडे, मनोज वरकडे, प्रताप, धनराज धुर्वे, मोहब्बत परते सहित सैकड़ों संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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