सरकारी अधिकारियो की सोची समझी साजिश से हजारो आदीवासी युवा हुये रोजगार से वंचित

Share Scn News India

“◆

गरीब आदीवासी युवायो के हक की लडाई लढने संघर्ष कर रहे भूतपूर्व सैनिक राकेश सिंह

सूचना के अधिकार से खुला एनजीओ को 84 करोड का अवैध आवंटन का सच

सीएम हेल्पलाइन मे भी दी जा रही भ्रामक जानकारी,एनजीओ मैपसेट ने खुद को बताया सरकारी विभाग का हिस्सा

नितिन दत्ता तामिया(छिंदवाडा) – सैनिक के लिये लडाई कभी खत्म नही होती पहले देश के लिये लढे अब अपने ही देश मे अपने गरीब आदीवासी बेरोजगार युवायो के हक के लिये सरकार और प्रशासनिक तंत्र से भूतपूर्व सैनिक राकेश सिंह लढ रहे है | अधिकारो आदीवासी वोट बैंक को लुभाने प्रदेश के मुखिया लगातार सभाये कर लंबी लंबी घोषणा कर रहे है वही सरकार के ही विभागीय अधिकारियो द्वारा सोची समझी साजिश के तहत से प्रदेश के हजारो आदीवासी युवाओ को रोजगार देने के लिये केंद्रीय सहायता के करोडो रूपये अपने चहेती संस्था मैपसेट के माध्यम से डकार कर रोजगार से वंचित कर दिया गया है |

केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश मे जनजातीय विकास के लिये दी जाने वाली विशेष केंद्रीय सहायता मद की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ गयी है वही सरकार ने एक स्वयसेवी संस्था मैपसेट को पूरा कामकाज सौंप कर जनजातीय विकास की संकल्पना ध्वस्त कर दिया है| भूतपूर्व सूचना के अधिकार के तहत हुये खुलासे के बाद एनजीओ मैपसेट के माध्यम से मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग में करोडो के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है | वही जन हेतु जन सेतु वाली सीएम हेल्पलाइन मे ब्यूरोक्रेट के हावी होने से गलत जानकारी दी जा रही है |

एक्स आर्मीमेन लढ रहे अब भ्रष्टाचार की जंग – तामिया के दलेल मे ग्लोबल एकेडमी फ़ॉर सिक्युरिटी मैंनेजमेंट के संचालक एक्स आर्मीमेन राकेश सिंह शासन की योजनानुसार 2006 से छतरपुर जिले के बाद तामिया मे प्रदेश भर के युवायो को सिक्युरिटी गार्ड का प्रशिक्षण के साथ रोजगार से जोडने के कार्य मे लगे है | एक्स आर्मी आफीसर राकेश सिंह की संस्था ग्लोबल एकेडमी फ़ॉर सिक्युरिटी मैंनेजमेंट जो कि फर्म सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 का क्रमांक 44 के अधीन समाज सुरक्षा जनजागृति समिति के नाम से 21 फरवरी 2006 को पंजीयत है जिसका पंजीयन क्रमांक 01/01/01/16063/06 है|

हितग्राही के खाते मे नही आये तो कहा गये 23 करोड – इस संस्था ने अभी तक पूरे प्रदेश मे 2006 से 2014 तक 16 हजार 781 युवा को प्रशिक्षित किया जिसमे 16416 रोजगार से जुडे हूये है | 2014 के बाद संस्था संचालक राकेश सिंह ने 30 मार्च 2017 को सीएम को लिखित पत्र भेजा इस पत्र मे उल्लेखित है कि वर्तमान में आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाए आदीवासी उपयोजना विशेष केंद्रीय सहायता एंव संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत वर्ष 2015-16 के लिये समस्त मध्यप्रदेश के लिये 23 करोड का आवंटन हुआ जिसके तहत लक्षित आदीवासी परिवार के नवयुवको के विभिन्न ट्रेड मे उनकी योग्यता एंव रूचि अनुसार प्रशिक्षण उपरांत रोजगार से जोडा जाना लंबित है|

भूतपूर्व सैनिक द्वारा संचालित संस्था जिसमे पांच भूतपूर्व सैनिक कार्यरत जो दो साल से बेरोजगार है ग्राम सभा अनुमोदन और परियोजना सलाहकार मंडल द्वारा अनुमोदन के बाद भी प्रशिक्षण लेने वाले हितग्राहियो के खाते मे हितग्राहीमूलक की राशि नही पहुंची है प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार परियोजना प्रशासक और जनपद पंचायत के माध्यम से हितग्राही के खाते मे राशि जाना था लेकिन यह राशि नही मिलने से हजारो की संख्या मे आदीवासी युवक प्रशिक्षण से वंचित है |

सीएम हेल्प लाइन मे दी गलत जानकारी – संस्था प्रमुख राकेश सिंह सीएम हेल्पालाइन से शिकायत क्रमांक 3784284 दिनांक 04 मई 2017 को आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा बताया गया कि आदीवासी क्षेत्रो मे रोजगार देने सुरक्षा गार्ड प्रशिक्षण के लिये टीएडीपी भोपाल द्वारा वित्तीय वर्ष2015-16 से 2016-17 तक कोई आवंटन प्रदान नही किया गया | सूचना के अधिकार के तहत संचानालय आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजना सतपुडा भवन भोपाल से दी गई जानकारी के अनुसार भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के पत्र क्रमांक 11015/04(14)-2015-एसजी-02 दिनांक 28 दिसंबर 2015 में वित्तीय वर्ष 2015-16 मे आदीवासी उपयोजना विशेष केंद्रीय सहायता मद कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिये राशि 2300.00 (तेईस करोड रूपये) मैपसेट (आ.जा.क.वि.) के माध्यम से संचालन हेतु पुर्न आवंटित की गई| पूर्व मे भी मैपसेट को करोडो रूपये की राशि चरण बद्ध तरिको से आवंटित की गयी

ताक मे रखे गये शासन के नियम – सूचना के अधिकार के प्राप्त दस्तावेजो मे मध्यप्रदेश शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग मंत्रालय के पत्र क्रमांक एफ 23-5/2012/3-25(पार्ट) दिनांक 30 जुलाई 2012 के अनुसार स्पष्ट निर्देश है कि आदीवासी उपयोजना विशेष केंद्रीय सहायता मद के तहत हितग्राही मूलक की राशि सीधे हितग्राही के खाते मे जमा कराये जाने के नियम है वही पूर्व मे प्रति हितग्राही बीस हजार की यह राशि को बढाकर प्रति हितग्राही 30 हजार रूपये किये जाने के आदेश मप्र शांसन के आजाकवि ने पत्र क्रमांक एफ23-55/2004/3-25(पार्ट) 28 दिसंबर 2013 जारी किये थे| वही आरटीआई दस्तावेज मे संचालक आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाये को एनजीओ मैपसेट के प्रबंधक प्रदीप खंडेलवाल द्वारा दिनांक 23 दिसंबर 2016 को पत्र क्रमांक मेप/प्रशि/प्रस्ताव/2016/2053 मे प्रशिक्षण के लिये प्रति हितग्राही 50392/- रूपये की मांग की गई पूर्व सैनिक श्री सिंह ने सवाल उठाया कि कि शासन एक तरफ तीस हजार निर्धारित करता है ऐसे में क्या समझा जाये कि इस दर से भुगतान किया जाता रहा है जो बडे घोटाले की तरफ इशारा करता है |

क्या है मैपसेट की असलियत – मैपसेट यानी मध्यप्रदेश रोजगार एंव प्रशिक्षण परिषद स्वयसेवी संगठन का पंजीयन फर्म रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत हुआ है वही यह एनजीओ मैपसेट खुद को सरकार का एक विभाग बताकर कामकाज कर रहा है| सूचना के अधिकार के तहत भूतपूर्व सैनिक राकेश सिंह को मैपसेट (मध्यप्रदेश रोजगार एंव प्रशिक्षण परिषद) द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1773 क्रमांक44 के तहत आदीवासी तकनीकी शिक्षा मंडल संस्था हुजुर जिला भोपाल को परिवर्तित कर मध्यप्रदेश रोजगार एंव प्रशिक्षण परिषद भोपाल नाम से क्रमांक10042 दिनांक 23 सितंबर 1989 को रजिस्ट्रड की की गयी थी | आरटीआई मे मैपसेट की मध्यप्रदेश शासन मे सलंग्न होने के प्रमाण स्वरूप मध्यप्रदेश शासन का राजपत्र मांगा गया जो अनुपलब्द्ध बताया जा रहा है यही जानकारी मध्यप्रदेश शासन के जानजातीय कार्यविभाग से भी मांगे जाने पर नही दी गई है | वही मैपसेट द्वारा दी गई जानकारी मे अपनी संस्था के पुराने नाम “आदीवासी तकनीकी शिक्षा मंडल” एनजीओ नाम पर एक पुराना पत्र जो संचालक मंडल की बैठक से जुडा है वह लोकसूचना अधिकारी ने दिया है जिसमे राज्यशासन के आदेश क्रमांक एफ -2/42/79/1/2/15 दिनांक 21 फरवरी 1981 द्वारा आदीवासी क्षेत्रो मे तकनीकी शिक्षा मंडल के गठन का निर्णय लिया गया वही इस का पंजीयन 24 मार्च 81 को किया गया बाद मे इसी का नाम समिति परिवर्तन मे 1989 को मैपसेट हो गया इस संबंध का पत्र भी अनुपलब्द्ध बताया गया है |

ट्रैनिंग के लिये एनजीओ मैपसेट का नही है कोई इंफ्रास्ट्रक्चर– प्रदेश सरकार के अधिकारी मैपसेट एनजीओ पर इस कदर मेहरबान है कि आदीवासी युवाओ को रोजगार और प्रशिक्षण के नाम करोडो रूपये का आवंटन किया जा चुका है| वही मैदानी हकीकत इसके विपरीत है कि एनजीओ मैपसेट का कोई भी ट्रैनिंग सेंटर या आधारभूत संरचना नही है अपने रसूख के दम पर स्वयसेवी संस्था होने के बाद भी मैपसेट का कार्यालय सरकारी भवन राजीव गांधी भवन श्यामला हिल्स में संचालित है वही इसके प्रबंध संचालक के पद पर जनजातीय कार्य विभाग के सचिव (आईएएस) स्तर अधिकारी पदस्थ है | आरटीआई दस्तावेजो के अनुसार 2013 से प्रीमैट्रिक पोस्ट मैट्रिक छात्रावासो मे निवासरत विधार्थियो के लिये वर्ष 2012 से 2014 के बीच कम्प्युटर प्रशिक्षण के लिये 42 करोड 20 लाख रूपये आवंटित किये गये इसी तरह रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण योजना के तहत प्राप्त दस्तावेजो के मुताबिक वर्ष 2012 में 42 करोड 58 लाख 43 हजार की राशि दी गई इस तरह कुल 84 करोड 78 लाख 43 हजार की राशि किस आधार पर दी गई इसे लेकर भूतपूर्व सैनिक सरकार से जबाब मांग रहे है |

इनका कहना है

पहले देश के लिये लढे अब अपने ही आदीवासी युवायो के हक के लिये हम लढाई लढ रहे है रोजी रोटी कमाना सबका हक है इसे कोई नही छीन सकता |

राकेश सिंह भूतपूर्व सैनिक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!