नेशनल मिशन फॉर ए ग्रीन इंडिया में बैतूल के दो वन मंडल शामिल

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बैतूल,
नेशनल एक्शन प्लान फॉर क्लाइमेट चेंज द्वारा संवहनीय विकास के अति आवश्यक एवं संकटग्रस्त पहलुओं को संबोधित करते हुए जलवायु परिवर्तन के खतरों के परिप्रेक्ष्य में अर्थव्यवस्था एवं प्राकृतिक संसाधनों के बीच निकट संबंध को पहचानते हुए देश के प्राकृतिक जैविक संसाधनों के वितरण, प्रकारण एवं गुणवत्ता को खतरे से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
जलवायु अनुकूलन एवं अल्पीकरण के परिप्रेक्ष्य में ग्रीन इंडिया मिशन द्वारा इको सिस्टम सेवाओं के विकास को स्थानीय समुदायों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए समग्र रूप से उपचार प्रस्तावित है, जिसके तहत वनों का सुधार एवं पुनरूद्धार के साथ-साथ वन आश्रित स्थानीय समुदाय को वैकल्पिक एवं वन आधारित आजीविका के साधन उपलब्ध कराना एवं उनकी क्षमता विकास किया जाना प्रस्तावित है।
मध्यप्रदेश में ग्रीन इंडिया मिशन के क्रियान्वयन हेतु 8 एल-1 लैंडस्केप की पहचान की गई है, जिसमें जलवायु परिवर्तन में प्रतिकूल रूप से परिवर्तन करने वाले 18 वन मंडलों में 122 मिली वाटरशेड के 735 माइक्रो वाटरशेडो के 7,35,479 हेक्टेयर क्षेत्र के पूर्ण उपचार की एक दूरगामी परियोजना बनाई गई है। इस परियोजना के तहत बैतूल के उत्तर एवं पश्चिम वन मंडल के क्रमश: 27860 एवं 29083 हेक्टेयर क्षेत्र को चयनित किया गया है। जिसमें उत्तर वन मंडल में 4 मिली वाटरशेड एवं 20 माइक्रो वाटरशेड तथा पश्चिम वन मंडल में 8 मिली एवं 24 माइक्रो वाटरशेड शामिल होंगे।
वन मंडलाधिकारी सुश्री राखी नंदा ने बताया कि चयनित भू परिदृश्यों में क्रियान्वित आरंभिक परियोजना का उद्देश्य परियोजना के परिणाम स्वरूप वनों की गुणवत्ता में सुधार, भू-प्रबंधन एवं लघु वनोपज प्रबंधन से वनों पर आश्रित स्थानीय समुदायों को होने वाले लाभों का प्रदर्शन करना है। इसके अलावा परियोजना के वृहद उद्देश्यों में वैश्विक स्तर पर कार्बन प्रच्छादन में योगदान करना, अपकर्षित भूमियों में सुधार लाना एवं महत्वपूर्ण जैव विविधता का संरक्षण करना शामिल है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना ग्रीन इंडिया मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सार्थक सहयोगी भूमिका निभाएगा जो कि भारत के राष्ट्रीय निर्धारित सहयोग के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
परियोजना की गतिविधियां
शासकीय संस्थानों के क्षमता एवं कौशल का सुदृढ़ीकरण
वानिकी एवं भू-प्रबंध कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जीआईएस प्रणाली के उपयोग हेतु कर्मचारियों का प्रशिक्षण, जैव गलियारों की पहचान एवं नक्शे तैयार करने हेतु सहयोग, चयनित क्षेत्रों में विशेष तौर पर जैव विविधता गलियारों में, जैव विविधता मापन हेतु प्रशिक्षण एवं प्रोटोकॉल निर्धारण एवं प्रबंध योजना का निर्माण, प्रबंध योजनाओं के पुनरीक्षण में सहयोग, संयुक्त वन प्रबंधन, प्रबंधन समितियों का जैव विविधता प्रबंधन हेतु सशक्तिकरण, कर्मचारियों को संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों का प्रवास सुनिश्चित कराना है।
वन कार्बन भंडारण मापन एवं अनुश्रवण हेतु क्षमता विकास
कार्बन मापन व अनुश्रवण प्रणाली का विकास हेतु तकनीकी सहयोग, क्षेत्र में स्थापित करते हुए हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर क्रय हेतु सहयोग, कार्बन मापन हेतु कर्मचारियों का प्रशिक्षण एवं अतिरिक्त संविदा कर्मचारियों हेतु सहयोग तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से कार्बन मापन हेतु समन्वय एवं नेटवर्किंग स्थापित करना।
लघु वनोपज क्षमता विकास
संवहनीय उपयोग के रूपरेखा ढांचा का विकास, स्थानीय अग्रणी कर्मचारियों, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों, स्व सहायता एवं उपयोगकर्ता समूहों का प्रशिक्षण लघु वनोपज के संवहनीय उपयोग हेतु सामुदायिक आधारित मॉडल का विकास करना।
वनों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार
वनक्षेत्रों में कार्बन भंडारण को बढ़ाना एवं पुन: स्थापित करना, उच्च गुणवत्ता के स्थानीय प्रजाति के पौधों को तैयार करने हेतु चयनित वन रोपडिय़ों का आधुनिकीकरण, रोपड़ क्षेत्रों में मृदा उपचार हेतु नए आधुनिक विधियों के उपयोग हेतु संस्थागत क्षमता विकास, बिगड़े वन क्षेत्रों के पुनरूद्धार हेतु कार्य एवं वन कार्बन अनुश्रवण व्यवस्था की स्थापना करना है।

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