स्वच्छता के मामले में पिछड़ी नगर परिषद पानखेड़ी

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*स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 में नगर परिषद को मिली 96 वी रैंक*

*कालापीपल, अनिल शर्मा ।*

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत देश को स्वच्छता की श्रेणी में लाने के लिए केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक हर संभव प्रयास किए जा रहे है। स्वच्छता सर्वेक्षण में कालापीपल विधानसभा से दो नगरीय निकायों की बात करें तो एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में नगर परिषद पोलाय कला को प्रदेश में 33 वाँ प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त करने का गौरव प्राप्त हुआ है। वही बात की जाए विधानसभा क्षेत्र के मुख्य केंद्र बिंदु नगर परिषद पानखेड़ी कालापीपल की तो परिषद को प्रदेश में 96 वाँ स्थान ही प्राप्त हो पाया है जो की बहुत ही विचारणीय है। स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद परिषद के आला अधिकारियों की उदासीनता व लंबे समय से प्रभारियों के भरोसे चल रही नगर परिषद के कारण शायद परिषद वह स्थान हासिल नहीं कर पाया है ।

सर्वेक्षण में पिछड़ने के कारणों का पता लगाने के लिए नगर का सर्वे संवाददाता द्वारा किया गया तो मामला सामने आया कि नगर में कई स्थानों पर नगर परिषद के जिम्मेदारों का गैर जिम्मेदाराना रवैया इसका प्रमुख कारण रहा है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को नगर परिषद द्वारा किस प्रकार से औपचारिकताओं में पूरा किया गया है यदि हम नगर के प्रमुख स्थान की बात करें तो नगर के लाखों की लागत से निर्मित बस स्टैंड जो आज भी मूलभूत आवश्यकताओं की बाट जोह रहा है। एक ओर स्वच्छता की मिसाल बने ग्राम पंचायत बेहरावल में हाल ही में लोकार्पित ऐतिहासिक मुक्तिधाम जिसमें सरपंच की सूझबूझ द्वारा महती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मुक्तिधाम में भी शौचालय को प्राथमिकता दी गई है लेकिन नगर के बस स्टैंड पर न तो स्थाई पेयजल व्यवस्था है ना शौचालय की ।

वहीं दूसरी तस्वीर देखे नगर परिषद द्वारा शासकीय अस्पताल परिसर के पास बनाए गए औपचारिकता वाले शौचालय की । इस स्थान पर शौचालय की दीवार पर वास वैसिन व नल लटका दिया गया । शौचालय बनने को लगभग 2 वर्ष होने को है लेकिन आज तक परिषद द्वारा शौचालय की सफाई की गई न शौचालय पर पानी की व्यवस्था करने की जहमत उठाई। उक्त शौचालय का इस्तेमाल करना तो दूर की बात लोग पास से गुजरने में भी गुरेज करते हैं। दिल्ली से आई स्वच्छता सर्वेक्षण टीम ने
चाहे जो अंक दिया हो लेकिन वास्तव स्वच्छता के मामले में नगर पिछड़ता नजर आता है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 नगर परिषद द्वारा स्कूलों में जा-जाकर प्रतियोगिताएं भी आयोजित करवाई थी प्रतियोगिता का आयोजन फोटोग्राफी तक ही सिमट कर रह गया । बच्चों को प्रोत्साहन स्वरूप ना तो प्रमाण पत्र मिले ना पुरस्कार । साथ ही नगर में सूअरों का आतंक, नगर से एकत्रित किए गए कचरे को मुख्य मार्गों के किनारे ही डालना, खाली प्लाटों में जमा पानी, कई मुख्य मार्गों पर कीचड़ जैसे कारणों के प्रति उदासीन रवैयों के कारण स्वच्छ सर्वेक्षण में नगर को 96 वाँ स्थान मिल पाया है जो कि विचारनीय है । और इससे प्रतीत होता है स्वच्छता के नाम पर बहाए गए लाखों रुपयों का सुनियोजित ढंग से उपयोग नहीं हुआ है।

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