टीबी को मरीजों को अस्पताल भेजकर समाज सेवक का कार्य करें डाक्टर एवं केमिस्ट-डा.गुप्ता

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◆टीबी के मरीज के साथ लापरवाही बरतने पर सजा का प्रावधान-ड्रग इंस्पेक्टर
रिपोर्ट-प्रद्युम्न फौजदार,छतरपुर
बडामलहरा/संभावना के आधार पर टीबी के मरीजों को सरकारी अस्पतालों में भेजकर चिकित्सक, मेडिकल स्टोर संचालक समाज सेवक की भूमिका निभायें यह बात जिला क्षय रोग प्रभारी डा.एम.के.गुप्ता ने बडामलहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मीटिंग हाल में बडामलहरा एवं गुलगंज के मेडिकल संचालकों की आयोजित कार्यशाला में कही डा.गुप्ता ने कहा कि टीबी का रोग लाईलाज तो नहीं है मगर कई बार चिकित्सक,केमिस्ट और स्वयं मरीज की लापरवाही से टीबी का रोग बिगड़ जाता है।डा.गुप्ता ने कहा कि समस्त चिकित्सक एवं मेडिकल स्टोर संचालक टीबी से सम्बंधित मरीजों को सरकारी अस्पताल में भेजने की कोशिश करें ताकि उसका पूरा लाभ मरीजों को मिल सके साथ ही उसका आधार कार्ड,बैंक खाता तथा मोबाइल नम्बर भी उपलब्ध करायें ताकि शासन से मिलने वाली पौष्टिक आहार की राशि भी मरीज के खाते में भेजी जा सके इसके अलावा केमिस्ट इस बात का विशेष ध्यान रखें की टीबी की दवाई केवल पंजीकृत(एमबीबीएस) चिकित्सक द्वारा लिखे पर्चे पर ही दें। कार्यशाला में ड्रग इंस्पेक्टर डी.के. जैन ने केमिस्ट को जानकारी देते हुये बताया कि टीबी के मरीज का अधूरा इलाज होने से एक तो मरीज बिगड़ जाता है।

दूसरे नये दस मरीज पैदा हो जाते है इसलिये आवश्यक है की इस ओर हमारे केमिस्ट विशेष ध्यान दें ड्रग इंस्पेक्टर श्री जैन ने यह भी बताया कि चूंकि शासन इस ओर विशेष ध्यान देकर आगामी सालों में भारत को टीबी मुक्त करने के लिये दृढ़ संकल्पित है इसलिए टीबी की दवा देते वक्त पर्चा में लिखी गई तारीख देखें तथा यदि मरीज एक माह की दवा लेता है तो पर्चे में तारीख कोड कर दें और यह प्रयास करें कि मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचे और डाटस का उपयोग करे इसके अलावा रजिस्टर्ड चिकित्सक जो एमबीबीएस से कम न हो उसके पर्चे पर ही टीबी की दवाई दें साथ ही डाक्टर का पर्चा, मरीज का आधार कार्ड,मोबाईल नम्बर और खाता नम्बर अवश्य लें ताकि टीबी प्रभारी डाक्टर और टेक्नीशियन न सिर्फ मरीज से समय पर दवाई लेने जानकारी ले सके बल्कि समय पर दवाई लेने प्रेरित भी कर सके ड्रग इंस्पेक्टर ने यह भी बताया कि टीबी के मरीज के लिये डाक्टर, केमिस्ट और टैक्नीशियन बराबर के जिम्मेदार है यदि इसमें एक भी दोषी है पाया जाता है उसके खिलाफ आइपीसी की धारा में प्रकरण दर्ज कराये जाने का प्रावधान है जिसमें एक से तीन बर्ष की सजा का प्रावधान है।ड्रग इंस्पेक्टर ने सभी केमिस्टों को प्रतिमाह एक विशेष फार्मेट में टीबी के मरीजों की जानकारी उपलब्ध कराने निर्देशित करते हुये कहा कि उनके निरीक्षण के दौरान टीबी के मरीज का रिकार्ड दुरुस्त न मिलने की स्थिति में केमिस्ट के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी।कार्यशाला में क्षय रोग प्रभारी डा.एमके गुप्ता, ड्रग इंस्पेक्टर डीके जैन,बीएमओ डा.हेमंत मरैया,टीबी डाटा आपरेटर पुरुषोत्तम अहिरवार,क्षय रोग प्रभारी टैक्नीशियन केके नामदेव के अलावा बडामलहरा और गुलगंज के केमिस्ट मौजूद थे।

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