डायवर्सन के लिए मिट्टी से भर दिया तालाब, अब तक पुल बनाया न हटाई मिट्टी

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विक्रम राठौर पत्रकार चान्दु

-●बारिश में नहीं भरा तो होगा जल संकट, मवेशियों को भी नहीं मिल सकेगा पानी

– ●कंपनी ने बारिश पूर्व मिट्टी हटाने और गहरीकरण कराने का दिया था आश्वासन

– ●अभी तक पुल का काम भी शुरू नहीं, अप्रैल में बना लिया था वहां पर डायवर्सन

बैतूल। भीमपुर ब्लॉक के चांदू और उसके आसपास के गांवों में आगामी गर्मी में जल संकट की रूपरेखा अभी से तैयार कर दी गई है। यहां गांव के पास स्थित पंचायती तालाब को स$डक बना रही कंपनी ने डायवर्सन के लिए लगभग पूरा पाट दिया था। इसके बाद न अभी तक पुल बनाया और न ही तालाब से मिट्टी निकाली गई है। ऐसे में यह तालाब इस साल नहीं भरेगा और इसका सीधा असर भूजल स्तर पर प$डेगा। इतना ही नहीं मवेशियों को भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना होगा। कंपनी ने गहरीकरण करना तो दूर रास्ता बनाने जो मिट्टी डाली थी, उसे तक नहीं हटाया है।

चांदू ग्राम पंचायत में वर्ष २००४-०५ में ग्रामीणों को निस्तार का पानी मुहैया कराने और क्षेत्र में भू-जल स्तर ब$ढाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर तालाब निर्माण किया था। यह तालाब स$डक से करीब ५० मीटर की दूरी पर स्थित है। भैंसदेही से नांदा होकर भीमपुर तक स$डक बना रही केसीसी कंपनी ने तालाब के पास पुल बनाने के लिए इस तालाब के बीच में से अप्रैल महीने में डायवर्टेड स$डक बना दी थी। किसी भी जल संरचना से छे$डछा$ड नहीं करने के एनजीटी के सख्त निर्देशों की अवहेलना करते हुए कंपनी ने तालाब में से स$डक बनाई थी। इसके लिए भारी मात्रा में मिट्टी, मुरम तालाब में डाला गया था और इससे तालाब लगभग पट गया है। इतना ही नहीं यह रास्ता बनाने के लिए वह रास्ता भी बंद हो गया है जिससे कि तालाब में पानी पहुंचता है। इन्हीं कारणों से उस समय ग्रामीणों ने विरोध भी किया था। इस पर कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि पुल के बनते ही न केवल यह मलबा हटा दिया जाएगा बल्कि तालाब का गहरीकरण भी कर दिया जाएगा। इससे ग्रामीणों को तालाब का और अधिक लाभ मिलेगा। इस पर ग्रामीणों और पंचायत ने भी अनुमति दे दी थी। ग्रामीणों को लग रहा था कि बारिश के पहले पुल भी बन जाएगा और तालाब गहरीकरण भी हो जाएगा।

अभी तक नहीं बनाया पुल

इधर कंपनी ने मनमानी करते हुए महीनों बाद भी पुल का काम ही शुरू नहीं किया है। इससे बारिश के पहले तालाब की सफाई भी नहीं हो पाई। अब यदि कंपनी पुल का काम शुरू भी करती है तो कम से कम एक महीना तो लगेगा ही। इसके बाद तालाब सफाई होते-होते बारिश या तो खत्म हो चुकी होगी या फिर इतना कम समय रह जाएगा कि उसमें तालाब में पानी का भराव ही नहीं हो पाएगा। दूसरी ओर कंपनी हाल-फिलहाल पुल का काम शुरू करने की स्थिति में भी नजर नहीं आ रही है।

सूखा पडा रहेगा तालाब

इन्हीं सब कारणों से इस साल तालाब पूरी तरह से सूखा रहने के आसार नजर आ रहे हैं। तालाब सूखा रहने से एक ओर जहां पहले से ही पाताल में चल रहा इस क्षेत्र का भूजल स्तर और नीचे चला जाएगा वहीं दूसरी ओर गर्मियों में मवेशियों को पानी तक नहीं मिलेगा। इस क्षेत्र में वैसे ही पहले से भारी जल संकट चल रहा है। पूरी गर्मी इस साल जल संकट झेलते हुए ही निकली है और अभी भी पूरी तरह से इससे निजात नहीं मिली है। अगले साल जल संकट और विकराल रूप में मौजूद रहेगा।

‘ scn news ने किया था आगाह

इस बारे में ‘scn न्यूज * ने पहले ही आगाह करते हुए सारी स्थितियां साफ कर दी थी। इसके बावजूद समय रहते किसी ने भी इस बारे में सुध नहीं ली। यही वजह है कि न कंपनी ने समय रहते बारिश के पहले पुल बनाकर तालाब साफ करने की जहमत उठाई और न ही अधिकारियों ने इस ओर ध्यान दिया। दूसरी ओर हर तरफ जल संकट के चलते शासन द्वारा भी जल संरचनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। पुल नहीं बना था तो भी यदि अधिकारी बारिश के पहले तालाब को खाली करवा लेते तो यह स्थिति नहीं बनती।

अभी तक नहीं आ सका है पानी

तालाब को लगभग पाट देने और पानी आने के रास्ते बंद करने का ही नतीजा है कि बारिश को एक महीना और काफी पानी बरस जाने के बाद भी तालाब अभी तक पूरा सूखा प$डा है। ग्रामीणों के अनुसार अन्य वर्षों में इन दिनों तक काफी पानी तालाब में आ जाता है। इस साल तालाब के हाल देख कर तो ऐसा लग रहा है कि मवेशियों के लिए बारिश खत्म होते ही पानी का अकाल प$ड जाएगा। अभी भी यदि अधिकारी तत्परता दिखाते हुए तुरंत तालाब को साफ करवा लेते हैं तो ज्यादा नहीं थो$डा-बहुत लाभ तो मिल जाएगा।

वे बोले…

यदि तालाब के बीच से कंपनी ने डायवर्सन बनाया है और बारिश शुरू होने के बावजूद मलबा नहीं हटाया है तो कंपनी को नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जल संरचनाओं के साथ इस तरह का कृत्य नहीं किया जा सकता।

प्रदीप छत्रोले, सीईओ, जनपद पंचायत, भीमपुर

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