
ब्यूरो रिपोर्ट
सारनी — सेवानिवृत्त अधिकारी औेर कर्मचारियों की उत्कृष्ट सेवाओं के कारण मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड बिजली उत्पादन के क्षेत्र में अनेक कीर्तिमान स्थापित कर रही है। उसी प्रकार 1976 से समिती के नियमित सदस्यों के कारण स्व सुरक्षा निधी समिती रूपी पौधा आज वट-वृक्ष का रूप धारण कर चुका है। जब समिती के सदस्य दो रू प्रति माह घर घर जाकर जमा करते थे। कितना परिश्रम इस समिती को सुदृढ करने के लिए प्रांरभ काल में संस्थापक सदस्यों को करना पडा। जिसका श्रेय सेवानिवृत्त वरिष्ठ लेखा अधिकारी वासुदेव गुरव एवं उनके सहयोगियों को जाता है। उसके बाद मंडल प्रशासन जबलपुर के सहयोग के कारण अंशदान की कटौति वेतन से की जाने लगी।समिति की पहली बैठक 17 दिसम्बर 1975 को हुई। इसके पूर्व श्री वासुदेव गुरव ने मध्यप्रदेश के औद्योगिक संस्थापनों के साथ भेल, भिलाई स्टील प्लांट बाल्को का श्रमिकों के हित में चलने वाली गतिविधीयों का अध्ययन किया। अंत में स्व सुरक्षा निधी समिती की स्थापना हुई। समिती ने अपना संविधान बनाया। पहली बैठक हुई और संस्थापक सचिव वासुदेव गुरव और अध्यक्ष सी के जोसफ मुख्य अभियंता सतपुडा ताप विद्युत गृह बने। समिती के प्रारंभिक काल से आज तक समिती के सदस्यों ने निःस्वार्थ भाव से समिती को सहयोग प्रदान कर आश्रित परिवार के सदस्यों को आर्थिक सहायता तत्काल दी है। यही कारण है कि समिती आज मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड जबलपुर मुख्यालय के साथ ही श्रीसिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया, संजय गाधी ताप विद्युत गृह बिरसिंहपुर,अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के साथ मडीखेडा , गांधीसागर, तोतलाडोह,टोंस जल विद्युत गृह में वर्तमान समिती पारदर्शिता के साथ सक्रिय रूप से काम कर रही है। समिती आकस्मिक निधन पर रू 75000/- का आर्थिक सहयोग प्रदान करती है। आई सी यू में एडमिट होने पर साठ हजार रूपए बिना ब्याज के देती है। जो किश्तों में वेतन से कटौती कर समायोजित किया जाता है। समिती के सचिवअम्बादाससूने ने बताया कि हाल ही में जबलपुर में संस्थापक सचिव वासुदेव गुरव से समिती के पचास वर्ष पूर्ण होने पर विस्तार से चर्चा की गई। सतपुड़ा संकुल प्रमुख एस के लिल्होरे जी से भी इस संबंध में सकारात्मक बातचीत की गई है।




