
gram rojgaar sahayak मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद (MPSEGC) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (मनरेगा) के तहत कार्यरत ‘ग्राम रोजगार सहायकों’ (GRS) के अनुबंध और नवीनीकरण की प्रक्रिया में एक बड़ा और महत्वपूर्ण संशोधन किया है। परिषद के आयुक्त अवि प्रसाद द्वारा 1 सितम्बर 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी कर “ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका-2025” के नियमों में तत्काल प्रभाव से बदलाव कर दिया गया है।
इस नए संशोधन के बाद अब उन ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायकों के अनुबंध निष्पादन का रास्ता साफ हो गया है, जहाँ ग्राम पंचायत सचिव का पद लंबे समय से खाली चल रहा था या प्रभार को लेकर विसंगतियाँ बनी हुई थीं।
क्या थी पुरानी विसंगति और क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
gram rojgaar sahayak “ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका-2025” के पुराने नियमों (उप-कंडिका 3.2) के अनुसार, ग्राम रोजगार सहायक का संविदा अनुबंध अनिवार्य रूप से संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव और ग्राम रोजगार सहायक के मध्य ₹500/- के गैर-न्यायिक बंधपत्र (Non-Judicial Stamp Paper) पर निष्पादित किया जाना तय था।
परंतु, परिषद के संज्ञान में यह आया कि मध्य प्रदेश की कई ग्राम पंचायतों में:
- सचिव का पद पूर्णतः रिक्त है।
- कई जगहों पर सचिव के अनुपस्थित या पदस्थ न होने के कारण स्वयं ग्राम रोजगार सहायक को ही पंचायत सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।
ऐसी स्थिति में तकनीकी और कानूनी अड़चन आ रही थी, क्योंकि gram rojgaar sahayak ग्राम रोजगार सहायक स्वयं के साथ ही संविदा अनुबंध का निष्पादन नहीं कर सकता था। यह प्रशासनिक और विधिक (Legal) रूप से सही नहीं था। इसी व्यावहारिक कठिनाई को दूर करने के लिए नियमों में तत्काल प्रभाव से संशोधन किया गया है।
नया नियम: अब कौन करेगा अनुबंध का निष्पादन?
जारी आदेश के तहत उप कंडिका 3.2 को प्रतिस्थापित (Replace) करते हुए निम्नलिखित अतिरिक्त प्रावधान जोड़े गए हैं:
- सामान्य स्थिति: सामान्य परिस्थितियों में अनुबंध पहले की तरह ही ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक के मध्य ही निष्पादित किया जाएगा।
- सचिव पद रिक्त होने पर (पहली शर्त): यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव पदस्थ नहीं है (पद रिक्त है), तो संविदा अनुबंध ग्राम पंचायत सचिव के स्थान पर जनपद पंचायत स्तर पर संबंधित ‘अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी’ (APO – वीबी-जी राम जी) द्वारा निष्पादित किया जाएगा।
- APO पद रिक्त होने पर (दूसरी शर्त): यदि संबंधित जनपद पंचायत में ‘अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी’ का पद भी खाली है, तो यह कार्यवाही ‘प्रभारी अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी’ (प्रभारी एपीओ) द्वारा संपादित की जाएगी।
यह नया निर्देश अपर मुख्य सचिव द्वारा अनुमोदित है और इसे पूरे मध्य प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
इन अधिकारियों को भेजी गई आधिकारिक प्रतिलिपि
इस आदेश की पारदर्शिता और सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए इसकी प्रतिलिपि मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख प्रशासनिक विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है:
- मध्य प्रदेश शासन के माननीय मंत्री और राज्य मंत्री (पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) के विशेष सहायक।
- अपर मुख्य सचिव (म.प्र. शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग) के निज सहायक।
- मध्य प्रदेश के समस्त संभागों के संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner)।
- माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर, एवं खंडपीठ ग्वालियर व इंदौर के कार्यालय महाधिवक्ता/उपमहाधिवक्ता।
- प्रदेश के समस्त जिलों के कलेक्टर/जिला कार्यक्रम समन्वयक और समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO – जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत)।
निष्कर्ष
इस नीतिगत बदलाव से मध्य प्रदेश के हजारों gram rojgaar sahayak ग्राम रोजगार सहायकों को बड़ी राहत मिलेगी। सचिव न होने की स्थिति में जो अनुबंध और नवीनीकरण की प्रक्रिया रुकी हुई थी, वह अब जनपद स्तर से बिना किसी रुकावट के पूरी हो सकेगी। इससे ग्रामीण विकास और मनरेगा के कार्यों में और अधिक तेजी आएगी।
जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण नीति-2026 तथा मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के दिशा-निर्देशों के तहत की गई है। स्थानांतरण सूची में मझौली, कुसमी, सिहावल, सीधी एवं रामपुर नैकिन जनपद पंचायतों के ग्राम रोजगार सहायकों को शामिल किया गया है।
आदेश के तहत कई ग्राम रोजगार सहायकों का आपसी स्थान परिवर्तन किया गया है, जबकि कुछ कर्मचारियों को नई पंचायतों में पदस्थ कर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें नितेश पाण्डेय, आशीष द्विवेदी, सुधीर सिंह, प्रदीप कुमार गुप्ता, राजराखन गुप्ता, रजनीश द्विवेदी, दिलीप सौंधिया, राजबहोर साहू, राजकुमार मिश्रा, रामचरण साकेत सहित अन्य ग्राम रोजगार सहायकों के नाम शामिल हैं।







