
मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स MP State Tiger Strike Force (एमपीएसटीएसएफ) द्वारा काले हिरण और चिंकारा के शिकार के मामले में मुंबई निवासी आरोपी सलमान की तीसरी जमानत याचिका मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने खारिज कर दी है। न्यायालय ने संरक्षित वन्य जीवों के शिकार को गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से 20 माह से अधिक समय से जेल में निरुद्ध रहने और प्रकरण के विचारण में लग रहे समय का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई। उच्च न्यायालय ने एमपीएसटीएसएफ की ओर से शासकीय अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर संरक्षित वन्य जीवों का क्रूरतापूर्वक शिकार किए जाने तथा शिकार के फोटो और वीडियो बनाए जाने को अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने विचारण न्यायालय को प्रकरण की दैनिक आधार पर सुनवाई कर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए हैं।
वन्य जीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में एमपीएसटीएसएफ MP State Tiger Strike Force की इंदौर इकाई ने 3 दिसंबर 2024 को भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मुंबई निवासी आरोपी सलमान को गिरफ्तार किया था। सलमान के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उसके कब्जे से 64.70 किलोग्राम काले हिरण का मांस, एक अवैध पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस तथा शिकार में प्रयुक्त टोयोटा इनोवा वाहन जब्त किया गया था।
सलमान और उसके साथियों के मोबाइल फोन ने उगली तस्वीरें
जांच के दौरान सलमान और उसके साथियों के मोबाइल फोन से चिंकारा और काले हिरण के शिकार से संबंधित तस्वीरें और वीडियो क्लिप भी बरामद हुए। इनमें आरोपी मृत वन्य जीवों के साथ दिखाई दिया। MP State Tiger Strike Force जांच में प्रदेश के उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर और इंदौर वन वृत्तों के अंतर्गत विभिन्न जिलों एवं वनमंडलों में बड़ी संख्या में शाकाहारी वन्य जीवों के शिकार से जुड़े संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने आई।
इस मामले से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- 20 महीने से अधिक समय से जेल में: आरोपी सलमान पिछले 20 महीनों से भी ज्यादा समय से जेल में बंद है। सुनवाई के दौरान उसके वकील ने दलील दी थी कि मामला काफी समय से चल रहा है, इसलिए उसे जमानत दी जाए।
- टाइगर स्ट्राइक फोर्स की कार्रवाई: यह कार्रवाई मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (MPSTS) द्वारा काले हिरण और चिंकारा के शिकार के मामले में की गई थी।
- अदालत का कड़ा रुख: माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वन्य जीवों के अवैध शिकार से पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन को भारी नुकसान पहुंचता है, इसलिए ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने विचारण न्यायालय को प्रकरण की दैनिक आधार पर सुनवाई कर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए हैं।

क्या है मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स
मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (MPSTSF) वन्यजीवों के शिकार और अवैध तस्करी को रोकने वाली एक विशेष एजेंसी है, जिसकी पूरी जानकारी State Tiger Strike Force की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है.
- गठन: इस फोर्स का गठन मध्य प्रदेश शासन के वन विभाग द्वारा किया गया था।
- आदेश: इसके लिए 12 दिसंबर 2008 और 17 जून 2022 को आदेश जारी किए गए थे।
- पुराना नाम: 12 दिसंबर 2008 से पहले इसे ‘एंटी-पोचिंग स्क्वाड’ (शिकार विरोधी दस्ता) कहा जाता था।






