
प्रमुख सचिव ऊर्जा के नाम के मुख्य अभियंता को सारणी बचाओ संघर्ष समिति ने सौंपा ज्ञापन
स्थानीयता को प्राथमिकता पेटी कार्यों एवं वाहनों की दरों की समीक्षा की रखी मांग
सारनी l प्रमुख सचिव ऊर्जा मनीष सिंह के नाम मुख्य अभियंता सुशील कुमार लिल्होरे को सारणी बचाओ संघर्ष समिति ने गुरुवार ज्ञापन सौंपा l
सौंपे गए ज्ञापन में स्थानीयता को प्राथमिकता देने और पेटी कार्यों एवं वाहनों की दरों की समीक्षा की मांग रखी है l
सौंप गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है की सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में निर्माणाधीन 660 मेगावाट इकाई क्रमांक-12 एवं डिस्मेंटलिंग कार्यों में स्थानीयता को न तो प्राथमिकता दी जा रही है न ही पेटी में दिए जाने वाले कार्यों की डर कम होने से सम्बंधितो को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है l
सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में 660 मेगावाट नवीन विद्युत इकाई का निर्माण क्षेत्रवासियों के लंबे संघर्ष और अथक प्रयासों के बाद धरातल पर आई है। सारणी बचाओ संघर्ष समिति एवं स्थानीय नागरिकों ने इस परियोजना के लिए सड़क से लेकर शासन स्तर तक संघर्ष किया है। ऐसे में इस परियोजना में स्थानीय लोगों के रोजगार और व्यवसाय के अवसरों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य किए जाने योग्य नहीं है l
गौरतलब रहे की वर्तमान में निर्माणाधीन कार्यों एवं डिस्मेंटलिंग कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों, वाहन मालिकों एवं श्रमिकों को अपेक्षित अवसर नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। साथ ही पेटी कार्यों में अत्यंत कम एवं वर्तमान परिस्थितियों के अनुरुप अव्यावहारिक दरों पर कार्य दिए जाने तथा वाहनों को भी कम दरों पर लगाए जाने से स्थानीय ठेकेदारों एवं वाहन मालिकों में भारी असंतोष है।
बीएचईएल से संबंधित कार्यों में पेटी कॉन्ट्रैक्टर बीबीजी द्वारा पुराने एवं कम दरों पर स्थानीय स्तर पर कार्य कराए जा रहे हैं। यदि यह स्थिति वास्तविक है तो इसकी निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है, क्योंकि परियोजना की लागत और वर्तमान बाजार परिस्थितियों के अनुरूप कार्य-दरों का निर्धारण होना चाहिए।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार 660 मेगावाट इकाई क्रमांक-12 के ईपीसी कार्य के लिए बीएचईएल द्वारा लगभग ₹9,525 करोड़ की निविदा दर प्रस्तुत की गई है, जो 48,प्रतिशत अधिक है जबकि परिजोयना की लागत ₹6,446 करोड़ है। ऐसे में स्थानीय ठेकेदारों, श्रमिकों एवं वाहन मालिकों पर अत्यंत कम दरों का भार डालना गंभीर चिंता का विषय है।
जिस परियोजना के लिए सारणी वासियों ने संघर्ष किया, उसके लाभ से सारणी के ही लोगों को वंचित नहीं किया जा सकता। बाहरी ठेकेदारों एवं श्रमिकों की अत्यधिक भागीदारी और स्थानीय लोगों की उपेक्षा से क्षेत्र में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।
सारणी बचाओ संघर्ष समिति निम्न मांगें करती हैl
— 660 मेगावाट निर्माण एवं डिस्मेंटलिंग कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों, श्रमिकों एवं वाहन मालिकों को प्राथमिकता दी जाए।
–पेटी कार्यों एवं वाहनों की वर्तमान बाजार परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक एवं न्यायसंगत दरें निर्धारित की जाएं।
–स्थानीयता से संबंधित स्पष्ट व्यवस्था बनाकर उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
–बाहरी ठेकेदारों एवं श्रमिकों की भागीदारी की समीक्षा कर स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता दी जाए।
–पेटी कार्यों की दरों एवं स्थानीय ठेकेदारों को कार्य दिए जाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कर समिति को अवगत कराया जाए।
अतः आपसे आग्रह है कि उक्त समस्याओं का 7 दिवस के भीतर ठोस निराकरण कर समिति एवं क्षेत्रीय संगठनों को अवगत कराया जाए।
अन्यथा सारणी बचाओ संघर्ष समिति क्षेत्र के सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों के साथ लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगी, जिसमें नगर बंद, काम बंद एवं अन्य लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर उसकी जवाबदेही संबंधित परियोजना प्रबंधन एवं मुख्य निर्माण एजेंसी की होगी।
सारणीवासियों ने नवीन प्लांट के लिए पहले भी नगर बंद, तीन दिवसीय आंदोलन एवं मुख्यमंत्री के नाम व्यापक जन-अभियान किए हैं। यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सारणी के भविष्य, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी जन-आकांक्षा है।
प्रतिलिपि की प्रति मुख्यमंत्री मोहन यादव म.प्र. शासन, भोपाल,प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भारतीय जनता पार्टी, भोपाल,कलेक्टर महोदय, जिला बैतूल,पुलिस अधीक्षक जिला बैतूल अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), शाहपुर, न्यायब तहसीलदार महोदय, घोड़ाडोंगरी सारनी और थाना प्रभारी, पुलिस थाना सारनी को दी गई है l





