
शाहपुर/घोड़ाडोंगरी (SCN News India)। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाली तहसील घोड़ाडोंगरी और अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय शाहपुर में राजस्व विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी और कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में हैं। मामला तहसील घोड़ाडोंगरी के ग्राम बादलपुर का है, जहाँ एक पीड़ित आवेदक पिछले 6 सालों से न्याय के लिए दफ्तरों की चौखट घिस रहा है, लेकिन रसूखदार अनावेदकों के पैसे के दम और अधिकारियों की कथित सांठगांठ के कारण कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है।
6 साल लग गए सिर्फ स्थगन आदेश जारी करने में
ग्राम बादलपुर का यह विवादित भूमि प्रकरण वर्ष 2021 से लगातार तहसील से लेकर एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहा है। हर महीने तारीखें तो बदलती हैं, लेकिन आवेदकों की किस्मत नहीं। राजस्व विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि विवादित भूमि पर स्थगन (Stay) आदेश जारी करने में ही अधिकारियों को छह साल का लंबा समय लग गया। आखिरकार दिनांक 03/07/2026 को प्रकरण क्रमांक 2026/160/ के तहत स्थगन आदेश जारी किया गया।
ग्राम बादलपुर का यह विवादित भूमि प्रकरण वर्ष 2021 से लगातार तहसील से लेकर एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहा है। हर महीने तारीखें तो बदलती हैं, लेकिन आवेदकों की किस्मत नहीं। राजस्व विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि विवादित भूमि पर स्थगन (Stay) आदेश जारी करने में ही अधिकारियों को छह साल का लंबा समय लग गया। आखिरकार दिनांक 03/07/2026 को प्रकरण क्रमांक 2026/160/ के तहत स्थगन आदेश जारी किया गया।
कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ी, अधिकारियों ने मूंदी आँखें
हैरानी की बात यह है कि 3 जुलाई 2026 को स्थगन आदेश जारी होने के बावजूद अनावेदकों ने न्यायालय के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए विवादित व शासकीय भूमि पर धड़ल्ले से खेती कर ली। पीड़ित पक्ष द्वारा तहसील कार्यालय में इसकी बार-बार लिखित और मौखिक सूचना दी गई, लेकिन मोटी साठगांठ के चलते अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
हैरानी की बात यह है कि 3 जुलाई 2026 को स्थगन आदेश जारी होने के बावजूद अनावेदकों ने न्यायालय के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए विवादित व शासकीय भूमि पर धड़ल्ले से खेती कर ली। पीड़ित पक्ष द्वारा तहसील कार्यालय में इसकी बार-बार लिखित और मौखिक सूचना दी गई, लेकिन मोटी साठगांठ के चलते अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
सात दिन में अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम भी हुआ बेअसर
मामले में लीपापोती और चौतरफा दबाव के बाद राजस्व न्यायालय द्वारा पुनः एक नया आदेश राज/प्र/007/अ/68/2026/27 दिनांक 19/08/2026
जारी किया गया। इस आदेश में अनावेदकों को सात दिन के भीतर शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने का कड़ा निर्देश दिया गया था। लेकिन आज इस आदेश को जारी हुए भी डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत चुका है और जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जनता का भरोसा उठा, पैसे के आगे न्याय बौना
प्रशासन की इस लचर और संदिग्ध कार्यप्रणाली से साफ़ प्रतीत होता है कि शाहपुर और घोड़ाडोंगरी के राजस्व अधिकारियों के लिए न्याय से ज़्यादा ‘पैसा’ प्रिय हो चुका है। जहाँ एक तरफ सरकार सुशासन और भू-माफियाओं पर कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं ग्राम बादलपुर का यह मामला जमीनी हकीकत को बयां कर रहा है। रसूखदार अनावेदक पैसों की खनक पर पूरे सिस्टम को नचा रहे हैं और गरीब आवेदक न्याय की उम्मीद में हर महीने सिर्फ तारीखें गिनने को मजबूर है।
प्रशासन की इस लचर और संदिग्ध कार्यप्रणाली से साफ़ प्रतीत होता है कि शाहपुर और घोड़ाडोंगरी के राजस्व अधिकारियों के लिए न्याय से ज़्यादा ‘पैसा’ प्रिय हो चुका है। जहाँ एक तरफ सरकार सुशासन और भू-माफियाओं पर कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं ग्राम बादलपुर का यह मामला जमीनी हकीकत को बयां कर रहा है। रसूखदार अनावेदक पैसों की खनक पर पूरे सिस्टम को नचा रहे हैं और गरीब आवेदक न्याय की उम्मीद में हर महीने सिर्फ तारीखें गिनने को मजबूर है।






