
जनकपुर में गूंजी किलकारी, ताड़का वध से सुरक्षित हुआ ऋषियों का यज्ञ
रामलीला में मऊगंज के कलाकारों ने किया प्रभावशाली मंचन, आज होगा धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर
बैतूल। राजा जनक के दरबार में माता सीता के जन्म का उल्लास और वन में प्रभु श्रीराम के हाथों ताड़का वध का शौर्य। रामायण के इन प्रसंगों ने मंगलवार रात बैतूल के गंज स्थित रामलीला मैदान को भक्तिमय बना दिया। 69वें रामलीला व दशहरा उत्सव के चौथे दिन रीवा के प्रसिद्ध श्री गणेश रामलीला मंडल, मऊगंज के कलाकारों ने सीता जन्म, मुनि आगमन, यज्ञ रक्षा और ताड़का वध का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

13 अक्टूबर को रात 9 बजे शुरू हुई रामलीला में सबसे पहले राजा जनक द्वारा हल चलाने पर भूमिसुता माता सीता के प्रकट होने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। माता सीता के अवतरण के साथ जनकपुर में बधाई गीतों और मंगल गान की गूंज सुनाई दी। कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय से इस प्रसंग को जीवंत किया। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के आगमन और राजा दशरथ से ऋषियों के यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को साथ भेजने का दृश्य मंचित हुआ।

वन में यज्ञ के दौरान राक्षसी ताड़का के विघ्न डालने और प्रभु श्रीराम द्वारा उसका वध कर ऋषियों के यज्ञ की रक्षा करने के प्रसंग ने मंचन में शौर्य और रोमांच का रंग भर दिया। कलाकारों की ओजस्वी प्रस्तुति पर दर्शक भावविभोर नजर आए। सीता जन्म के उल्लास से लेकर ताड़का वध तक की घटनाओं ने रामायण की कथा को मंच पर सजीव कर दिया।


बैतूल में रामलीला की यह परंपरा 69 वर्षों से जारी है। 12 दिवसीय रामलीला व दशहरा उत्सव का आयोजन श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति, बैतूल द्वारा पंजाब युवा सेवा समिति तथा श्री कृष्ण पंजाबी महिला कीर्तन मंडल, बैतूल के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। मैदान में प्रतिदिन रात 9 बजे रामलीला का मंचन होता है। महिलाओं के बैठने के लिए अलग व्यवस्था भी की गई है।
– आज धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर
रामलीला उत्सव के पांचवें दिन बुधवार, 14 अक्टूबर को रात 9 बजे धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और लक्ष्मण-परशुराम संवाद के लोकप्रिय प्रसंगों का मंचन होगा। इन दृश्यों को लेकर रामलीला प्रेमियों में उत्साह है।




