
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आदिवासी छात्रों और युवाओं से अभद्रता करना तथा रौब दिखाना एक पुलिस अधिकारी को भारी पड़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े निर्देश के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने मिसरोद थाना प्रभारी (TI) रतन सिंह परिहार को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इसके साथ ही टीआई के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा घटनाक्रम 13 अक्टूबर (मंगलवार) का है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) की छात्र शाखा के बैनर तले आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर भोपाल के रोशनपुरा से मिसरोद तक एक प्रदर्शन निकाल रहे थे।
इसी दौरान जब वाहन में सवार छात्रों ने ‘जय जोहार’ (सबका कल्याण करने वाली प्रकृति की जय) के नारे लगाए, तो मौके पर तैनात मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार अचानक भड़क गए।
वीडियो वायरल होने के बाद मंचा हड़कंप
घटना का एक 40 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में टीआई रतन सिंह परिहार छात्रों के प्रति अभद्र भाषा और अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए सुनाई दे रहे हैं। वे छात्रों को धमकाते हुए यह कहते भी नजर आए कि “यहीं कूट दूंगा”। वीडियो वायरल होने के बाद आदिवासी संगठनों, विधायकों और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नाराजगी जताते हुए अधिकारी पर FIR दर्ज करने और सस्पेंड करने की मांग उठाई थी।
मुख्यमंत्री के संज्ञान लेते ही हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल संज्ञान लिया और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। राज्य सरकार के मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस संबंध में बयान जारी कर कहा कि— “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार आदिवासी गौरव और स्वाभिमान की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। ‘जय जोहार’ हमारे समाज का गौरवशाली उद्घोष है। इस मामले में टीआई को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए सस्पेंड किया गया है और यदि जांच में कोई अन्य अधिकारी भी दोषी पाया जाता है, तो उस पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।”
पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब निलंबन अवधि के दौरान विभागीय जांच में तथ्यों की पूरी पड़ताल की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।





