
अशोक विजयादशमी एक एतिहासिक और सास्कृतिक पर्व है। जिसे बौद्ध अनुयायी व कई प्रगतिशील समुदाय विजय दशमी रुप मे दशहरा मनाते है। जानकारी के अनुसार सम्राट अशोक ने कालिंग युद्ध मे विजय हासिल की थी युद्ध के खुशी विजयदशमी ,कालिंग युद्ध भीषण रक्तपात से दुखी होकर युद्ध के हिंसा के अस्तशस्त्र तलवार का त्याग कर बौद्ध धर्म के अहिंसा करूणा शांति का मार्ग अपनाया था।विजय दशमी (दशहरा ) एक एतिहासिक सास्कृतिक पर्व है, प्रगतिशील समाज शस्त्रो का पुजन करता विजयदशमी रुप मे मनाता है। इतिहास बताता है कि सम्राट अशोक ने कालिंग युद्ध जीतने के बाद युद्ध के भीषण रक्तपात विचलित दुखी होकर हिंसा के युद्ध के शस्त्र तलवार को त्याग कर बौद्ध धर्म की अहिंसा शांति समानता करुणा के धम्म (धर्म ) के करुणा शांति कोअपनाया था।
और इसी दशहरे के समय 14अक्टूबर 1956 मे महामानव डाँ बाबा साहेब आम्बेडकर ने नागपुर की दिक्षा भूमि पर लाखो अनुयायीयो की उपस्थित मे छुआछूतभेदभाव असामनता का त्याग किया समानता करुणा बधुत्व के शांति के लिए बौद्ध धर्म धम्भअपनया था।बौद्ध अनुयायी इस दिवस को धम्म प्रवर्तक दिवस के बडे उत्साह केरुप मे मनाते है। वही ब्राह्मण मनवादी इतिहास बताता हैकि श्री राम ने रावण का वध करने के पुर्व माता के शस्त्र हथियारो का पुजा अहिंसा का रास्ता का चुनाव किया जिसे देखते हुए प्रगतिशील समाज शस्त्र हथियारो का पुजन हिंसा रावण,कुम्भकर्ण, मेघनाथ का क्रोध, राग, द्वेष, घंमड,गर्व अहंकार, ,लालच, तृष्णा, वासना ईर्ष्या,गर्व बुराई के पुतले दहन करके परअच्छाई की जीत के प्रतीक के रुप मे रदशहरा भनाता है।





