
मध्य प्रदेश गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा के एक बड़े घटनाक्रम में 1989 और 1992 बैच के करीब 15 अधिकारियों की डीएसपी (DSP) पद पर की गई पदोन्नति को निरस्त (रद्द) कर दिया है।
पुलिस मुख्यालय (PHQ), भोपाल के प्रस्ताव और रिकॉर्ड्स की गहन समीक्षा के बाद सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।
इस आदेश और पूरी कार्रवाई से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- क्यों रद्द हुआ प्रमोशन?: गृह विभाग की समीक्षा में सामने आया कि पदोन्नति पाने वाले इन अधिकारियों के खिलाफ गंभीर विभागीय जांच (DE), आपराधिक प्रकरण (Criminal Cases) लंबित हैं या पूर्व के किसी मामले में उन पर आर्थिक/प्रशासनिक दंड (Punishment) प्रभावशील है । पुलिस सेवा नियमों के तहत ऐसी स्थिति में नियमित पदोन्नति नहीं दी जा सकती।
- पात्रता की दोबारा जांच: हाल ही में निरीक्षकों (TI) से उप पुलिस अधीक्षक (DSP) के पद पर बड़े पैमाने पर की गई पदोन्नति के बाद अब छानबीन समिति और विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के माध्यम से प्रमोट हुए अन्य संदिग्ध अधिकारियों के रिकॉर्ड्स और पात्रता की भी दोबारा बारीकी से री-चेकिंग की जा रही है।
- प्रशासनिक हड़कंप: इस आदेश के जारी होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जिन अधिकारियों का प्रमोशन निरस्त हुआ है, उन्हें वापस उनके मूल पद (इंस्पेक्टर/कार्यवाहक) की श्रेणी में भेजा जा रहा है।
इससे पहले अगस्त महीने में भी पुलिस मुख्यालय द्वारा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर विभिन्न संवर्गों के 161 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति को एक झटके में निरस्त किया जा चुका है।





