
आशाराम बापू के स्वास्थ्य को लेकर साधकों ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
जोधपुर जेल से आरोग्यम हॉस्पिटल में भर्ती कराने और शीघ्र ससम्मान रिहाई की मांग
बैतूल। जोधपुर केंद्रीय कारागृह में निरुद्ध 87 वर्षीय संत आशारामजी बापू के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर श्री योग वेदांत सेवा समिति बैतूल सहित साधकों ने चिंता जताई है। शुक्रवार को समिति के संरक्षक राजेश मदान के नेतृत्व में साधकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर सौरभ संजय सोनवने को ज्ञापन सौंपकर उन्हें तत्काल आरोग्यम हॉस्पिटल, जोधपुर में भर्ती कराने और शीघ्र ससम्मान रिहाई की मांग की।

समिति के संरक्षक राजेश मदान ने बताया कि संत आशारामजी बापू पिछले 13 वर्षों से जोधपुर केंद्रीय कारागृह में निरुद्ध हैं। उन्हें गंभीर हृदय धमनी रोग, मधुमेह और गुर्दे संबंधी बीमारियां हैं। पैरोल के दौरान 13 अक्टूबर 2026 को गंभीर हृदयाघात के बाद उन्हें गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती करना पड़ा था। इसके बाद 20 अक्टूबर को हृदय की अनियमित धड़कन और 22 अक्टूबर को दोबारा सीने में दर्द की शिकायत सामने आई।
ज्ञापन में बताया गया कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 4 जून और 1 जुलाई 2026 तथा सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जून और 6 अगस्त 2026 के आदेशों में आरोग्यम हॉस्पिटल, जोधपुर में उपचार जारी रखने के निर्देश दिए हैं। उनके निजी चिकित्सक डॉ. अरुण त्यागी ने भी 28 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती कर उपचार कराने की सलाह दी है। जेल औषधालय ने भी ऐसी गंभीर स्थिति का उपचार जेल में संभव नहीं होने की बात स्वीकार की है।
साधकों ने जेल में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। ज्ञापन में गर्म पानी से स्नान, स्वच्छ शौचालय, कुर्सी, आरामदायक बिस्तर और दो सहायकों जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायत की गई। साथ ही 18 कैदियों के साथ एक बैरक में रखे जाने से पर्याप्त नींद और आराम नहीं मिलने की बात कही गई।
समिति ने मांग की है कि उन्हें तत्काल आरोग्यम हॉस्पिटल में भर्ती कराकर हृदय विशेषज्ञों की निगरानी और आपातकालीन उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए जेल में आवश्यक मानवीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र ससम्मान रिहाई की जाए। साधकों ने कहा कि हालिया हृदयाघात और उसके बाद की जटिलताओं को देखते हुए उपचार में देरी जोखिमपूर्ण हो सकती है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21, मानवीय मूल्यों और न्यायालयों के आदेशों का सम्मान करते हुए तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
ज्ञापन सौंपते समय समिति संरक्षक राजेश मदान के साथ युवा सेवा संघ अध्यक्ष शैलेन्द्र रघुवंशी, आशाराम पंवार, सुरेंद्र कुंभारे, मोहन मदान, जगन्नाथ पंडाग्रे, बंशीलाल सोनी, परसराम मर्सकोले, रामराव कड़वे, प्रभाशंकर वर्मा सहित अनेक साधक मौजूद रहे।






