
ब्यूरो रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी रकम मिलने की उम्मीद बन गई है। कोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड के नाम पर वेतन काटने की व्यवस्था को गलत ठहराया है और साफ कहा है कि जब कर्मचारी पूरा काम कर रहे हैं, तो अधूरा वेतन देना ठीक नहीं है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रोबेशन के दौरान काटी गई सैलरी कर्मचारियों को एरियर के साथ लौटाई जाए. कोर्ट का कहना है कि सरकार ने कर्मचारियों से 100 फीसदी काम लिया, लेकिन वेतन में कटौती की, जो न्यायसंगत नहीं है। अब सरकार इस फैसले पर विचार कर रही है कि इसे चुनौती दी जाए या फिर पुराने नियम लागू किए जाएं।
दरअसल, यह विवाद 2019 में शुरू हुआ था, जब तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने सरकारी भर्तियों के नियम बदल दिए थे। नए नियम के तहत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए प्रोबेशन पीरियड बढ़ाकर चार साल कर दिया गया था। इस दौरान कर्मचारियों को पहले साल 70 फीसदी, दूसरे साल 80 फीसदी, तीसरे साल 90 फीसदी और चौथे साल पूरी सैलरी देने का प्रावधान किया गया था।