
ब्यूरो रिपोर्ट
सारनी क्षेत्र की तवा-2 कोयला खदान में 31 मार्च मंगलवार देर रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब खदान के अंदर अचानक रूफ फॉल (छत धंसने) की घटना सामने आई। इस गंभीर हादसे में कई मजदूर बाल-बाल बच गए, जबकि एक कर्मचारी घायल हो गया। घटना ने खदान की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (WCL) के कर्मचारी मन्नालाल को इस घटना में चोट आई है। वहीं, ठेका मजदूरों के चार अन्य साथी भी खतरे की जद में आए, लेकिन संयोगवश उनकी जान बच गई। मजदूरों का कहना है कि एरिया के 6 पिल्लर आड़ा और 29 पिल्लर सीधा हिस्से का बड़ा भाग अचानक गिर गया, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि खदान के भीतर ‘गोप’ क्षेत्र में छत गिरने से अचानक हवा का दबाव बढ़ गया, जिससे कोयले के छोटे-छोटे टुकड़े तेज गति से उछले और मजदूर को चोट लग गई। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा इस गंभीर घटना को दबाने की कोशिशें की गईं।
इलाज में लापरवाही, मजदूरों के साथ अन्याय के आरोप
मामले ने और तूल तब पकड़ा जब ठेकेदार राजीव सिन्हा के अधीन कार्यरत एक घायल मजदूर को समुचित इलाज तक नहीं मिला। आरोप है कि उसे सिर्फ दो दिन की हाजिरी देकर छुट्टी पर भेज दिया गया, जबकि उसकी स्थिति गंभीर थी।
दूसरी घटना में संजीत मंडल नामक मजदूर के साथ हादसा हुआ, जो केबल खींचने के दौरान ट्रैक पर फिसल गया। इस दुर्घटना में उसके दाहिने हाथ की दो जगह से हड्डी टूट गई। मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार राजीव सूर्यवंशी और सुपरवाइजर रामराज ने मामले को दबाते हुए उसे प्राइवेट अस्पताल में अधूरा इलाज कराकर घर भेज दिया। न तो पूरा इलाज कराया गया और न ही दवाइयों या इंजेक्शन के लिए आर्थिक सहायता दी गई।
नियमों की अनदेखी, जिम्मेदारों की चुप्पी
नियमानुसार खदान में घायल मजदूरों का संपूर्ण इलाज कराना और उन्हें आर्थिक सहायता देना प्रबंधन और ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस मामले में यह जिम्मेदारी पूरी तरह से नजरअंदाज की गई। अब घायल मजदूर और उसका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है और पिछले तीन से चार महीनों से जीवन-यापन तक मुश्किल हो गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
पाथाखेड़ा क्षेत्र में मजदूरों पर हो रहे कथित अत्याचार और शोषण की यह घटना कोई नई नहीं है, लेकिन अब तक जिला प्रशासन बैतूल की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे मजदूरों में आक्रोश और निराशा दोनों बढ़ रहे हैं।
न्याय की उम्मीद में मजदूर
घटना के बाद से ही ठेका मजदूरों की नजरें प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। मजदूरों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और घायल मजदूरों को उचित इलाज व मुआवजा दिया जाए।
निष्कर्ष:
तवा-2 खदान का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर लापरवाही और मजदूरों की अनदेखी का प्रतीक बनकर सामने आया है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।






