
ब्यूरो रिपोर्ट
लाल झंडा कोल माइन मजदूर यूनियन (सीटू) के क्षेत्रीय कार्यालय मे सीटू का स्थापना दिवस मनाया गया कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय अध्यक्ष जगदीश डिगरसे के द्वारा झंडा फहराकर कि गई सीटू के 56 वें स्थापना दिवस के अवसर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष जगदीश डिगरसे ने कहा सीटू 1970 से अपने स्थापना काल से एकता और संघर्ष को व्यवहार में लाने के लिए गंभीर प्रयास करते आ रहा है। सीटू समाज को सभी तरह के शोषण से पूरी तरह मुक्त करने के लिए खड़ा है। सीटू का मानना है उत्पादन, वितरण व विनिमय के सभी साधनों का समाजीकरण करके और समाजवादी राज्य की स्थापना करके ही श्रमिक वर्ग के शोषण को समाप्त किया जा सकता है।इस अवसर पर प्रदेश से आए प्रदेश कोषाध्यक्ष कामरेड कलिका प्रसाद जी ने अपने वक्तव्य मे कहा की कैसे_और_क्यों_बनी_सीटू_
जिसने मजदूर आंदोलन संजोया और उसे दिशा दी सीटू बनने के पहले भी कई ट्रेड यूनियने थीं, उसके बाद भी अनेक बनीं मगर सीटू होने की तासीर कुछ अलग ही है । इसकी एक वजह तो उन कारणों में निहित थी जिनके चलते अलग होकर सीटू बनानी पड़ी दूसरी कामकाज के उस तरीके में हैं जो इसने अपने स्थापना के समय से ही अपनाये और ज़िद के साथ निबाहे ।कैसे_बनी_सीटू के सम्बन्ध मे ज्यादा विस्तार में न जाते हुये सार रूप में इतना कि 9-10 अप्रैल 1970 को गोआ के वास्कोडिगामा शहर में चल रही जनरल कौंसिल के वे सारे सदस्य इकट्ठा हुये जिन्हें उनकी बात न सुने जाने पर गुंटूर में हुयी जनरल कौन्सिल से बाहर आने के लिए मजबूर होना पड़ा था । उनके साथ राज्य समितियों के भी कई सदस्य इस कन्वेंशन में पहुंचे और तय पाया कि यदि देश के मजदूर आंदोलन को जिंदा रखना है, वर्गसंघर्ष को जारी रखना है तो अब उसके लायक नया संगठन बनाने के अलावा और कोई दूसरा चारा नहीं है ।इस कन्वेंशन ने 28 से 31 मई 1970 में कलकत्ता में एक नए ट्रेड यूनियन सेंटर का सम्मेलन करने का निर्णय लिया और 30 मई को भारत के ट्रेड यूनियन आंदोलन में सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) की आमद हो गयी क्यों_बनी_सीटू ? मौजूदा स्थितियां उस वक़्त के हालात को विस्तार से दोहराने के लिए अनुकूल समय नहीं है । मगर अलग यूनियन बनने के पीछे लाल झण्डे की दो राजनीतिक पार्टियां बनना कारण नहीं था । दो पार्टी तो 1964 में बन चुकी थीं । नेताओं का झगड़ा भी नहीं था । सवाल समझौतावाद की जगह वर्गसंघर्ष और ट्रेड यूनियन की लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली के पालन का था । डांगे साब के नियंत्रण वाली उस वक़्त की एटक में यह दोनों ही काम नामुमकिन बना दिए गए थे । इन दोनों ही मामलों में सीटू कितनी गम्भीर थी यह उसने अपने स्थापना सम्मेलन में ही स्पष्ट कर दिया जब उसने तुरंत मजदूर एकता के पक्ष में अभियान छेड़ा तथा “#एकता_और_संघर्ष”का नारा व्यवहार में लाना शुरू किया । इसी सम्मेलन ने 16 सूत्री मांगों को लेकर देशव्यापी संयुक्त आंदोलन का आव्हान किया । इस अवसर पर क्षेत्रीय महामंत्री गणेश गुजरे ने संचालन करते हुए कहा कि सीटू की स्थापना 30 मई 1970 को हुई थी उन्होंने कहा कि सीटू अपने स्थापना काल से ही वर्ग संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए आज भारत के मजदूरों के अधिकारों को संघर्ष से हासिल कर रहे है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार के द्वारा गरीब मजदूरों के घरों को तोड़ने का काम कर रही है जो कि गैर कानूनी ही नही प्रकृतिक न्याय के विरुद्ध है उन्होंने इसके खिलाफ फैसलाकुन लड़ाई लड़ेगा ओर मजदूरों को हटाने से बचाएगा । अंत मे क्षेत्रीय अध्यक्ष कामरेड जे विवगानंद के द्वारा सभी को धन्यवाद देकर गगनचूम्बी नारों के साथ कार्यक्रम के समापन की घोषणा की कार्यक्रम मे कल्याण मण्डल सदस्य कामेश्वर राय एवं सभी इकाई के अध्यक्ष सचिव एवं जुझारू कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे






