
Rakhi Mela Auditorium: रक्षाबंधन के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए स्थानीय ऑडिटोरियम परिसर में चार दिवसीय भव्य राखी मेले का रंगारंग और गरिमामय शुभारंभ किया गया…
बैतूल मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम में 24 अगस्त से चार दिवसीय भव्य राखी मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया। आजीविका मिशन के तत्वावधान में आयोजित इस मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र की महिलाओं स्व-सहायता समूह की दीदियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उनके हुनर को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजा पवार एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री हंसराज धुर्वे द्वारा दीप प्रज्वलन कर मेले का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने आजीविका मिशन के प्रयासों की सराहना की और नागरिकों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने तथा महिलाओं का उत्साहवर्धन करने की अपील की। विशेष आकर्षण एवं उत्पाद चार दिनों तक चलने वाले इस मेले में आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित इको-फ्रेंडली व आकर्षक राखियां रेशम, मोती तथा पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों से तैयार अनूठी राखियां, हाथ से बनी सजावटी वस्तुएं और हस्तशिल्प उत्पाद तथा पारंपरिक व्यंजन व घरेलू सामग्रियां शुद्ध पारंपरिक खाद्य सामग्री एवं दैनिक उपयोग की वस्तुएं बिक्री के लिए उपलब्ध है।
लोकल फॉर वोकल को मिलेगा बढ़ावा
उद्घाटन अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजा पवार ने कहा कि यह आयोजन दीदियों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम है। वहीं, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री हंसराज धुर्वे ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान को मजबूती मिलती है। यह राखी मेला आगामी चार दिनों तक आम जनता के लिए खुला रहेगा, जहां नागरिक सीधे स्व-सहायता समूहों से गुणवत्तापूर्ण हस्तनिर्मित सामान खरीद सकेंगे।
इस विशेष मेले का मुख्य उद्देश्य स्थानीय महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और हस्तशिल्प कलाकारों को एक मजबूत मंच प्रदान करना है। मेले के पहले ही दिन स्थानीय नागरिकों, विशेषकर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ऑडिटोरियम परिसर में आयोजित इस मेले के भीतर 30 से अधिक विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉलों पर महिलाओं द्वारा पूरी तरह से हाथ से निर्मित (Handmade) इको-फ्रेंडली राखियां, रेशमी धागों की राखियां, कलावा राखियां और बच्चों के लिए आकर्षक कार्टून वाली राखियां प्रदर्शित की गई हैं।राखियों के अतिरिक्त इस प्रदर्शनी में घर की सजावट का सामान, मिट्टी के कलात्मक दीये, महिलाओं के पारंपरिक परिधान, हस्तनिर्मित आभूषण और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं, जो आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उद्घाटन अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से न केवल स्थानीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की नई प्रेरणा भी मिलती है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की गुणवत्ता बाजार में मिलने वाले महंगे सामानों से कहीं बेहतर है।प्रशासन ने अपील की है कि अधिक से अधिक नागरिक इस मेले में आएं और इन महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को खरीदकर स्थानीय कला और ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) अभियान को बढ़ावा दें। आयोजकों से मिली जानकारी के अनुसार, यह चार दिवसीय मेला आगामी तीन दिनों तक सुबह 11:00 बजे से लेकर रात्रि 9:00 बजे तक आम जनता के लिए पूरी तरह खुला रहेगा। सुरक्षा और व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए ऑडिटोरियम परिसर में सीसीटीवी कैमरे और पुलिस बल की पुख्ता व्यवस्था की गई है।