
बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों Outsourced Employee के शोषण का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला श्रम पदाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी एक सख्त आदेश के बावजूद जिले के कई विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों को न तो समय पर वेतन दिया गया और न ही दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर नियमानुसार बोनस का भुगतान किया गया है। सरकारी आदेशों की इस तरह खुली धज्जियां उड़ाए जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
क्या था श्रम पदाधिकारी का वह आदेश?
दरअसल, ‘मध्य प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ’ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद कार्यालय जिला श्रम पदाधिकारी, बैतूल द्वारा दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक पत्र (क्रमांक/जि.श्र.का./2026/7984) जारी किया गया था। जिले के समस्त कार्यालय प्रमुखों को भेजे गए इस आदेश में श्रम कानूनों का हवाला देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि:
दरअसल, ‘मध्य प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ’ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद कार्यालय जिला श्रम पदाधिकारी, बैतूल द्वारा दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक पत्र (क्रमांक/जि.श्र.का./2026/7984) जारी किया गया था। जिले के समस्त कार्यालय प्रमुखों को भेजे गए इस आदेश में श्रम कानूनों का हवाला देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि:
- आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन भुगतान अधिनियम 1936 के तहत निर्धारित समय सीमा में नियमित वेतन दिया जाए।
- मध्य प्रदेश शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किसी भी स्थिति में न किया जाए।
- कर्मचारियों को नियमानुसार बोनस एवं अन्य वैधानिक लाभ अनिवार्य रूप से प्रदान किए जाएं।
- हर महीने वेतन पर्ची (Salary Slip) दी जाए जिसमें EPF, ESIC और अन्य कटौतियों का पूरा विवरण हो।
आदेश केवल कागजों तक सीमित, कहीं मिला तो कहीं नहीं मिला बोनस Outsourced Employee
विभागीय सूत्रों और पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, श्रम विभाग का यह आदेश केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह गया है। जिले के कुछ चुनिंदा विभागों को छोड़ दिया जाए, तो अधिकांश शासकीय कार्यालयों और ठेका एजेंसियों ने इस आदेश को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया। दीपावली का त्योहार सामने होने के बाद भी कई आउटसोर्स कर्मचारियों को न तो बोनस मिला और न ही उनके वेतन की विसंगतियों को दूर किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेका एजेंसियां मनमाने तरीके से उनके वेतन में से अनावश्यक कटौतियां कर रही हैं और विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।
विभागीय सूत्रों और पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, श्रम विभाग का यह आदेश केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह गया है। जिले के कुछ चुनिंदा विभागों को छोड़ दिया जाए, तो अधिकांश शासकीय कार्यालयों और ठेका एजेंसियों ने इस आदेश को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया। दीपावली का त्योहार सामने होने के बाद भी कई आउटसोर्स कर्मचारियों को न तो बोनस मिला और न ही उनके वेतन की विसंगतियों को दूर किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेका एजेंसियां मनमाने तरीके से उनके वेतन में से अनावश्यक कटौतियां कर रही हैं और विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।
अधिकारियों की चुप्पी और सांठगांठ पर बड़े सवाल Outsourced Employee
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जिला श्रम पदाधिकारी ने स्वयं इस आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर बैतूल और श्रमायुक्त इंदौर को सूचनार्थ भेजी थी, तो फिर इसके क्रियान्वयन को लेकर जमीनी स्तर पर निगरानी क्यों नहीं की गई? आदेश में साफ लिखा था कि यदि नियमों में अनियमितता पाई जाती है या कर्मचारियों को बिना उचित कारण सेवा से पृथक किया जाता है, तो सख्त कार्रवाई होगी। इसके बावजूद ठेकेदारों और अधिकारियों की कथित सांठगांठ के चलते आज भी जिले का आउटसोर्स कर्मचारी अपने कानूनी हक (वेतन, पीएफ, बोनस) के लिए भटकने को मजबूर है। अब इस मामले में श्रमिक संगठनों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जिला श्रम पदाधिकारी ने स्वयं इस आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर बैतूल और श्रमायुक्त इंदौर को सूचनार्थ भेजी थी, तो फिर इसके क्रियान्वयन को लेकर जमीनी स्तर पर निगरानी क्यों नहीं की गई? आदेश में साफ लिखा था कि यदि नियमों में अनियमितता पाई जाती है या कर्मचारियों को बिना उचित कारण सेवा से पृथक किया जाता है, तो सख्त कार्रवाई होगी। इसके बावजूद ठेकेदारों और अधिकारियों की कथित सांठगांठ के चलते आज भी जिले का आउटसोर्स कर्मचारी अपने कानूनी हक (वेतन, पीएफ, बोनस) के लिए भटकने को मजबूर है। अब इस मामले में श्रमिक संगठनों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों Outsourced Employee के शोषण का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला श्रम पदाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी एक सख्त आदेश के बावजूद जिले के कई विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों को न तो समय पर वेतन दिया गया और न ही दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर नियमानुसार बोनस का भुगतान किया गया है। सरकारी आदेशों की इस तरह खुली धज्जियां उड़ाए जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
क्या था श्रम पदाधिकारी का वह आदेश?
दरअसल, ‘मध्य प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ’ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद कार्यालय जिला श्रम पदाधिकारी, बैतूल द्वारा दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक पत्र (क्रमांक/जि.श्र.का./2026/7984) जारी किया गया था। जिले के समस्त कार्यालय प्रमुखों को भेजे गए इस आदेश में श्रम कानूनों का हवाला देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि:
दरअसल, ‘मध्य प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ’ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद कार्यालय जिला श्रम पदाधिकारी, बैतूल द्वारा दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक पत्र (क्रमांक/जि.श्र.का./2026/7984) जारी किया गया था। जिले के समस्त कार्यालय प्रमुखों को भेजे गए इस आदेश में श्रम कानूनों का हवाला देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि:
- आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन भुगतान अधिनियम 1936 के तहत निर्धारित समय सीमा में नियमित वेतन दिया जाए।
- मध्य प्रदेश शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किसी भी स्थिति में न किया जाए।
- कर्मचारियों को नियमानुसार बोनस एवं अन्य वैधानिक लाभ अनिवार्य रूप से प्रदान किए जाएं।
- हर महीने वेतन पर्ची (Salary Slip) दी जाए जिसमें EPF, ESIC और अन्य कटौतियों का पूरा विवरण हो।






