
विक्की पारधी
- जनजातीय गौरव दिवस: केंद्रीय मंत्री और विधायक दोनों आदिवासी, फिर भी सम्मान से अछूती लाडो
- चिखलीमाल स्कूल की पहली ऐसी आदिवासी छात्रा,जिसने स्कूल में किया टॉप
- घोड़ाडोंगरी के निरक्षर माता – पिता की 10वी टॉपर बेटी शिवानी की कहानी
बैतूल। एमपी बोर्ड की कक्षा 10th में घोड़ाडोंगरी ब्लाक के चिखलीमाल स्कूल की छात्रा शिवानी कवड़े ने स्कूल में टॉप किया। उसने कक्षा दसवीं में 82. 2% अंक प्राप्त किए थे। शिवानी के स्कूल में टॉप करने के साथ ही तीन खास बात थी, जिसमें पहला उसके माता-पिता दोनों निरक्षर होना थी।कहते हैं कि माता-पिता हर बच्चे के पहले गुरु होते हैं ।दूसरा नंबर शिक्षक का आता है, लेकिन जब माता-पिता ही निरक्षर हो और कभी स्कूल की दहलीज पर पाव ना रखें हो तो बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा ? यह एक सवाल दिमाग मे कौंधता है, लेकिन इसका जवाब टॉपर,,, हो तो जीभ दांतों के बीच आ जाती है। दूसरी खास बात इस स्कूल में 2019 के बाद पहला मौका था जब स्कूल का रिजल्ट 86.37 प्रतिशत तक पहुंचा था और तीसरी उपलब्धि ये थी कि पिछले 6 सालों के दौरान ये भी पहली बार हुआ , जब एक आदिवासी वर्ग की बालिका ने स्कूल में टॉप किया। स्कूल की आदिवासी बालिका की इस उपलब्धि से खुश होकर इसी स्कूल से रिटायर हुए प्रभारी प्रिंसिपल आनंद साहू ने इस बालिका को ₹5000 की राशि भेंट की लेकिन इस आदिवासी बालिका का अब तक किसी मंच पर सम्मान नहीं हो सका। जबकि बैतूल जिले की घोलडोंगरी विधानसभा सीट से महिला आदिवासी विधायक है । बैतूल -हरदा, हरसूद सीट से सांसद व केंद्रीय मंत्री भी स्वयं आदिवासी वर्ग से आते हैं , लेकिन इसमें बावजूद भी शिवानी जैसी बेटी से मिलने उनके घर तक कोई नहीं पहुंचा। यहां तक आदिवासी आबा की जयंती को जनजातीय समुदाय के गौरव दिवस के रूप में मनाया गया, लेकिन समाज के इस लाड़ली के गौरव को भूल गए। जबकि जिले की कई प्रतिभाओं को बैतूल में बड़े बड़े आयोजन कर सम्मनित किया गया था।
कलेक्टर बनने का सपना
शिवानी कवड़े के माता-पिता ने मजदूरी कर गरीब परिस्थित में बेटी को पढ़ाया। बेटी ने भी उनकी मेहनत को अच्छा रिजल्ट लाकर ना केवल साकार किया बल्कि शिक्षकों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। उसके माता-पिता का सपना बेटी को कलेक्टर बनते हुए देखना है।
फीस भी देंगे रिटायर्ड, प्रिंसिपल
शिवानी और स्कूल के रिजल्ट से खुश रिटायर्ड प्रिंसिपल आनंद साहू ने इस टॉपर छात्रा को 5 हजार रुपए देने और 12वी तक की पढ़ाई की फीस देने की घोषणा की थी। वे 5 हजार रुपए दे चुके हैं। रिटायर्ड प्रभारी प्रिंसिपल आनंद साहू का कहना है कि इतने बड़े गौरव दिवस पर आदिवासी बालिका की इस उपलब्धियां को देखते हुए प्रशासन व सरकार में बैठे जनप्रतिनिधियों को ऐसी प्रतिभा का सम्मान करना चाहिए था ताकि दूसरे लोग भी उससे प्रेरित होते। क्षेत्र से ओर प्रतिभाऐ सामने आती।