
वरिष्ठ अधिवक्ता भरत सेन
खनिज नियम 2022 की मार: बैतूल में जप्त वाहन पुलिस थानों में कबाड़ बन रहे, मालिकों का संकट गहराया
**बैतूल, 08 दिसंबर 2025 (विशेष संवाददाता)**: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में खनिज विभाग की कार्रवाईयों ने सैकड़ों निर्दोष वाहन मालिकों की जिंदगी दांव पर लगा दी है। मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियम, 2022 के कथित सख्त प्रावधानों के चलते जप्त वाहन पुलिस थानों में बंधक पड़े सड़ रहे हैं, जबकि राजस्व न्यायालय (अपर कलेक्टर) सुनवाई तो कर रही है, लेकिन अंतरिम अभिरक्षा में वाहन लौटा नहीं पा रही। खान एवं खनिज (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर एक्ट) की धारा 21(5) के तहत राजस्व वसूली के मुकदमे लंबित हैं, लेकिन जप्त वाहन या तो रिक्त हैं या वैध ईटीपी (इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट परमिट) वाले खनिज से लदे। विभाग दंडिक न्यायालय में धारा 22 के तहत परिवाद पत्र पेश करने से कतरा रहा है, जिससे संज्ञेय अपराध होने के बावजूद मामले लटक रहे। नतीजा: वाहन मालिकों का आर्थिक संकट, फाइनेंस किश्तें बकाया, और परिवार भुखमरी के कगार पर। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
**समस्या का मूल: नियम 2022 का ‘जाल’ और एक्ट 1957 का विरोधाभास**
मध्य प्रदेश खनिज नियम, 2022 के नियम 21 के तहत जप्त वाहनों की सुपुर्दगी या अंतरिम अभिरक्षा के लिए भारी राशि जमा करनी पड़ती है। 10-पहिया डम्पर के लिए 3 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा करने पर ही राजस्व न्यायालय (प्रारूप 1, अनुसूची 1) वाहन मुक्त करने का आदेश दे सकती है। लेकिन एमएमडीआर एक्ट 1957 की धारा 21 वाहनों की मुक्ति का क्षेत्राधिकार दंडिक न्यायालय को देती है, जबकि नियम 2022 इसे राजस्व न्यायालय तक सीमित रखते हैं। यह विरोधाभास विभाग को फायदा दे रहा—वे केवल राजस्व वसूली पर फोकस करते हैं, दंडिक प्रक्रिया शुरू नहीं। परिणामस्वरूप, खनिज अपराधों में वृद्धि हो रही है, क्योंकि अपराधी जानते हैं कि वाहन लंबे समय तक बंधक रहेंगे। बैतूल में पिछले 6 माह में 50 से अधिक वाहन जप्त, जिनमें से 70% रिक्त या वैध दस्तावेज वाले साबित हुए, लेकिन मुक्ति में देरी।
खनिज विभाग बैतूल केवल राजस्व न्यायालय तक मामलों को सीमित रखता है, धारा 22 के तहत परिवाद पत्र दंडिक न्यायालय में पेश करने से बचता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जानबूझकर की गई लापरवाही है, जो छोटे व्यापारियों को तोड़ने का हथियार बन गई। वाहन मालिकों को अब न केवल जुर्माना, बल्कि वाहन रखरखाव, फाइनेंस ब्याज और परिवारिक संकट का सामना करना पड़ रहा।
**उदाहरण 1: हमलापुर तालाब गहरीकरण का वैध कार्य, फिर भी जप्ती का शिकार**
बैतूल जिले के नगर पालिका क्षेत्र में स्थित हमलापुर तालाब का गहरीकरण कार्य पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है। इसके लिए खनिज विभाग से गौण खनिज मुरम (रेत जैसा) परिवहन की वैध अनुमति ली गई थी। 14 जून 2025 को राजस्व एवं खनिज अमला खसरा नंबर 93 (रकबा 9.458 हेक्टेयर) पर पहुंचा। उत्खनन में प्रयुक्त मशीनें एवं वाहन जप्त कर लिए गए, और उन्हें पुलिस थाना बैतूलगंज में खड़ा कर दिया गया।
खनिज निरीक्षक वाई.के. वशिष्ठ की जांच में पाया गया कि डम्पर नंबर एमपी-05-जी-6638 में मुरम लदी हुई थी, लेकिन रॉयल्टी ईटीपी नंबर 2520470991 मौजूद था, जो सत्यापित हो गया। डम्पर चालक रमेश पवार एवं स्वामी अजय बर्डे ने बताया कि वे ग्राम खंडारा से चिचोली तक वैध परिवहन कर रहे थे, लेकिन हमलापुर पहुंचते ही ‘संदेह’ के आधार पर अमले ने जब्ती कर ली। वैध दस्तावेज होने के बावजूद वाहन 6 माह से थाने में सड़ रहा—कल-पुर्जे खराब, फाइनेंस किश्तें बकाया। अजय बर्डे ने कहा, “मेरा परिवार भुखमरी के कगार पर है। 3 लाख जमा कैसे करूं? विभाग ने वैध कार्य को अवैध ठहरा दिया।” अपर कलेक्टर बैतूल में धारा 21(5) का राजस्व वसूली मुकदमा लंबित है, लेकिन अंतरिम अभिरक्षा नहीं मिली।
**उदाहरण 2: डकनीभाटा में रिक्त डम्पर पर रेत का ‘झूठा’ आरोप**
5 नवंबर 2025 को ग्राम डकनीभाटा (तीरभाटा) के पास सहायक खनिज अधिकारी बी.के. नागवंशी ने रात्रि करीब 1 बजे 3-एक्सल (10-पहिया) डम्पर नंबर एमपी-28-एच-1864 की जांच की। प्रतिवेदन के अनुसार, चालक ने अमले के पहुंचने से पहले ही रेत खाली कर दी, और वाहन में कुछ मात्रा बची रही। चालक ने बताया कि हमेश उइके (ग्राम तीरभाटा) ने रेत भरने बुलाया था। वाहन स्वामी सुनील रघुवंशी (जुन्नारदेव, छिंदवाड़ा) मौके पर थे। बावजूद इसके, रिक्त वाहन जब्त कर थाना सारणी में खड़ा कर दिया गया। नपाई में 18 घन मीटर रेत बताई गई।
लेकिन वाहन स्वामी एवं चालक का दावा है कि डम्पर फ्लाई ऐश (उड़न राख) परिवहन का है, जो सारणी लेने जा रहा था। रात होने से ग्राम में ठहरे, और वाहन में फ्लाई ऐश के अंश थे—रेत का कोई लेना-देना नहीं। निरीक्षक ने बिना पूछताछ, गवाह लिए या सबूत जुटाए दस्तावेज तैयार कर फर्जी केस बनाया। सुनील रघुवंशी ने कहा, “यह शक्ति दुरुपयोग है। वाहन कबाड़ बन रहा, रोजगार चौपट।” अपर कलेक्टर में ₹2.33 लाख वसूली का मुकदमा चल रहा, लेकिन सुपुर्दगी के लिए 3 लाख जमा की मांग।
**विभाग की चाल: दंडिक प्रक्रिया से बचाव, राजस्व पर फोकस**
एमएमडीआर एक्ट 1957 की धारा 21 संज्ञेय अपराधों में दंडिक न्यायालय को जप्त वाहनों की अंतरिम अभिरक्षा का अधिकार देती है, लेकिन बैतूल खनिज विभाग धारा 22 के तहत परिवाद पत्र पेश करने से बच रहा। नियम 2022 के कारण मामले केवल राजस्व न्यायालय तक सीमित रहते हैं, जहां राशि जमा न होने पर वाहन लटकते रहते। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जानबूझकर की गई रणनीति है, जो अपराध बढ़ावा देती है। बैतूल में 2025 में 60+ जप्त वाहन, जिनमें 40% वैध साबित, लेकिन मुक्ति में औसत 4-6 माह लगे।
**मालिकों का संकट: कबाड़ वाहन, बकाया किश्तें, परिवारिक विपदा**
जप्त वाहनों से मालिकों को दोहरी मार: थाने में रखरखाव न होने से कल-पुर्जे खराब, फाइनेंस कंपनियां ब्याज वसूल रही। अजय बर्डे जैसे मालिकों का परिवार भरण-पोषण का संकट। ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, “नियम 2022 ने वाहनों को कबाड़खाना बना दिया। हाईकोर्ट जाएंगे।” पर्यावरण कार्यकर्ता ने चेतावनी दी, “खनन नियम पर्यावरण बचाने के हैं, न कि गरीबों को लूटने के।”
**वकील भारत सेन का अभिमत: कानूनी विरोधाभास सुधारें, अन्यथा अराजकता**
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं खनन विशेषज्ञ भारत सेन (बैतूल कोर्ट) ने कहा: “एमएमडीआर एक्ट 1957 और नियम 2022 के प्रावधान एक-दूसरे के विरुद्ध हैं—एक दंडिक कोर्ट को अधिकार देता है, दूसरा राजस्व को। बैतूल जैसे मामलों में विभाग दंडिक प्रक्रिया से बचकर राजस्व वसूली पर टिका है, जो शक्ति दुरुपयोग है। धारा 21(5) वसूली के लिए है, लेकिन बिना सबूत की जप्ती बीएनएस 2023 धारा 198 का अपराध। आम जनता जागे: शिकायत लोकायुक्त को करें, हाईकोर्ट रिट याचिका दायर। सरकार नियम सुधारें—अंतरिम अभिरक्षा आसान बनाएं। अन्यथा, निर्दोष कबाड़ बनेंगे।”
यह समस्या पूरे मध्य प्रदेश में फैल रही। राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग।