
सुखदेव मोहबे और किरण ढँढोरिया
WCL पाथाखेड़ा की खदानों में वर्षों से कार्यरत असंगठित क्षेत्र के ठेका कामगार संगठन ने अपनी मांगो को ले कर महाप्रबंधक कार्यालय के समीप आज से अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन आंदोलन शुरू कर दिया है। समाजसेवी प्रदीप नागले ने बताया की खदानों में कार्यरत असंगठित कामगार ठेकेदारो के शोषण का शिकार है। हमें हमारा मेहनताना भी समय पर और पूरा नहीं दिया जा रहा। जबकि प्रकृति के विपरीत खदानों में जान जोखिम में डालकर जहाँ साँस लेने में भी हवा का अभाव होता है, कीचड़ पानी में जी-जान लगाकर उत्पादन में अपना पूर्ण सहयोग देते हैं। लेकिन आज वही वर्ग शोषण और उपेक्षा का शिकार है। उन्होंने प्रबंधन से शीघ्र उनकी मांगो के निराकरण की मांग की है। अन्यथा आंदोलन की आंच नागपुर हेड क्वाटर तक पहुंचेगी।
उन्होंने बताया की ठेकेदार हमारा वेतन दो दो तीन-तीन महीनें नहीं देते हैं और हमारे खातों में 35,000/- से लेकर 40,000/- डाले जाते हैं और उसमें से 12,000 13,000 हजार छोड़कर पूरे पैसे लगभग तेईस हजार से पच्चीस हजार वापस ले लिये जाते हैं। अगर वापस नहीं करें तो काम से ही बंद कर देते हैं डराया धमकाया जाता है और यह कृत्य वर्षों से अनवरत चला आ रहा है।
ज्ञात हो कि 4 फरवरी 2026 को तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन के पश्चात नौ सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई थी। कुछ बिंदुओं पर सहमति एवं आश्वासन दिए गए, परंतु श्रमिकों का आरोप है कि शेष महत्वपूर्ण मांगों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजदूरों का कहना है कि कंपनी द्वारा निर्धारित दर से पूर्ण वेतन नहीं दिया जा रहा, महीनों तक भुगतान लंबित रखा जाता है और कुछ मामलों में बैंक खातों में जमा राशि का एक-तिहाई हिस्सा अनाधिकृत रूप से वापस ले लिया जाता है।
इसके अतिरिक्त, कुछ अधिकारियों एवं ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों को खदान में कार्य पर जाने से रोकने की शिकायतें भी सामने आई हैं। 9 फरवरी को क्षेत्रीय प्रबंधक एवं एस.ओ. माइनिंग को पुनः आवेदन दिया गया, परंतु अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
वेतन संकट के चलते श्रमिक परिवार गहरे आर्थिक दबाव में हैं। बच्चों की फीस, इलाज एवं दैनिक आवश्यकताओं पर संकट मंडरा रहा है। मानसिक तनाव के कारण पारिवारिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और समयबद्ध पूर्ण वेतन भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो 27 फरवरी से आंदोलन प्रारंभ होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन एवं संबंधित ठेकेदारों की होगी।पाथाखेड़ा की कोयला पट्टी में उठी यह चिंगारी अब व्यापक श्रमिक आंदोलन का रूप ले सकती है। प्रशासन की अगली पहल पर सबकी निगाहें टिकी हैं।





