
ब्यूरो रिपोर्ट
मजदूरों के हितों के लिए मुख्य अभियंता कार्यालय में आयोजित बैठक में मज़दूर अनुपस्थित, पेटी कॉन्टैक्टर एवं ठेकेदारों संघ बैठक संपन्न
नवागत कलेक्टर को श्रमिक संघ द्वारा की गई शिकायत के बाद कलेक्टर विजिट के दिन ही बैठक आयोजित, त्रिपक्षीय बैठक पर उठे सवाल

सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट में श्रमिक शोषण मामले में प्रबंधन के श्रम कल्याण अधिकारी नरेश पनवार और जिला श्रम अधिकारी धम्मदीप भगत की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में ठेका मजदूरों के शोषण के मामले में निराकरण के लिए सारणी में बैठक आयोजित की जाती है परंतु बैठक में मजदूरों को ही नहीं बुलाया जाता बैठकों में अक्सर एक ही मजदूर नेता उपस्थित रहते हैं परंतु मजदूरों की समस्या जस की तस बनी हुई है
सतपुड़ा प्लांट में विधायक प्रतिनिधि एवं मानव अधिकार आयोग के जिला प्रभारी संजय अग्रवाल ने बताया कि सतपुड़ा प्लांट के सिविल विभाग में तो कॉलोनी देखरेख के कार्यों में प्लंबरिंग के कार्य में सिर्फ एक मजदूर, सेनेटरीग के कार्य में सिर्फ दो मजदूर और कारर्पेंटिंग के कार्य में भी सिर्फ दो मजदूर लगाकर काम चलाया जा रहा है एवं इन मजदूरों को ठेकेदार द्वारा नगद भुगतान किया जाता है और पी एफ भी नहीं काटा जाता , बाग बगीचे में काम करने वाले लगभग 34 मजदूर को तो 320 की दर से ही भुगतान किया जाता है और माह में 20 दिन ही काम दिया जाता है और ऐसा ही हाल कोल हैंडलिंग प्लांट में काम करने वाले लगभग 135 मजदूरों का है उनका भी बहुत शोषण है कोल सैंपलिंग में कार्यरत कुछ मजदूरों को तो 7500 प्रतिमाह वेतनमान दिया जाता है तथा ज्यादातर मजदूरों से कुशल श्रेणी का काम कर कर उन्हें अर्ध कुशल का वेतन मान दिया जाता है
इन विषयों का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों को कुछ दिनों पूर्व ही नोटिस दिए गए हैं और सुधार नहीं होने पर कठोर कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी गई,
श्रमिकों से जुड़े इन मामलों की बैठक में कोई चर्चा नहीं की गई इसलिए श्रम अधिकारियों की भूमिका पर संदेह है
प्रबंधन के श्रम कल्याण अधिकारी अधिकारी नरेश पनवार पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट के श्रम कल्याण अधिकारी नरेश पनवार की भूमिका भी चर्चा में है। मजदूरों और कर्मचारियों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर श्रमिकों की समस्याएं लगातार बढ़ती रहीं परंतु स्थानीय प्रबंधन और श्रम कल्याण अधिकारी द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया
लोगों का कहना है कि यदि श्रमिकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता, तो मामला श्रम विभाग की जांच तक नहीं पहुंचता।
श्रमिक संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्हें तो बैठक की सूचना तक नहीं दी गई जबकि उनके द्वारा मजदूरों के हो रहे शोषण को जिला मुख्यालय पर पहुंचाया गया है
बैठक में प्रमुख रूप से मुख्य अभियंता अनिल लिलोरे, अधीक्षण अभियंता संजय जोशी, जिला श्रम अधिकारी धम्मदीप भगत, श्रम इंस्पेक्टर अक्षय बानिया, पेटी कॉन्टैक्टर सनी एरुलु, कंपनी सुपरवाइजर रवि रघुवंशी, श्रमिक नेता राकेश नामदेव, ठेकेदार संघ के संरक्षक नन्हे राजबली सिंह, ठेकेदार संघ पदाधिकारी दिनेश साबले, जग्गी आहूजा, सहित अन्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे




