
ब्यूरो रिपोर्ट
बैतूल जिला चिकित्सालय में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब तीन घंटे तक बिजली गुल रहने और जनरेटर में डीजल नहीं होने की शिकायत पत्रकार नितिन अग्रवाल द्वारा कलेक्टर से किए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया और डीजल की व्यवस्था कर जनरेटर चालू कराया गया।
आरोप है कि बिजली व्यवस्था, बहाल होने के बाद अस्पताल की बिजली मेंटेनेंस देखने वाले एक कर्मचारी ने पत्रकार नितिन अग्रवाल को सार्वजनिक रूप से “देख लेने” की धमकी दे डाली। घटना के समय जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन भी मौके पर मौजूद थे। सिविल सर्जन ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
यह है पुरा मामला
बैतूल जिला चिकित्सालय में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एक बड़ी लापरवाही सामने आई। रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच अस्पताल का प्रसूति वार्ड और SNCU यानी स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट अचानक अंधेरे में डूब गया। बताया जा रहा है कि जनरेटर में डीजल नहीं होने के कारण बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी और करीब तीन घंटे तक वार्ड अंधेरे में रहा।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि नवजात बच्चों को गोद में लेकर माताएं वार्ड से बाहर निकल आईं। SNCU में भर्ती कई बीमार नवजातों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। सूत्रों के मुताबिक वार्ड का बैटरी बैकअप करीब एक घंटे का था, लेकिन तीन घंटे तक बिजली नहीं आने से आवश्यक उपकरणों ने भी काम करना बंद कर दिया। अस्पताल परिसर में बच्चों के रोने की आवाजें गूंजने लगीं और परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया।
परिजनों की शिकायत पर अस्पताल स्टाफ ने बताया कि डीजल सप्लायर का पुराना भुगतान लंबित होने के कारण जनरेटर के लिए डीजल उपलब्ध नहीं था। देर रात जब मामले की शिकायत कलेक्टर तक पहुंची, तब स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया। आनन-फानन में एंबुलेंस के जरिए डीजल मंगवाया गया और जनरेटर चालू कर बिजली व्यवस्था बहाल की गई।
कलेक्टर के संज्ञान में आने के बाद जिला अस्पताल के आईएमओ और सिविल सर्जन भी मौके पर पहुंचे और व्यवस्थाएं दुरुस्त कराईं। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में नवजातों की सुरक्षा से जुड़ी इतनी गंभीर लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? राहत की बात यह रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




