
ब्यूरो रिपोर्ट
नई दिल्ली। देश की चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में कथित धांधली, पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विफलताओं को लेकर चौतरफा घिरे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है. विपक्ष और आंदोलनकारी छात्रों की यह सबसे प्रमुख मांग थी, जिसके आगे आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना पड़ा।
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपना त्यागपत्र साझा करते हुए लिखा:
“पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम को देखकर मेरा मन अत्यंत दुःखी है. यह मेरे लिए किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश की युवाशक्ति और उनके भविष्य का सवाल है. जंतर-मंतर और देश भर में जो अप्रिय स्थिति बनी है, उसका कोई राष्ट्रविरोधी ताकतें गलत लाभ न उठा सकें और हमारे देश के बच्चों का समय अदालती व कानूनी पेचीदगियों के बजाय पढ़ाई में लगे, इसी भावना के साथ मैं नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा माननीय प्रधानमंत्री जी को प्रेषित कर रहा हूँ.”
छात्र आंदोलन की बड़ी जीत, CJP ने कहा- ‘झुकती है दुनिया’
जंतर-मंतर पर 36 दिनों से भूख हड़ताल और प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने इसे छात्रों की ऐतिहासिक जीत बताया है. दीपके ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो सरकार कहती थी कि दबाव में इस्तीफे नहीं होते, आज उसे छात्रशक्ति के आगे घुटने टेकने पड़े हैं. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिवसीय अनशन और संसद में विपक्ष के भारी हंगामे को भी इस निर्णय की मुख्य वजह माना जा रहा है.
इस्तीफे से ठीक पहले सरकार ने किए थे कड़े फैसले
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भूमिका पिछले 24 घंटों में ही तैयार हो चुकी थी:
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- NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त: शुक्रवार रात ही सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया था और उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने के आदेश दिए थे.
- शिक्षा सचिवों का तबादला: इससे एक दिन पहले ही मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी सहित दो बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को पद से हटा दिया गया था.
आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्रीय कैबिनेट में जल्द ही फेरबदल कर किसी नए वरिष्ठ नेता को शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा सौंपा जाएगा. हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पहला कदम है, उनकी लड़ाई NTA को पूरी तरह भंग करने और प्रभावित छात्रों को उचित न्याय मिलने तक जारी रहेगी.