महिला बाल विकास विभाग का बड़ा एक्शन; 217 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नोटिस, हो सकती है एफआईआर और सेवा समाप्त

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ब्यूरो रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) की एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। विभाग ने मैदानी स्तर पर बड़ी लापरवाही पकड़े जाने के बाद 217 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि ये कर्मचारी अपने आवंटित ग्रामीण केंद्रों पर रहने के बजाय सैकड़ों किलोमीटर दूर बड़े शहरों में रहकर नौकरी का खेल खेल रही थीं।
इस बड़ी कार्रवाई और मामले का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
1. शहरों से चल रहा था अप-डाउन का खेल
- सैकड़ों किलोमीटर की दूरी: जांच रिपोर्ट के अनुसार, कई कार्यकर्ता अपने निर्धारित गांवों में रहने के बजाय 10 किलोमीटर से लेकर 216 किलोमीटर दूर बड़े शहरों में आलीशान जिंदगी जी रही थीं।
- कागजी खानापूर्ति: ये कर्मचारी पूरे महीने केंद्रों से नदारद रहती थीं और महीने में केवल एक या दो बार आकर सिर्फ कागजी रजिस्टर भरने का काम कर रही थीं।
2. चौंकाने वाले मामले आए सामने
विभागीय जांच में दूरी को लेकर कुछ बेहद हैरान करने वाले उदाहरण सामने आए हैं:
- जबलपुर से पन्ना: पडरहा-2 केंद्र की कार्यकर्ता रजनी यादव 216 किलोमीटर दूर जबलपुर में रहकर नौकरी चला रही थीं।
- कटनी से पन्ना: कुडई-2 केंद्र की रचना यादव 180 किलोमीटर दूर कटनी से अप-डाउन कर रही थीं।
- छतरपुर से पन्ना: पडरहा-1 की मीना सोनी 91 किलोमीटर दूर छतरपुर में निवास कर रही थीं।
3. बच्चों के पोषण पर लगा पलीता, प्रशासन सख्त
- योजनाएं हुईं ठप: कार्यकर्ताओं के लगातार गायब रहने से ग्रामीण क्षेत्रों के मासूम बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाला पूरक पोषाहार और अन्य सरकारी योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी थीं।
- कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) अवधेश कुमार सिंह ने इस बड़ी लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी संबंधित परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने और एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी है।
असर: इस कार्रवाई से पूरे महिला बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ग्रामीण बच्चों के हक का पैसा और पोषण मारने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।






