
अधिवक्ता भारत सेन बैतूल
बैतूल। यदि आप किसी को चेक जारी कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं! चेक बाउंस होने को हल्के में लेना आपको सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है। जिला न्यायालय बैतूल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय ने चेक अनादरण (Cheque Bounce) के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को तत्काल जेल भेजने और भारी-भरकम जुर्माना लगाने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया है।
यह कड़ा फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) बैतूल, श्रीमती संगीता भारती राठौर की अदालत ने सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी अजीतसिंह भाटिया, उम्र 50 वर्ष, पिता महेन्दरसिंह भाटिया, निवासी-निर्मल टाकीज के पास, राधाकृष्ण वार्ड, फुलचूर रोड़, गोंदिया, जिला-गोंदिया (महाराष्ट्र) को धारा 138 परकाम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के तहत दोषी पाते हुए 1 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर चेक राशि की दोगुनी रकम, यानी 8,00,000 रुपये (आठ लाख रुपये) का भारी जुर्माना (प्रतिकर) भी लगाया है। यदि आरोपी यह राशि अदा नहीं करता है, तो उसे 3 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
## क्या था पूरा मामला?
परिवादी अधिवक्ता नितिन मिश्रा ने बताया कि मामला वर्ष 2018 से अदालत में लंबित था। बैतूल निवासी परिवादी श्रीमती कुमकुम मिश्रा से आरोपी अजीतसिंह भाटिया ने जनवरी 2017 में 4,00,000 रुपये की राशि उधार ली थी। इस राशि को चुकाने के लिए आरोपी ने 4 लाख रुपये का एक चेक जारी किया था। जब परिवादी ने इस चेक को बैंक में लगाया, तो आरोपी के खाते में पर्याप्त व्यवस्था न होने (“Exceeds Arrangement”) के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद विहित समय में डिमाण्ड नोटिस देने पर भी जब आरोपी ने पैसे नहीं लौटाए और डिमाण्ड नोटिस का जवाब भी नहीं दिया तो मामला कोर्ट पहुंचा।
## कोर्ट से ही सीधे जेल भेजा गया आरोपी
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि चेक बाउंस होने से न केवल व्यापारिक साख खत्म होती है, बल्कि यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। आरोपी विचारण के दौरान से ही निरंतर न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में बंद है और सजा के आदेश के बाद उसे सीधे बैतूल जेल में ही निरुद्ध रखने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने आरोपी को किसी भी प्रकार की परिवीक्षा (Probation) का लाभ देने से साफ इनकार कर दिया। परिवादी अधिवक्ता नितिन मिश्रा ने बताया कि न्यायालय में मामला वर्ष 2018 से लंबित था, आरोपी पेशी तारीखो पर गैर हाजिर रहता था, अदालत ने आरोपी के खिलाफ वारंट जारी कर रखा था, आरोपी बैंतूल कोर्ट में पहुंचा तो पुलिस ने पकड लिया। अदालत में मामला बंधित था और अदालत ने गुण दोष पर फैसला सुना दिया।
## आम जनता के लिए बड़ा संदेश: चेक को ‘खिलौना’ न समझें
यह फैसला समाज और उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो किसी को भी चेक देकर बाद में भुगतान रोकने या खाते में पैसे न रखने की चालाकी करते हैं। कानून अब ऐसे मामलों में बेहद सख्त है:
* कानून का डंडा: चेक पर केवल आपके हस्ताक्षर होना ही आपको दोषी बनाने के लिए काफी है。
* सीधे जेल और डबल जुर्माना: चेक बाउंस होने पर न केवल जेल जाना पड़ेगा, बल्कि मूल राशि का दोगुना पैसा भी चुकाना पड़ सकता है।
* लेनदेन की पवित्रता: यह फैसला आम जनता को आश्वस्त करता है कि यदि किसी के साथ वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो अदालतें पीड़ित के साथ खड़ी हैं।
अगर आप भी किसी को चेक दे रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके खाते में पर्याप्त पैसे हों, क्योंकि अदालतें अब लापरवाही या धोखाधड़ी करने वालों को कोई ढील नहीं दे रही हैं।



