
भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने सत्र 2026-27 की हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) बोर्ड परीक्षाओं के पैटर्न में दो बेहद महत्वपूर्ण और बड़े बदलाव किए हैं। मंडल द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब परीक्षाओं में 2 अंकों वाले लघुउत्तरीय प्रश्नों में मिलने वाली ‘आंतरिक विकल्प’ (Internal Choice/अथवा) की सुविधा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही, NSQF (नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क) के तहत आने वाले व्यावसायिक विषयों के मूल्यांकन को लेकर भी नए नियम लागू कर दिए गए हैं।
बोर्ड के इस फैसले से इस बार परीक्षा देने जा रहे लाखों छात्र-छात्राओं की तैयारी और प्रश्न-पत्र के पैटर्न पर सीधा असर पड़ेगा।
1. 2 अंकों के प्रश्नों से ‘अथवा’ (विकल्प) का झंझट खत्म, सभी प्रश्न करने होंगे अनिवार्य
अब तक एमपी बोर्ड की परीक्षाओं में 2 अंकों वाले प्रश्नों में छात्रों को ‘अथवा’ के रूप में दो में से किसी एक प्रश्न को चुनने का विकल्प मिलता था। लेकिन नए ब्लूप्रिंट के अनुसार:
- 2 अंकों के सभी प्रश्न अब अनिवार्य (Compulsory) होंगे।
- प्रश्न-पत्र के इस खंड में छात्रों को कोई अतिरिक्त विकल्प नहीं दिया जाएगा, यानी जितने प्रश्न पूछे जाएंगे, उन सभी के उत्तर लिखने होंगे।
- 3 और 4 अंकों वाले प्रश्नों में राहत: बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 3 अंकों और 4 अंकों वाले दीर्घउत्तरीय प्रश्नों में पहले की तरह ही आंतरिक विकल्प (अथवा) की सुविधा जारी रहेगी।
2. NSQF (व्यवसायिक विषयों) के लिए लागू हुए नए नियम
रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संचालित NSQF (National Skills Qualification Framework) विषयों के लिए भी मंडल ने अंक निर्धारण और परीक्षा पद्धति में संशोधन किया है:
- नए नियमों के तहत अब इन विषयों के सैद्धांतिक (Theory) और व्यावहारिक (Practical) मूल्यांकन के वेटेज को सुधारा गया है ताकि छात्रों के कौशल का सही आंकलन हो सके।
- आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) और प्रोजेक्ट वर्क की मॉनिटरिंग अब सीधे बोर्ड स्तर से की जाएगी।
परीक्षा की शुचिता और मूल्यांकन को बेहतर बनाने का प्रयास
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 2 अंकों के प्रश्नों से विकल्प हटाना छात्रों को पूरा पाठ्यक्रम गहराई से पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। अक्सर छात्र ‘अथवा’ के भरोसे कुछ अध्यायों को छोड़ देते थे, लेकिन अब उन्हें हर छोटे टॉपिक को गंभीरता से लेना होगा।
माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे त्रैमासिक और छमाही परीक्षाओं में भी इसी नए पैटर्न का उपयोग करें, ताकि मुख्य बोर्ड परीक्षा से पहले छात्र इस बड़े बदलाव के अभ्यस्त (कंफर्टेबल) हो सकें।





