
- वित्त विभाग ने राज्य कर्मचारी आयोग के पुनर्गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
- सेवानिवृत्त IAS मलय श्रीवास्तव को सौंपी गई आयोग के अध्यक्ष पद की कमान।
- आयोग में अध्यक्ष सहित कुल 7 पद तय, कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों और पदनाम पर होगा बड़ा फैसला।
- केंद्र और अन्य राज्यों के वेतनमान व पदनामों से तुलना कर तैयार होगी रिपोर्ट।
भोपाल (न्यूज़ डेस्क)। मध्यप्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। राज्य के कर्मचारियों की समस्याओं, वेतन विसंगतियों और पदनाम परिवर्तन जैसे लंबित मुद्दों के त्वरित समाधान के लिए मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा राज्य कर्मचारी आयोग के पुनर्गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। डॉ. मोहन यादव सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों की मांगों को सुलझाने की प्रक्रिया में अब तेजी आएगी।
वरिष्ठ प्रशासनिक और न्यायिक चेहरों को मिली जिम्मेदारी
पुनर्गठित आयोग में कुल 7 पद निर्धारित किए गए हैं, जिसमें प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है:
- अध्यक्ष: सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी मलय श्रीवास्तव।
- न्यायिक सदस्य: सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह।
- प्रशासनिक सदस्य: सेवानिवृत्त कार्यालय अधीक्षक बादाम सिंह।
- सचिव: वित्त विभाग के सेवानिवृत्त उपसचिव अजय चौबे को आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है।
- पदेन सदस्य (Ex-Officio Members): इसमें तीन पदेन सदस्य शामिल रहेंगे, जिनमें संचालक (पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा, म.प्र.), सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नामांकित सचिव और वित्त विभाग के नामांकित सचिव शामिल हैं।
इन 3 प्रमुख पैमानों पर काम करेगा आयोग
अधिसूचना के अनुसार, आयोग कर्मचारियों की मांगों और वेतन विसंगतियों पर विचार करते समय पूरी तरह से व्यावहारिक और आर्थिक संतुलन बनाकर काम करेगा। आयोग मुख्य रूप से इन बिंदुओं को आधार बनाएगा:
- केंद्रीय और राज्य स्तरीय तुलना: केंद्र सरकार तथा अन्य राज्यों के समकक्ष पदों और उनके वेतनमानों/पदनामों का गहन अध्ययन किया जाएगा।
- वित्तीय सीमाओं का आकलन: प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और राज्य की प्रति व्यक्ति आय को ध्यान में रखा जाएगा।
- विकासात्मक प्राथमिकताएं: राज्य के विकास के लिए जरूरी प्राथमिकताओं और आर्थिक संतुलन को देखते हुए अनुशंसाएं तैयार की जाएंगी।
आयोग को मिलीं विशेष शक्तियां
इस पुनर्गठित आयोग को व्यापक प्रशासनिक शक्तियां दी गई हैं। आयोग अपनी कार्यप्रणाली खुद तय कर सकेगा और अपनी जांच व रिपोर्ट तैयार करने के लिए किसी भी सरकारी विभाग से दस्तावेज, रिकॉर्ड या साक्ष्य मांग सकेगा। सभी विभागों के लिए आयोग को मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगा और विशेष मामलों में अंतरिम रिपोर्ट भी दे सकेगा।
कर्मचारियों में जागी बड़ी उम्मीद: करीब छह साल पहले गठित हुए इस आयोग की गतिविधियां लंबे समय से धीमी थीं। अब वित्त विभाग द्वारा किए गए इस नए पुनर्गठन और नई नियुक्तियों के बाद प्रदेश के नियमित, संविदा और अन्य संवर्ग के कर्मचारियों में अपनी वेतन विसंगतियों और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों के निराकरण की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं।





