
राम वनवास से अवध में छाया सन्नाटा, द्रवित हुए श्रद्धालु
69वें रामलीला उत्सव में जीवंत हुए दशरथ प्रतिज्ञा, राम वनवास और केवट संवाद के मार्मिक प्रसंग
बैतूल। पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए राजमहल का सुख त्यागकर वन की ओर प्रस्थान करते प्रभु श्रीराम, पुत्र वियोग में व्याकुल राजा दशरथ और प्रभु के चरण पखारने के लिए आतुर केवट की भक्ति। बैतूल गंज स्थित रामलीला मैदान में शुक्रवार रात मंचित इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। कई दृश्यों में ऐसा लगा मानो अवधपुरी में छाया सन्नाटा और राम वनवास का दुख मंच से निकलकर पूरे पंडाल में उतर आया हो।

श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति, बैतूल द्वारा आयोजित 69वें रामलीला व दशहरा उत्सव 2026 की सातवीं शाम 16 अक्टूबर को करुणा, त्याग और भक्ति के नाम रही। रीवा के प्रसिद्ध श्री गणेश रामलीला मंडल, मऊगंज के कलाकारों ने दशरथ प्रतिज्ञा, कैकई संवाद, राम वनवास और केवट संवाद का सजीव मंचन किया। कलाकारों की प्रभावशाली संवाद अदायगी, भाव-भंगिमाओं और अभिनय ने रामकथा के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
मंथरा के बहकावे में आईं कैकई ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगे। उन्होंने भरत के राजतिलक और प्रभु श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने की मांग रखी। एक ओर राजा दशरथ के सामने अपनी प्रतिज्ञा निभाने का धर्मसंकट था, तो दूसरी ओर पुत्र के वियोग की कल्पना उन्हें भीतर तक व्याकुल कर रही थी। प्राण जाहुं पर वचन न जाही की रघुकुल परंपरा और कैकई के कठोर हठ के बीच दशरथ की विवशता का कलाकारों ने मार्मिक चित्रण किया।
इसके बाद वनवास का प्रसंग मंचित हुआ। पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए प्रभु श्रीराम ने बिना किसी विरोध के वन जाने का निर्णय स्वीकार किया। माता सीता और भ्राता लक्ष्मण भी उनके साथ वनगमन के लिए तैयार हुए। राजसी वस्त्रों का त्याग कर वल्कल वस्त्र धारण करते हुए तीनों के वन की ओर प्रस्थान का दृश्य दर्शकों को भावुक कर गया। प्रभु श्रीराम के अयोध्या छोड़ने के साथ ही अवधपुरी में छाए शोक और राजा दशरथ की व्याकुलता ने रामकथा के इस प्रसंग की मार्मिकता को और गहरा कर दिया।
गंगा तट पर पहुंचने के बाद केवट संवाद का मंचन हुआ। केवट की प्रभु के प्रति अनन्य श्रद्धा और उनके चरण पखारने की भक्ति ने पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। प्रभु श्रीराम को गंगा पार उतारने के प्रसंग में केवट का निष्काम प्रेम और समर्पण प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। वनवास के दुख से लेकर केवट की भक्ति तक, सातवें दिन की रामलीला ने दर्शकों को रामकथा के आदर्शों और भावनात्मक पक्ष से जोड़ दिया।
बैतूल गंज में आयोजित यह 12 दिवसीय रामलीला व दशहरा उत्सव 69 वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। इसका आयोजन श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति, बैतूल द्वारा पंजाब युवा सेवा समिति एवं श्री कृष्ण पंजाबी महिला कीर्तन मंडल, बैतूल के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। आयोजन स्थल पर महिलाओं के बैठने के लिए पृथक व्यवस्था भी की गई है।

– रामलीला में आज
रामलीला के आठवें दिन शनिवार, 17 अक्टूबर को रात 9 बजे से दशरथ निधन, भरत मिलाप, सीता हरण, हनुमान परिचय और सुग्रीव मित्रता के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। रामकथा के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को देखने के लिए श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है।




